मैनपुरी(सुवि)पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने 80-वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन में ध्वजारोहण कर शहीद पुलिस कर्मियों, स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों, शहीदों के परिजनों, पुलिस सेवा में बेहतर कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों, आरक्षियों को प्रतीक चिन्ह, मेडल, प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने के उपरांत उपस्थित अधिकारियों, पुलिस कर्मियों, जन-सामान्य को सम्बोधित करते हुये कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना से सभी को अपने कर्तव्यों, दायित्वों का पूरी निष्ठा, ईमानदारी से निर्वहन करते हुए राष्ट्र को गौरवान्वित करने तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपनी महती भूमिका निभानी होगी। उन्होने कहा कि गुलामी, परतंत्रता के बाद देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए असंख्य सपूतों ने लंबे समय तक संघर्ष किया, अनेक वीरों ने हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमा और राष्ट्र तथा आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपने प्राण न्यौछावर किये, इन्हीं महान बलिदानियों के संघर्ष का परिणाम था कि 15 अगस्त 1947 को देशवासियों को स्वतंत्रता का ऐतिहासिक दिन देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम केवल परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्ति पाने का संघर्ष नहीं था बल्कि इसका उद्देश्य भारत को अपने कानून, अपना शासन और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता प्रदान करना भी था, भारत विश्व में आर्थिक, व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण देश रहा है, लंबे समय तक चली गुलामी के कारण देश आर्थिक, सामरिक और विकास के अनेक क्षेत्रों में पिछड़ गया, स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए संघर्ष किया और देश को आजादी दिलाई।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद अमर शहीदों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके सपनों और अपेक्षाओं के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें, प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व का निर्वहन ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से करें, सेना के जवान, कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी, जन-प्रतिनिधि, उद्योगपति, किसान-मजदूर या समाज का कोई भी नागरिक हो यदि सभी के दिल और दिमाग में राष्ट्र-प्रथम की भावना होगी तो दायित्वों के निर्वहन में किसी प्रकार की चूक की संभावना नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्व के किसी भी देश से कम संभावनाएं नहीं हैं, देश के पास अपार प्राकृतिक संपदा, योग्यता, क्षमता, दक्षता और प्रतिभा मौजूद है, प्रकृति ने भारत को असीम संसाधनों से समृद्ध किया है, भारत की सभ्यता, ऋषियों की ज्ञान परंपरा, नदियां, प्राकृतिक संसाधन और सबसे महत्वपूर्ण देश के नागरिकों की प्रतिभा भारत को दुनिया में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। उन्होंने विशेष रूप से देश के युवाओं की प्रतिभा, क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के युवाओं के पास बुद्धि, विवेक, तकनीकी ज्ञान और नवाचार की अद्भुत क्षमता है, आवश्यकता इस बात की है कि इस प्रतिभा, क्षमता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में किया जाए, हमारे वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशासनिक क्षेत्र के योग्य अधिकारी और अन्य प्रतिभाशाली लोग अपनी योग्यता का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करें। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं के केवल आर्थिक लाभ के लिए विदेशों की ओर पलायन राष्ट्र के लिए चिंता का विषय है, देश में तैयार हुई वैज्ञानिक, तकनीकी प्रतिभा और योग्य मानव संसाधन का अधिकतम लाभ भारत को मिले, इसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा, हमारी योग्यता, क्षमता और बुद्धि का उपयोग राष्ट्रहित में भारत के भीतर हो, यह सामूहिक संकल्प होना चाहिए।

उन्होने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब हम सभी अपने व्यक्तिगत और सामाजिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट होकर काम करेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि क्षेत्रवाद, जातिवाद, धर्मवाद, पंथवाद और अन्य सभी प्रकार के विवादों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें, जब देश के करोड़ों नागरिक एक दिशा में आगे बढ़ेंगे तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में जब देश स्वतंत्रता की शताब्दी मनाए, तब भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो, यह हम सभी का संकल्प होना चाहिए, भारत के पास विकसित राष्ट्र बनने के लिए आवश्यक संसाधन, क्षमता और संभावनाएं पहले से मौजूद हैं, आवश्यकता केवल इन संसाधनों के समुचित उपयोग, सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच की है।
जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए विकसित भारत के निर्माण का संकल्प देश के सामने रखा है, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश भी इस संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है, विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब प्रत्येक नागरिक इसमें अपनी जिम्मेदारी और भूमिका को समझेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, प्रत्येक नागरिक यदि अपनी क्षमता, योग्यता और ऊर्जा का उपयोग राष्ट्रहित में करेगा तो भारत निश्चित रूप से विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें अपने गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है, आज आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वतंत्रता के मूल्य को समझते हुए राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, समृद्ध एवं विकसित भारत का निर्माण करें।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने भूतपूर्व सैनिक कैप्टन अवधेश सिंह कुशवाहा, सूबेदार राजवीर सिंह चौहान, रामपाल सिंह, हवलदार गिरीश चंन्द्र, रामवीर सिंह यादव, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजन अनिल कुमार गुप्ता, विवेक त्रिपाठी, उदयवीर सिंह चौहान, शहीद पुलिस कर्मी सुरेंद्र सिंह, राम प्रकाश के परिजनों, पुलिस पेंशनर्स सेवानिवृत्त अपर पुलिस अधीक्षक राघवेंद्र सिंह चौहान, पुलिस उपाधीक्षक जगदीश सिंह यादव, उप निरीक्षक रामकिशन यादव, रामवीर सिंह चौहान, हरीराम शाक्य, मुख्यालय यूपी 112 में बेहतर कार्य करने वाले कमांडर राम किशोर सिंह, सब कमांडर विनय कुमार, पायलट रामकुमार, कमांडर मानवेंद्र सिंह, क्षितिज मिश्रा, आशीष कुमार, चालक शैलेंद्र, प्रेम सिंह, अमर सिंह, कार्यक्रम का संचालन कर रहे कुशाग्र, शिवानी एवं पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, एस.पी. सिटी अरुण कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया, स्कूली बच्चों द्वारा पुलिस, देश की रक्षा में तैनात सैनिकों को लिखी चिट्टियों को पर्यटन मंत्री ने पुलिस अधीक्षक को उपलब्ध कराया।
इस दौरान जिलाध्यक्ष ममता राजपूत, उदय चौहान, पंकज भदौरिया, डॉ. विमल पाण्डेय, सुमित चौहान, अमित गुप्ता, किशन दुबे सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों के अलावा पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, अपर पुलिस अधीक्षक शहरी अरुण कुमार, उप जिलाधिकारी सदर श्यामप्रताप सिंह, क्षेत्राधिकारी सदर, करहल, कुरावली अशोक सिंह, अजय चौहान, सच्चिदानन्द, क्षेत्राधिकारी यातायात दीपशिखा सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी आदि उपस्थित रहे।



