मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, सामुदायिक सहभागिता, नवाचार आधारित शिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों के साथ आयोजित बैठक में कहा कि जनपद में ’’मिशन ज्योतिर्गमय’’ प्रारंभ ग्रीष्मकालीन अवकाश की समाप्ति के पश्चात दि. 16 जून से 100 विद्यालयों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ’’मिशन ज्योतिर्गमय’’ के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों के प्रति लोगों का विश्वास पुनर्स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जायेगा, विद्यालयों के भौतिक स्वरूप को आकर्षक, आधुनिक बनाया जायेगा, बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता और सीखने के स्तर में सुधार किया जायेगा, मिशन कायाकल्प के 19 मानकों के साथ अतिरिक्त मानकों को भी लागू किया जाएगा, चयनित विद्यालयों में इंटरलॉकिंग, मिड-डे-मील शेड, सी.सी.टी.वी. कैमरे, आर.ओ. पेयजल व्यवस्था, कम्प्यूटर सिस्टम, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, सुरक्षित परिसर, आवश्यक भूल-भूत सुविधाएं उपलब्ध, विकसित की जाएंगी, विद्यालय परिसरों की सुरक्षा हेतु विद्यालयों की बाउंड्रीवाल, वायर फेंसिंग करायी जाएगी, विस्तृत गैप एनालिसिस भी कराया जाएगा। उन्होंने खण्ड विकास अधिकारियों, खण्ड शिक्षाधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि 01 सप्ताह में विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं, आवश्यकताओं का ऑकलन कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाये, ग्राम पंचायत निधि, वित्त आयोग की धनराशि, मनरेगा, कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के माध्यम से संसाधनों की व्यवस्था की जाये, अधिकारियों को विद्यालय गोद देने की योजना भी बनाई जाये।
श्री त्रिपाठी ने प्रसिद्ध जनकवि नागार्जुन की कविता ’’दुखरन मास्टर’’ का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय था जब सीमित संसाधनों, जर्जर भवनों और कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षक समाज के लिए उत्कृष्ट नागरिक तैयार करते थे, टूटे-फूटे विद्यालयों, न्यूनतम सुविधाओं के बीच भी शिक्षक बच्चों को शिक्षित कर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने योग्य बनाते थे, आज विद्यालयों में संसाधन बढ़े हैं, भवन बेहतर हुए हैं, वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखने वाले, कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त उच्च शिक्षित शिक्षक हैं, आज शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक विश्वास को मजबूत करने हेतु शिक्षकों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने, नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मिशन ज्योतिर्गमय का मूल मंत्र प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की पंक्तियों ’’एक चिनगारी कहीं से ढूंढ लाओ दोस्तों, इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है’’ से प्रेरित है, मिशन का उद्देश्य इसी प्रेरणा की चिंगारी को खोजकर शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि मिशन के साथ ’’शिक्षाग्रह’’ अभियान भी संचालित किया जाएगा, शिक्षा को सामुदायिक आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा, ग्राम स्तर, ब्लॉक स्तर और जनपद स्तर पर समितियों का गठन कर समाज के विभिन्न वर्गों को विद्यालयों से जोड़ा जाएगा, ग्राम स्तरीय समिति में ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंध समिति, लेखपाल, ग्राम सचिव, पंचायत सहायक, रोजगार सेवक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, स्वयं सहायता समूह की सदस्य, युवक एवं महिला मंगल दल के प्रतिनिधि तथा नियमित रूप से विद्यालय आने वाले बच्चों के अभिभावकों को शामिल किया जाएगा, शिक्षाग्रह का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना, ड्रॉपआउट रोकना, बाल श्रम और सामाजिक-आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित बच्चों को पुनः विद्यालयों से जोड़ना, शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना होगा, अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाने और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नियमित बैठकें आयोजित की जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा मिशन ज्योतिर्गमय की परिकल्पना विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक, ग्राम पंचायत, प्रशासन और समुदाय मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन की नई इबारत लिखने, सरकारी विद्यालयों के प्रति बनी नकारात्मक धारणा को दूर करने हेतु की गयी है, आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजना पसंद करते हैं, परिषदीय विद्यालयों को अक्सर अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाता है, यह स्थिति केवल आधार-भूत सुविधाओं की कमी के कारण नहीं बनी बल्कि समय के साथ सरकारी विद्यालयों की सामाजिक प्रतिष्ठा में आई कमी भी इसका बड़ा कारण रही है। उन्होंने कहा कि जब किसी बच्चे से पूछा जाता है कि वह किस विद्यालय में पढ़ता है और वह सरकारी विद्यालय का नाम बताता है तो कई बार उसके भीतर हीन भावना विकसित हो जाती है, दूसरी ओर निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है, यह मानसिकता बदलना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने उपस्थित शिक्षकों से आह्वान किया कि मिशन को केवल सरकारी कार्यक्रम के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व मानकर पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उन्होंने ऋग्वेद के प्रसिद्ध मंत्र “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें विश्व के श्रेष्ठ विचारों को अपनाकर शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना होगा, ज्ञान साझा करने, नवाचार अपनाने, सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देकर ही हम आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने कहा कि जनपद के लगभग 5000 शिक्षकों में से मिशन ज्योतिर्गमय हेतु 100 शिक्षकों का चयन किया गया है, जो अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी और सम्मान की बात है, शिक्षकों को केवल एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि बेसिक शिक्षा के ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य करना होगा, जब किसी व्यक्ति से विशेष अपेक्षा की जाती है तो उसके ऊपर दायित्व भी बढ़ जाता है, मिशन की सफलता जिलाधिकारी के नेतृत्व के साथ-साथ उन शिक्षकों की ऊर्जा, प्रतिबद्धता और सकारात्मक सोच पर निर्भर करेगी, जो इसे जमीनी स्तर पर लागू करेंगे, जिस प्रकार निजी विद्यालय अपनी सुविधाओं और उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार करते हैं, उसी प्रकार परिषदीय विद्यालयों की उपलब्धियों, संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को भी समाज के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना होगा। आगामी एक से डेढ़ माह मिशन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इस दौरान प्रशिक्षण, आधारभूत सुविधाओं के विकास, सामुदायिक सहभागिता तथा शैक्षणिक नवाचारों से जुड़े सभी कार्यों को गति प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक सकारात्मक सोच और पूर्ण ऊर्जा के साथ कार्य करें तो चयनित 100 विद्यालय पूरे जनपद के लिए आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होंगे।
बैठक में परियोजना निदेशक परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. सतेन्द्र सिंह, प्राचार्य डायट विजय कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दीपिका गुप्ता, जिला पूर्ति अधिकारी रमन मिश्रा, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी राजेश बघेल, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका बुद्वि प्रकाश, खण्ड विकास अधिकारी, खण्ड शिक्षाधिकारी आदि उपस्थित रहे।



