मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने 80-वें स्वतंत्रता दिवस पर कलेक्ट्रेट में ध्वजारोहण के उपरांत उपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों, स्कूली बच्चों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वतंत्रता केवल अधिकार प्राप्त करने का नाम नहीं बल्कि अधिकारों के साथ दायित्वों को समझने और उनका ईमानदारी से निर्वहन करने का भी नाम है, देश की आजादी के समय हमारे पूर्वजों ने जिस विश्वास के साथ राष्ट्र की बागडोर आने वाली पीढ़ी को सौंपी थी, आज की युवा पीढ़ी को उस जिम्मेदारी को पूरी क्षमता और ईमानदारी के साथ निभाना होगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस आत्मावलोकन का अवसर भी है, हमें विचार करना होगा कि देश, समाज और अपने आस-पास के लोगों के लिए हम क्या योगदान दे रहे हैं। उन्होने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐसा भारत बनाने का सपना देखा था, जिसमें समानता, क्षमता, पारदर्शिता, सम्मान और अवसर की भावना हो, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना होगा। उन्होने कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अपनी सीमाओं और दूसरों के अधिकारों को भूल जाए, हमारी स्वतंत्रता वहीं तक सीमित है, जहां से दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का हनन शुरू न हो यदि हमारी स्वतंत्रता किसी दूसरे के लिए परेशानी, भय या असुरक्षा का कारण बनती है तो हमें अपने आचरण पर आत्ममंथन करना होगा।

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श्री त्रिपाठी ने कहा कि समाज को बाहरी गुलामी से मुक्ति तो मिल चुकी है लेकिन आपसी वैमनस्य, असहिष्णुता, नकारात्मक सोच, संकीर्ण मानसिकता और सामाजिक कुरीतियों जैसी आंतरिक परतंत्रताओं से भी मुक्ति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की शुरुआत व्यक्ति से होती है, व्यक्ति के विकास से परिवार, परिवार से समाज, गांव और नगर, जिला और प्रदेश तथा अंततः राष्ट्र का विकास होता है, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, मजबूत आधारभूत ढांचा, रोजगार के अवसर, गरीबी में कमी और प्रत्येक नागरिक के लिए सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था भी विकसित भारत की पहचान होगी, इसके लिए सरकार के साथ प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होने युवा पीढ़ी से आत्मविश्वास, विनम्रता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि कार्यक्रम में छोटे बच्चों का आत्मविश्वास और सहजता सभी के लिए सीखने का विषय है, परिस्थितियां बदलने के बावजूद लक्ष्य से विचलित न होना और आत्मविश्वास बनाए रखना सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी है, प्रत्येक व्यक्ति को हर दिन अपने व्यक्तित्व, कार्य-क्षमता और विचारों में सुधार का प्रयास करना चाहिए, निरंतर आत्मसुधार ही व्यक्ति और राष्ट्र की प्रगति का आधार है।

उन्होंने कहा कि नई और पुरानी पीढ़ी के बीच ज्ञान एवं अनुभव का हस्तांतरण निरंतर जारी रहना चाहिए, युवा अपने वरिष्ठों से सीखें और वरिष्ठों के अनुभव का सम्मान करें साथ ही नई पीढ़ी के पास उपलब्ध आधुनिक ज्ञान और तकनीक को भी समाज तक पहुंचाया जाए। उन्होने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने की कोई सीमा नहीं होती और प्रत्येक व्यक्ति हमारे लिए सीखने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता का इतिहास नई पीढ़ी तक पहुंचाना प्रत्येक परिवार और समाज की जिम्मेदारी है, बच्चों को यह बताया जाना जरूरी है कि आजादी हमें सहज रूप से नहीं मिली बल्कि इसके लिए असंख्य लोगों ने यातनाएं सहीं, फांसी के फंदे को हंसते-हंसते स्वीकार किया और काला पानी जैसी कठोर यातनाएं झेलीं, वीर सावरकर, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु सहित देश के असंख्य ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों के त्याग और संघर्ष को सदैव स्मरण करना चाहिए।

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अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनंद ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व हमें केवल देशभक्ति की बातें करने का अवसर नहीं देते बल्कि उन विचारों को अपने व्यवहार में उतारने की प्रेरणा भी देते हैं। उन्होंने कहा कि हम अक्सर दूसरों की कमियां देखने और उन्हें सुधारने की बात करते हैं लेकिन वास्तविक सुधार तभी होगा जब प्रत्येक व्यक्ति पहले अपने भीतर झांके और यह विचार करें कि कहीं वह स्वयं तो स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की सीमा दूसरे के अधिकारों से निर्धारित होती है यदि हमारे आचरण से किसी अन्य व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है तो हमें अपने व्यवहार पर विचार करना होगा। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय पर्व नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का अवसर हैं, बच्चों, युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन, स्वतंत्रता सेनानियों और देश के संघर्ष की जानकारी होनी चाहिए, राष्ट्र के प्रति प्रेम केवल राष्ट्रगान गाने अथवा राष्ट्रीय पर्व मनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने और समाज के प्रति जिम्मेदारी व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।

अपर जिलाधिकारी न्यायिक राजेश चंद्र ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को स्मरण करना हम सभी का नैतिक दायित्व है, आजादी के मूल्य को समझते हुए समाज में आपसी सम्मान, भाईचारा, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच को मजबूत करना आवश्यक है, राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है, जब प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर ईमानदारी से योगदान करे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और समारोह तक सीमित नहीं है, यह दिन हमें यह सोचने का अवसर देता है कि जिस स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उस स्वतंत्रता का उपयोग हम देश और समाज को मजबूत बनाने में किस प्रकार कर रहे हैं। गोष्ठी में सत्य प्रकाश द्विवेदी, बाल संरक्षण अधिकारी अल्का मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी रमन मिश्रा, जिलाधिकारी न्यायिक अरविंद कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक अभियोजन के.डी. शुक्ला ने अपने विचार व्यक्त किये, जैक एंड जिल विद्यालय के नन्हे-नन्हे बच्चों ने देश भक्ति पर आधारित गानों पर मोहक नृत्य प्रस्तुत किया।

जिलाधिकारी ने नन्ही बच्ची प्रसिद्धी को कलेक्ट्रेट में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी का अध्यक्ष नामित कर उसे मंच पर अपने पास बिठाकर कार्यक्रम की अध्यक्षता कराई। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी ए.के. पाठक, जिला प्रोबेशन अधिकारी राजनाथ राम, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हरेंद्र सिंह, ई-डिस्टिक मैनेजर सौरभ पांडेय, रोहित दुबे, वीरेश पाठक, रमेश तोमर, अनुज कुमार, सौम्य वर्धन, सुनील मिश्रा, पुष्पेन्द्र सिंह, राजेंद्र सिंह, सत्येन्द्र कुमार, लोकेन्द्र सहित कलेक्ट्रेट के विभिन्न अनुभाग प्रभारी, पटल सहायक आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने किया।

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