ठंड आ गई। मौसम कोहरा.कोहरा। ओस की बूंदें। सिकुड़े.सिकुड़े से तन.बदन। स्वेटर शाल ऊनी वस्त्रों थे इसी
मौसम की प्रतीक्षा में। अब खुशी का दौर धंधे उठने की उम्मीद जागी। बहुत मक्खी मारी। ठंड के मौसम में ठंड न
पडऩे पर। पिछले साल का बचा माल नए माल के साथ खपाना है। डिस्काउंट का प्रपंच। एक की खरीदी पर एक ऊनी
वस्त्र मुफ्त। सस्ते में लूट सके तो लूट की चिल्लपों मची है हर ओर।

तीन दिन पहले ही की बात है। कल्लू का दद्दा ठंड में सिकुड़कर मर गया। इत्ती ठंड पड़ गई रात में। पाला क्या गिरा।
कल्लू के दद्दा को जग से उठा ले गया। कल्लू सोचता रह गया। डिस्काउंट ऑफर वाले आते मार्केट में तो एक के बदले
दो स्वेटर लाकर देता दद्दा को। मगर दद्दा की जिंदगी कोई डिस्काउंट तो देती नहीं। सो वे चले गए। कल्लू का विचार
वहीं जमकर रह गया।
कल्लू घरवाली से बोला. देख रीए कजरीए ठंड पडऩे लगी है। दद्दा रात भर खांसते.खखारते रहते हैं। बूढ़े बदन को ठंड
लग गई तोघ् वहीं ऐंठकर रह जाएंगे। कल्लू की घरवाली ने उसका पत्ता काटा था। बोली थी. का हो गया तोघ् दद्दा इत्ते
सालों से खांसते आ रहे हैं। कछु दिन और नहीं यूं ही खखार.खांस सकते है। बचत करना सीखो जी। ऑफर वाले
व्यापारी दुकान लगाएं तो ला देना। एक उनके काम आ जाएगी एक आपके।
मार्केट में ऑफर बाजार दद्दा के खिसकने के चार दिन बाद लगा। कल्लू को क्याघ् उसे स्वेटर लाना था। ले आया एक
के बदले दो स्वेटर। ऑफर पाकर खुश होकर कल्लू की घरवाली बोली. आप अब दोनों स्वेटर पहनना। ठंड बड़ी तेज पड़
रही है।
कल्लू भी पत्नी की खुशी में शामिल होकर पिता की खांसने.खखारने की तकलीफ को भूल चुका था। एक आधुनिक
श्रवण कुमार के लिए पत्नी ही चारों धाम की तीर्थ होती है।
इधरए ऊनी वस्त्र विक्रेता भी खुश। उधर अंडेए मांस विक्रेता भी। हेल्दी मौसम है न साब। लोगों को यही खान.पान
सुहाता है। वे तथाकथित चिकित्सकों की शैली में कहते हैं. अंडा.मांस खाओ जीए गरम होता हैए सर्दी नहीं लगती
लगती है तो ठीक हो जाती है। सलाह यूं ही मुफ्त में नहीं दी जाती। नानवेज विक्रेता ने अपने उत्पादन के रेट बढ़ा दिए
हैं। यही तो सीजन है जब यह धंधा खूब चलता है। जेब गरम रहती है। इस मौसम में गरम का अलग ही मजा और
मिजाज होता है साब जी। इधर शहीद चौक के पास खुली अंग्रेजी शराब की दुकान में भारी भीड़ है। जैसे गरमी में ठंडी
बीयर। वैसे ही ठंड में व्हिस्कीए रम असर दिखाती है। ऐसा दारू प्रेमी कहते हैं। कड़की हो तो ठर्रा भी वही असर दिखाती
है। कल ही महक की महतारी कह रही थी सुन रे अपने बंगाली डॉक्टर साब बच्चों के लिए कौन.सी बरांडी ;ब्रांडी
लिखते है। खरीद लाना रज्जो बिटिया ;नातिन के लिए। सर्दी में देने से हेल्थ बनती है। वैसे महकू ठर्रा प्रेमी है। यार.
दोस्तों में कभी.कभार जुगाड़ की अंग्रेजी मिल जाती है तो पी लेता है। दारू ठेकेदारों ने मांग के मुताबिक वैध व अवैध
शराब की खेप बढ़ा दी है। वे पियक्कड़ों को ऑफर स्वरूप एक बोतल के साथ एक पैकेट नमकीन मुफ्त दे रहे हैं। ठंड
पड़ रही है। कड़ाके की ठंड। बच्चेए बूढ़े जवान और मनचले कुछ घूमने के शौकीन कुछ दिखावे के।
ठंड का मौसमए नेचुरल टॉनिक का मौसम। मनचलों के लिए मस्त मौसम। सुबह के बहाने खूबसूरत चेहरों को भूखी
नजरों से घूरने का मौसम। यह भी तो टॉनिक है साब। सुबह उनके दर्शन हो जाएं क्या कहने। सुबह की शुद्ध
ऑक्सीजन कम नहीं।

हल्कू दादा जैसे पुण्य प्रेमियों के लिए पूजा.पाठ हेतु पुष्प चुराने का मौसम। दूसरों के बगीचे को नोंचने का मौसम।
वैसे तो फायदे ही फायदे हैं इस मौसम में। अगर आप दमा के रोगी नहीं हैं तो फिर भी कुछ -रु39यराजष् है इस मौसम के। वह
तो आप भी जानते होंगे।
सुनील, विभूति फीचर्स