सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा 15 अप्रैल 1469 को तलवडि ग्राम वर्तमान ननकाना
साहिब पंजाब पाकिस्तान में हुआ था । इनके पिता वेदी वंश के पटवारी लाला कल्याणराय और माता तृप्ता देवी थी ।
गुरु नानक देव का जन्म अखंड भारत के इतिहास के उस काल में हुआ जब मुसलमान भारत में अपने पैर जमा चुके थे
। अनेक मुस्लिम वंश शासन कर चुके थे । दिल्ली पर बहलोल लोदी शासन कर रहा था । ऐसे समय में गुरु नानक देव
के आगमन ने हिंदू मुस्लिम एकता को बल प्रदान किया।
बचपन से ही इनका मन पढऩे लिखने और सांसारिक विषयों में नहीं लगता था। सात साल की उम्र में जब वे
विद्यालय जाने लगे तो ओम का अर्थ बताकर उन्होंने अपने सभी शिक्षकों को आश्चर्यचकित कर दिया। ग्यारह वर्ष
की आयु में जब उनका यज्ञोपवीत संस्कार होने लगा तो उन्होंने पुरोहित से कहा कि मुझे ऐसा जनेऊ पहनावे जो कभी
ना टूटे जिसमें दया की कपास और संतोष का सूत्र हो और जो ईश्वरीय हो।
साधु संत और गरीबों के प्रति उनकी स्नेह की भावना देखकर पिता को चिंता होने लगी । कुछ समय पश्चात सोलह
वर्ष की आयु में इनका विवाह सुलखनी नाम की कन्या से कर दिया। बत्तीस वर्ष की आयु में इनके पहला पुत्र श्रीचंद
और चार वर्ष पश्चात लक्ष्मीचंद पैदा हुए । पर विवाह के बावजूद इनके ज्ञान वैराग्य की प्रवृत्तियां कम नहीं हुई ।
इस संसार के झंझट को छोड़कर वे साधु बन गए । तीन दिन तक अज्ञातवास में रहने के पश्चात उन्होंने घोषणा की
हिंदू.मुसलमान सभी उस परमपिता परमात्मा के पुत्र हैं भेद तो यहां खड़े कर लिए गए हैं इस समय दोनों ही धर्म
गलती पर है वास्तव में ना कोई हिंदू है और न कोई मुसलमान । वर्तमान समय में जब देश के सभी राजनीतिक दल
अपने स्वार्थों की खातिर हिंदू मुस्लिमों को लड़ाने में लगे हुए हैं गुरु नानक देव की वाणी आज भी प्रासंगिक है।
आप धर्म प्रचार के लिये अपने चार मित्रों मरदाना जो कि मुस्लिम थे और उनके साथ पढ़े हुए थे बचपन से ही इनके
दोस्त थेए लहाना बाला और रामदास को लेकर तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े । विभिन्न स्थानों पर धर्म प्रचार करते हुए
दिल्ली पहुंचे । उन दिनों दिल्ली का बादशाह सिकंदर लोदी था वो हिंदू साधु संतों का बहुत विरोधी था और जब उसे

पता लगा कि कोई हिंदू साधु धर्म का प्रचार कर रहा है तो उसने उन्हें अन्य साधुओं के साथ गिरफ्तार कर लिया और
जेल में भेज दिया । बताते हैं कि जेल में चक्की पीसने का काम दिया गया तो इन्होंने चक्की नहीं चलाई और चक्की
स्वयं चलने लगी। कुछ समय बाद गुरुजी की गंभीरता ईश्वर भक्ति भावए देखकर बादशाह ने इन्हें छोड़ दिया।
मरदाना जो इनका सहपाठी था और मुसलमान था उसकी इच्छा थी कि हज मक्का की यात्रा करूं तो गुरुजी ने भी
मुस्लिम देशों में जाकर धर्म प्रचार करने की सोची । इसीलिए पश्चिम पंजाब होते हुए बलूचिस्तान से मक्का चले गए
और मक्का के मुसलमानों को उपदेश दिया । मक्का में एक दिन गहरी नींद के कारण काबा की और पैर करके सो गए
। मुसलमान मौलवी ने जब विरोध किया तो उन्होंने उत्तर दिया कि मेरे पैर उधर कर दो जिधर खुदा ना हो। मौलवी ने
जब इनके पैरों को घुमाया तो वो य़ह देखकर आश्चर्यचकित रह गया कि जिधर भी पैर किए उधर ही उसे काबा नजर
