मैनपुरी(सुवि)विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मा. मुख्यमंत्री उ.प्र. शासन योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के सजीव प्रसारण के उपरांत सदस्य विधान परिषद मानवेंद्र सिंह ने विभाजन विभीषिका पर आधारित चित्र-प्रदर्शनी का अवलोकन करने, विभाजन के दौरान त्रासदी का दंश झेलने वाले व्यक्तियों, उनके परिजनों को सम्मानित करने के उपरांत कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष-2021 में निर्णय लिया कि विभाजन के उस दुःखद्, पीड़ादायक अध्याय को इतिहास की स्मृतियों से कभी मिटने नहीं दिया जाएगा, इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, यह दिवस उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपने घर, परिवार, संपत्ति और यहां तक कि अपने प्रियजनों को भी खो दिया। उन्होंने गुरुदत्त के उपन्यास ‘देश की हत्या’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाजन के दौरान किस प्रकार लोगों की हत्याएं हुईं और परिवारों ने किस भयावह दौर का सामना किया, इसका मार्मिक चित्रण साहित्य में मिलता है, ऐसे प्रसंग पढ़कर उस समय की पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान दंगों, हिंसा ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य किसी के प्रति नफरत पैदा करना नहीं बल्कि इतिहास को याद रखना और उससे सीख लेना है। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन, उनके साथ हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को उन घटनाओं को भी नहीं भूलना चाहिए, जिनमें लोगों को अपने घरों से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इतिहास की सच्चाई से परिचित कराना जरूरी है, विद्यार्थियों से संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को ऐसी भाषा, विचारों से बचना चाहिए जो समाज में विभाजन और वैमनस्य पैदा करें, देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा ही मजबूत भारत की आधारशिला है।

जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने कहा कि 14 अगस्त का दिन उन परिवारों की पीड़ा को समझने, उनके संघर्ष को याद करने का अवसर है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपनों को खोया, रातों-रात अपना घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर हुए, आज विभाजन को 79 वर्ष पूरे हो चुके हैं और देश स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है, उस दौर की पीढ़ी के अधिकांश लोग अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके बच्चे और अगली पीढ़ियां आज भी अपने माता-पिता, दादा-दादी द्वारा झेली गई पीड़ा को याद करती हैं। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय इतिहास का सबसे बड़ा पलायन हुआ, दोनों ओर से लाखों लोग बेघर हुए, बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई, कहीं परिवार के सदस्य एक-दूसरे से बिछड़ गए तो कहीं लोगों ने अपने सामने ही अपनों को खो दिया। उन्होंने कहा कि उस समय पाकिस्तान एक नए देश के रूप में अस्तित्व में आया और भारत विभाजन का दंश झेलने के लिए विवश हुआ, कुछ लोग भारत आए, कुछ अपने घरों में ही छूट गए, विभाजन के दौरान आई ट्रेनों में लाशों के मिलने की घटनाएं आज भी उस भयावह दौर की याद दिलाती हैं, इस त्रासदी को याद करना किसी के प्रति द्वेष पैदा करना नहीं बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति को रोकना है।

नरेंद्र अरोरा, अमर नाथ अरोरा ने कहा कि हमारे पूर्वजों पर विभाजन के दौरान तमाम यातनाएं हुयीं, पूर्वजों ने शरणार्थी का दंश भी झेला। सदस्य विधान परिषद, जिलाध्यक्ष, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी ने विभाजन विभीषिका के दौरान त्रासदी का दंश झेलने वाले व्यक्तियों, उनके परिजनों लख्मीचंद अरोरा, गोपाल किशन थरेजा, वेद प्रकाश कथूरिया, सरदार कल्यान सिंह, सरदार हरीसिंह, सरदार महेन्द्र सिंह, ठाकुर दास वकील साहब, कोमल कुमार, दिनेश निछारा, ओम प्रकाश खुराना, राज गौरी, सुरेन्द्र कुमार गैरा, सरदार रंजीत सिंह, सरदार रवंश सिंह, अमर नाथ अरोरा आदि को शॉल, प्रतीक चिन्ह भंेट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के उपरांत कलेक्ट्रेट परिसर से शहीद स्तम्भ तक मौन जुलूस निकाला गया। इस दौरान अध्यक्ष नगर पालिका संगीता गुप्ता, ब्लॉक प्रमुख मुनेष चौहान, सुमित चौहान, ओम जी दुबे, डॉ. विमल पांडेय, अमित गुप्ता, अनुराग पाण्डेय, वीरेन्द्र शाक्य, सौरभ दुबे, सिन्दू अरोरा, राजन चौहान, सुनील भदौरिया, नंदीश वशिष्ठ, विशुना सिंह, सुषमा दीक्षित, सीमा चौहान, ऊषा त्रिपाठी सहित अन्य पार्टी पदाधिकारियों के अलावा जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, परियोजना निदेशक शोभनाथ चौरसिया, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी राजेश बघेल, जिला प्रोबेशन अधिकारी राजनाथ राम, पर्यटन फेलो जुबैर अहमद आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन जिला उपाध्यक्ष पंकज भदौरिया ने किया।



