मैनपुरी(सुवि)राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के सजीव प्रसारण के उपरांत कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री, विधायक भोगांव रामनरेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह गीत उस समय लिखा गया जब देश में स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था और इसी गीत को गाकर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सहित असंख्य वीर बलिदानियों ने फांसी का फंदा चूमने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि भारतवासियों के लिए देश एक भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि यह हमारी माता है, दुनिया के अधिकांश देशों में उनकी भौगोलिक सीमा ही उनका देश है लेकिन हमारी अवधारणा ने इस भूमि के टुकड़े को अपनी माता मानने का काम किया है, सुबह उठने पर सबसे पहले हम धरती माता के चरण चूमने का कार्य करते हैं, यही भूमि हमें अन्न, जल, रहने हेतु आवास की सुविधा सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य करती है। उन्होने कहा कि हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमने उत्तर प्रदेश जैसे प्रदेश में जन्म लिया, जहां भगवान श्रीकृष्ण, भगवान राम ने जन्म लिया, जब तक धरती माता है, तब तक सब शुभ है।

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विधायक भोेगांव ने कहा कि जापान दुनिया का सबसे विकसित देश है, उसमें सबसे ज्यादा अनुयायी भगवान बुद्ध के है, वहां के बच्चे बुद्ध को भगवान मानते हैं लेकिन जब उन बच्चों से पूछा गया कि भगवान बुद्ध यदि आपके देश पर आक्रमण करें तो क्या करेंगे, बच्चों का जवाब था की तलवार लेकर भगवान बुद्ध को मार देंगे, यही देशप्रेम की भावना है लेकिन हमारे देश के कुछ लोग देश के खिलाफ जासूसी करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में हमारा देश तेजी से आगे बढ़ा है, विकास के साथ विरासत को संजोने का कार्य हुआ, परिस्थितियां तेजी से बदली है, जम्मू कश्मीर में भी अमन-चैन, शांति बनी हुई है, जहां पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते थे, आज शान से भारत का तिरंगा लहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं बल्कि एक आंदोलन है, श्रद्धा का केंद्र है, इसलिए इस गीत को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य हम सबको मिलकर करना है, देश के एकजुट, संगठन को मजबूत करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को इस गीत का आदर करना होगा।

जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता, स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देशप्रेम की भावना सभी के हृदय में तेजी से प्रवाहित हुई है, प्रत्येक व्यक्ति द्वारा राष्ट्रप्रेम के बारे में बात करना आरंभ किया है। उन्होने कहा कि लगभग 200 वर्ष पूर्व जब इस गीत की रचना की प्रष्टभूमि बनी, बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने सन्यासी विद्रोह पर आधारित आनन्द मठ उपन्यास में इसे लिखा। उन्होने कहा कि अंग्रेजों के शासन के खिलाफ कई विद्रोह हुए, वर्ष 1857 के आस-पास प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुआ और उसके बाद के वर्षों में भारत देश भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर राजनैतिक एकता की ओर आगे बढ़ रहा था, वास्तव में राजनैतिक रूप से भारत देश की संरचना, विकास हो रहा था, इसके लिए आवश्यक था कि प्रत्येक भारतवासी के हृदय में ऐसी भावना रहे कि वह एक राष्ट्र के निवासी होने के कारण आपस में उनके हित ज्यादा नजदीक हैं, उनके बीच में प्रेम की भावना ज्यादा रहे। उन्होने उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि आपकी पहचान आपके परिवार, मोहल्ले, शहर से है, आपको जब आपके मोहल्ले के बच्चे या कोई व्यक्ति आपसे मिलता है तो आपको कितना अच्छा लगता है, यही प्रेम का व्यापक रूप ग्रहण करता है, जब एक देश के निवासी आपस मेें मिलते है, आपस में भावनात्मक रूप से नजदीकी महसूस करते हैं, तो उन्हें बड़ा ही आनन्द आता है, इसी आनन्द का नाम ही राष्ट्रप्रेम है। उन्होने कहा कि अंग्रेजों से लड़ने के लिए पूरी भौगोलिक सीमा एक राष्ट्र के रूप में आगे आये, यह तभी संभव था जब सभी के हृदय में एक राष्ट्र के प्रति प्रेम, भक्ति की भावना हो, जिससे वे एक साथ आगे बढ़े, क्योंकि इस राष्ट्र को स्वतंत्र कराना था, आज भी यह गीत बहुत ही प्रासंगिक है क्योंकि हर व्यक्ति के मन में जब तक देश के प्रति प्रेम की भावना नहीं होगी, जब तक यह भावना नहीं होगी कि हम एक ही राष्ट्र के निवासी हैं और वह राष्ट्र कितना महान है, कितनी महान इस राष्ट्र की परम्पराएं हैं, इस देश में प्रकृति ने कितना कुछ दिया है, इतना सुदंर देश भौगोलिक सम्पदा वाला देश कोई दूसरा नहीं हैं, यही भावना राष्ट्रप्रेम को जागृत करती है। उन्होने कहा कि स्वेदश का प्रेम प्रतिदिन, प्रतिक्षण आपके हृदय में संचरित होना चाहिए, सब छोटे-छोटे स्वार्स्थों को छोड़कर राष्ट्र के प्रति समर्पित हों, राष्ट्र के प्रति किया गया बलिदान सर्वोच्च है।

पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हम सबको इस गीत के बारे में जानने की जरूरत है, अंग्रेज भारत देश पर प्रश्न चिन्ह लगाते थे, देश की व्यवस्था को एक सूत्र में बांधने का कार्य इस गीत ने किया, गीत की भावना प्रकृति से प्रेम का संदेश देती है। उन्होने उपस्थित बच्चों का आह्वान करते हुए कहा कि सभी इस गीत की भावना को समझें, आज 150 वर्ष पीछे देखने का अवसर है, जब आनंद मठ में इस गीत को लिखा गया, इस गीत का संदेश राष्ट्रप्रेम सर्वाेपरि है।

जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने कहा कि भारत की एकता और स्वाभिमान का प्रतीक वंदे मातरम् गीत 150 वर्ष पूर्ण होने पर आज हम सब एकत्र हुए हैं, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचयित गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला, यह गीत स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है, यह गीत हम सबके लिए बंदनीय है। उन्होने कहा कि देश की आन-बान-शान के लिए सभी सजग रहें और अपने वीर बलिदानियों को नमन करते रहें। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान ने कहा कि आज ऐतिहासिक अवसर है, राष्ट्र की चेतना के प्रति मां भारती की आराधना का भाव सभी को रखना चाहिए, राष्ट्रीय चेतना को गीत बनायें, युवा पीढ़ी गीत की महत्वता को जाने और आपस में चर्चा करें, विकास के साथ विरासत भी आगे बढ़े इसी श्रृंखला में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की छात्रा सृष्टि ने देशभक्ति पर आधारित ’’वह देश मेरे-तेरी शान पर सदके, ’’तेरी धूप से रोशन, तेरी हवा से जिंदा’’, कुं. आर.सी. इंटर कॉलेज की छात्रा अनुष्का ने वंदे मातरम् पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन में वीर सेनानियों को हौसला देने का कार्य किया, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने वंदे मातरम् गीत की प्रस्तुति दी। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष संगीता गुप्ता, जिला पंचायत प्रतिनिधि गोविंद भदोरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष अरविंद तोमर के अलावा अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनंद, परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. सत्येंद्र कुमार, प्रशासनिक अधिकारी हरेंद्र सिंह, ई-डिस्टिक मैनेजर सौरभ पांडेय, रोहित दुबे, वीरेश पाठक, वेद प्रकाश श्रीवास्तव सहित कलेक्ट्रेट के विभिन्न अनुभव प्रभारी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्रा, शिक्षक आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली ने किया।