आया। वह मौलवी गुरु नानक देव जी को काजी के पास ले गया । काजी ने पूछा ने पूछा आप कौन हैं । गुरुजी ने उत्तर
दिया मनुष्य। काजी ने फिर पूछा हिंदू या मुसलमान । गुरुजी ने उत्तर दिया पांच तत्वों का पुतला ना हिंदू ना
मुसलमान। मक्का में इस तरह की चर्चाओं से इन्होंने बहुत लोकप्रियता हासिल की।
जब ये बगदाद से रवाना हुए तो वहां के खलीफा ने उन्हें एक चोला भेंट किया जिस पर कई भाषाओं में कुरान की
आयतें लिखी हुई थी। बताया जाता है कि वही चोला आज भी डेरा बाबा नानक मेंं मौजूद है। इन्होंने धर्म प्रचार हेतु
भारत अफगानिस्तान फारस और अरब के मुख्य मुख्य स्थानों का भ्रमण किया। इन यात्राओं को पंजाबी में
उदासियां कहा जाता है।
धर्म प्रचार हेतु देशाटन करते हुए उन्हें लगभग तीस वर्ष हो चुके थे। शेष जीवन करतारपुर में व्यतीत किया। उनकी
शिक्षा हिंदू मुसलमानों में भेदभाव किए बिनाए लोगों को करतारपुर खींचने लगी और लाखों लोग उनके अनुयाई बन
चुके थे। नानक देव ने अपने अंतिम समय में अपने शिष्य लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। जो दूसरे
सतगुरु अंगददेव के नाम से प्रसिद्ध हुए । इस प्रकार लोगों का कल्याण करते हुए श्री गुरु नानक देव बाइस सितंबर
1539 को सत्तर वर्ष की आयु में परम ज्योति में विलीन हो गए। उनका समाधि स्थल गुरुद्वारा ननकाना साहिब
पाकिस्तान मे स्थित है।
इनके अनुयायी इन्हें नानक नानक देव जी बाबा नानक और नानक शाह नामों से याद करते है । आपने सभी धर्मों
की एकता और प्रेम का संदेश दिया । आपकी नीति एवं शिक्षाओं पर बाद में सिख पंथ की स्थापना की गई। और आदि
ग्रंथ और दसम ग्रंथ का सृजन हुआ। जिसमें कुल दस सतगुरु हुए गुरु गोविंद सिंह अंतिम थे। इसके बाद गुरुवाणी को
गुरु माना गया।
नानक देव ने वाहेगुरु एक ओंकार का मंत्र दिया जिसका मतलब ईश्वर एक ही है और उसी ने सब कुछ बनाया है।
उन्होंने धर्म और ज्ञान प्रचार के लिए काव्य और पदों का सृजन किया । इनकी सब रचनाएं आदि गुरु ग्रंथ साहिब में
संग्रहित है। आपने कबीर की निराकार करतार की उपासना पर बल दिया । नानक देव की वाणी उदारता और सादगी

से भरी हुई अहम भाव से शून्यए सच्चाई को दर्शाती हुई ए सादगी पूर्णए शक्तिशाली और प्रेरणादायक है। आपने सभी
धर्मों की एकता और प्रेम का संदेश दिया।
आजादी के 72 वर्षों बादए 9 नवंबर 2019 के दिन वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के गुरदासपुर जिला के
डेरा बाबा नानक चेकपोस्ट से गुरु नानक जी के पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोबाल जनपद में स्थित समाधि स्थल
पर निर्मित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब दरबार साहिब को जोडऩे वाले साढ़े चार किलोमीटर लंबे गलियारे का
उद्घाटन किया। जिससे सैकड़ों तीर्थ यात्री हर वर्ष नानकदेव जी की समाधि पर माथा टेकने और शीश झुकाने को
जाते हैं।
गुरु नानक देव जी के 554 वें जन्म दिवस पर उनके बताए हुए रास्ते पर चले । और एक समरसता वाले समाज का
निर्माण करें यही गुरु नानक देव जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ;अतिवीर जैन ‘पराग’ . विभूति फीचर्स।