मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जनगणना-2027 के द्वितीय चरण जनसंख्या गणना की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से कहा कि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का कार्य है इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, कार्मिकों की उपलब्धता, ड्यूटी निर्धारण, प्रशिक्षण, भोजन, पेयजल, तकनीकी व्यवस्था तथा फील्ड स्तर पर शत-प्रतिशत कवरेज की तैयारियां निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाएं, जनगणना कार्य के लिए आवश्यक कार्मिकों का तहसील, नगर निकाय एवं क्षेत्रवार पुनः ऑकलन कर ड्यूटी प्लान तत्काल तैयार किया जाए, उपलब्ध कार्मिकों की सूची, वास्तविक आवश्यकता का मिलान करते हुए जहां जितने गणनाकार, पर्यवेक्षकों की आवश्यकता है, उसी के अनुसार तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में कार्मिकों की कमी न रहे और कहीं भी आवश्यकता से अधिक कार्मिक भी तैनात न किए जाएं, तैयार की गई सूची का पुनः परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई योग्य कार्मिक छूटने न पाए, किसी की अनावश्यक दोहरी ड्यूटी न लगे। उन्होंने उप जिलाधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मैनपुरी तहसील एवं नगर क्षेत्र सहित सभी तहसीलों, नगर पालिका एवं नगर पंचायतों की आवश्यकता अलग-अलग निर्धारित करते हुए अंतिम ड्यूटी प्लान तैयार करें, संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्र की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करें और ड्यूटी लगने के बाद भी उसकी समीक्षा करें।

श्री त्रिपाठी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि जनगणना ड्यूटी के कारण विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो, किसी विद्यालय से आवश्यकता से अधिक शिक्षकों को एक साथ जनगणना कार्य में न लगाया जाए, ऐसी स्थिति न आए कि शिक्षकों की ड्यूटी के कारण विद्यालय में पठन-पाठन बाधित हो, आवश्यकता के अनुसार पंचायत सहायकों, अनुदेशकों, शिक्षामित्रों तथा तकनीकी रूप से दक्ष स्थानीय कार्मिकों की सेवाएं लेने के लिए उनकी सूची तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पंचायत सहायक अपने क्षेत्र की स्थानीय जानकारी रखने के साथ-साथ कंप्यूटर एवं डिजिटल कार्य में भी दक्ष होते हैं इसलिए जहां उपर्युक्त हो, उन्हें जनगणना कार्य में लगाया जाए, इसी प्रकार स्थानीय क्षेत्र में उपलब्ध योग्य एवं तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाए, जिससे क्षेत्र में कार्य करने में सुविधा रहे और डाटा का कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से हो सके। उन्होने पर्यवेक्षकों की तैनाती को लेकर कहा कि केवल संख्या पूरी करने के उद्देश्य से ड्यूटी न लगाई जाए बल्कि जिम्मेदार, अनुभवी एवं कार्यकुशल कार्मिकों का चयन किया जाए, आवश्यकता के अनुसार इंटरमीडिएट कॉलेजों के अनुभवी शिक्षकों सहित अन्य योग्य कार्मिकों को पर्यवेक्षक के रूप में चिन्हित किया जाए।

प्रशिक्षण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देशित करते हुए कहा कि गणनाकार एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराया जाए, प्रशिक्षण केंद्रों का चयन कार्मिकों की संख्या और क्षेत्रीय सुविधा के आधार पर किया जाए, आवश्यकता के अनुसार तहसीलवार अलग-अलग प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाएं ताकि कार्मिकों को अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े, उपलब्ध प्रशिक्षकों के आधार पर 35 से 40 कार्मिकों के बैच बनाकर एक साथ कई बैचों में प्रशिक्षण संचालित किया जाए और इसकी पूरी कार्य-योजना पहले से तैयार रखी जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता न रहे, प्रत्येक गणनाकार और पर्यवेक्षक को जनगणना की प्रक्रिया, डिजिटल कार्य-प्रणाली, क्षेत्रवार जिम्मेदारी, कवरेज, डाटा प्रविष्टि, रिपोर्टिंग तथा फील्ड में आने वाली संभावित समस्याओं के संबंध में व्यवहारिक जानकारी दी जाए, प्रशिक्षण के लिए आने वाले कार्मिकों को किसी भी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान भौगोलिक, जनसंख्या, विशेष प्रभार, बेघर एवं संस्थागत आबादी का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया जाए, कोई भी व्यक्ति, परिवार अथवा क्षेत्र गणना से छूटे न इसके लिए क्षेत्रवार माइक्रो-प्लान तैयार कर गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों को उनके कार्यक्षेत्र की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनंद, डिप्टी कलेक्टर विकल्प, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, उप जिलाधिकारी सदर, भोगांव, श्याम प्रताप, पीयूष जायसवाल, समस्त तहसीलदार, अधिशाषी अधिकारी नगर निकाय, खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

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