मैनपुरी(सूवि)दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम विकास संस्थान के महा निदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने अमृत महोत्सव के अंतर्गत मिशन कर्मयोगी, मानवाधिकार एवं अध्यात्म प्रबंधन विषय पर आधारित एक दिवसीय गोष्ठी को संबोधित करते हुए उपस्थित अधिकारियों से कहा कि सच्चाई के रास्ते पर चल समाज के गरीब व्यक्तियों की मनोयोग से सेवा करें, लोगों की भलाई के लिए निष्ठा से काम करें, आलसपन, बेईमानी का त्याग कर सच्चे मन से अपने दायित्वों का निर्वहन करें, संकुचित भावना से काम न करें, सब अपने हैं की सोच रख कार्य करें, मर्यादा का पालन कर कार्य करें तभी आपको संतुष्टि मिलेगी। उन्होंने कहा कि मर्यादा का उल्लघंन, धर्म का अनुसरण न करने, धर्म संग्राम न करने पर दुःख भय, रोग, शोक, वियोग मिलता है, मर्यादा में रहने, धर्म का पालन करने पर सुख-शांति, समृद्धि के साथ-साथ मान-सम्मान मिलेगा, जो व्यक्ति सिर्फ अपने और अपने परिवार के बारे में सोचता है वह पाप करता है, जो मानव कल्याण के बारे में, सबकी सुख-समृद्धि, शांति, बिना छल-कपट किए लोगों के हितों के लिए कार्य करता है वह जीवन में यश प्राप्त करता है।
महा निदेशक ने कहा कि देश को आजाद कराने के लिए तमाम वीर वलिदानियों ने हंसते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, असहनीय कष्ट झेले, उन्हें अमृत, धर्म, सत्य की सही जानकारी थी इसलिए वह सत्य के रास्ते पर चलकर इस देश को आजाद कराने में अपनी भूमिका अदा कर गए। उन्होंने कहा कि गलत रास्ते पर चलकर जीवन में सफलता नहीं मिलेगी, गलत मार्ग पर चलने से शरीर, मन, रिश्ते सभी खराब होंगे। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा कार्य करें जिससे व्यक्ति, समाज, प्रदेश, देश का भला हो, धर्म के रास्ते पर चलें, धर्म ही सत्य है जो व्यक्ति छल करेगा उसे सुख नहीं मिलेगा, नींद नहीं आएगी, अधर्म के रास्ते पर चलने वाला निर्भीक नहीं रह सकता।
जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने कहा कि मनुष्य श्रृष्टि का रंगमंच है, हम सभी वास्तविक रूप से आत्मा है, और यह शरीर रूपी वस्त्र धरण कर हम अपने निर्धारित पार्ट के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होने कहा कि कर्मयोग की बात की जाये, तो योग शब्द जुड़ने का नाम है, कर्म करते हुये जुड़ना विचारणीय है। उन्होने कहा कि दिन भर में हम विचार के रूप में हजारों संकल्प करते हैं, हम इन्द्रियों से इतने कर्म नहीं करते जितने हम संकल्प करते हैं, वह भी हमारे कर्म के दायरे में आता है, मन, वाणी, इन्द्रियों के द्वारा किये गये कर्म से ही तीनों को मिलाकर कर्म का पूरा समुच्यय बनता है, जो एक व्यक्ति दिन भर में करते है, मन में रहने वाले संकल्प भी अपना परिणाम छोड़कर नहीं जाते, हर कार्य का हिसाब होता है। उन्होने सभी का आव्हान करते हुये कहा कि कर्मयोगी बनकर कार्य करें, मानसिक स्थिति का लक्ष्य तैयार करें, स्वउन्नति, लोक कल्याण का भी लक्ष्य तय कर कार्य करें, हमेशा कर्म अच्छा होगा, उन्नति का आधार होगा, लोक कल्याण का भी आधार बनेगा।
अध्यक्ष भारत चरित्र निर्माण संस्थान नई दिल्ली राधा कृष्ण गोस्वामी ने मिशन कर्म योगी एवं अध्यात्मिक प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि बेहतर लोकतंत्र, पंचायती राज व्यवस्था में मानवाधिकारों की रक्षा करना सभी का धर्म है, हम सबको मानव के अधिकारों को ध्यान में रखकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को गीता उपदेश को अपने मन में उतारना होगा, जो पाप है वही अधर्म है, परिवार, समाज, प्रदेश, देश का विकास हो यही धर्म है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति में आत्म ज्ञान नहीं है वह अपने परिवार, समाज, देश, राष्ट्र का विकास नहीं कर सकता।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार, उप निदेशक राज्य ग्राम विकास संस्थान राकेश रंजन, अपर जिलाधिकारी राम जी मिश्र सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, खंड विकास अधिकारी आदि उपस्थित रहे। कुं. आर.सी. बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, कार्यक्रम का संचालन आचार्य क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान धीरेंद्र कुमार यादव ने किया।