मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जनपद स्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति की बैठक में निर्यातकों, उद्यमियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ निर्यात संवर्धन, उ.प्र. निर्यात प्रोत्साहन नीति-2025-30 के प्रभावी क्रियान्वयन, निर्यातकों को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं, निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होने कहा कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना समय की आवश्यकता है, जनपद में तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता उत्कृष्ट है, आवश्यकता उन्हें उचित विपणन, ब्रांडिंग, प्रत्यक्ष निर्यात से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि जनपद के सभी संभावित निर्यातकों को निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं, पंजीकरण एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि अधिक से अधिक उद्यमी निर्यात गतिविधियों से जुड़ सकें। उन्होने कहा कि सुनिश्चित किया जाये कि जनपद के उत्पादों का निर्यात थर्ड पार्टी, अन्य जनपदों के माध्यम न हो, उद्यमियों को प्रत्यक्ष निर्यात (डायरेक्ट एक्सपोर्ट) के लिए सुविधायें उपलब्ध करायी जाये, जिससे उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके, जनपद की निर्यात क्षमता में वृद्वि हो। उन्होंने कहा कि उद्योग एवं व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है, उद्यमियों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अथवा कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या होने पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, प्रशासन द्वारा निर्यातकों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा, सुरक्षा, परिवहन, विपणन एवं निर्यात प्रक्रिया से संबंधित समस्याओं को दूर किया जायगा।

श्री त्रिपाठी ने उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि निर्यातकों को एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ई.सी.जी.सी.) की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जाये, विदेशी व्यापार में भुगतान संबंधी जोखिम को कम करने के लिए ई.सी.जी.सी. एक प्रभावी माध्यम है यदि निर्यातक अपने निर्यात को बीमित कराते हैं तो संभावित वित्तीय हानि से सुरक्षा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि निर्यातकों को ई.सी.जी.सी. से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराई जाएं, पात्र निर्यातकों को प्रीमियम प्रतिपूर्ति योजना का लाभ दिलाया जाए। उन्होने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मेलों में प्रतिभाग करने वाले उद्यमियों को स्टॉल व्यय का 75 प्रतिशत तक, हवाई यात्रा पर निर्धारित सीमा तक प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध है, इसी प्रकार गेटवे पोर्ट तक निर्यात माल भेजने पर माल-भाड़ा अनुदान योजना के तहत 20 फीट कंटेनर पर रू. 20 हजार तथा 40 फीट कंटेनर पर रू. 40 हजार अथवा निर्धारित सीमा तक परिवहन व्यय की प्रतिपूर्ति प्रदान की जा रही है, इन योजनाओं का लाभ उठाकर उद्यमी अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं और निर्यात लागत को कम कर सकते हैं।

बैठक में जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र द्वारा उ.प्र. निर्यात प्रोत्साहन नीति-2025-30 के विभिन्न प्रावधानों एवं योजनाओं की पीपीटी के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि विपणन विकास सहायता योजना के अंतर्गत निर्यातकों को देश-विदेश में आयोजित व्यापार मेलों, प्रदर्शिनियों, वर्चुअल फेयर एवं बायर्स-सेलर मीट में प्रतिभाग करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, प्रति निर्यातक एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम रू. 25 लाख तक की सहायता अनुमन्य है, ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग सहायता योजना का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वर्तमान समय डिजिटल व्यापार का है, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है, डजिटल माध्यमों का अधिकाधिक उपयोग किया जाये, योजना के तहत उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। बैठक में जनपद के प्रमुख निर्यात उत्पादों पर भी चर्चा की गई। उन्होने कहा कि जनपद में चावल, तंबाकू, तारकशी कला, मसाले तथा अन्य उत्पादों के निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं, इसके अतिरिक्त जनपद का एक जनपद-एक व्यंजन (ओ.डी.ओ.सी.) के अंतर्गत चयनित सोहनपापड़ी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है, जिस पर उन्होने प्रचार-प्रसार एवं ब्रांडिंग के निर्देश दिये। बैठक के दौरान उद्यमी अंकित भट्नागर द्वारा नियंत्रित वातावरण में केसर उत्पादन, उसके व्यवसायिक मॉडल की जानकारी दी गई, जिलाधिकारी ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयोग जनपद को नई पहचान दिला सकते हैं, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में संचालित नवाचार आधारित इकाइयों, सफल उद्यमों का भ्रमण कर उनकी आवश्यकताओं का ऑकलन किया जाए, उन्हें आवश्यक प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि सफल उद्यमियों की कार्य-प्रणाली एवं अनुभव अन्य उद्यमियों के साथ साझा किए जाएं ताकि अधिक से अधिक लोग उद्यमिता एवं निर्यात गतिविधियों की ओर आकर्षित हों।

इस दौरान उप निदेशक कृषि नरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, उपायुक्त उद्योग डॉ. बनवारी लाल के अलावा निर्यातक, उद्यमी एवं संबंधित विभागीय अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

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