मैनपुरी(सुवि) उ..प्र. गो-सेवा आयोग के सदस्य रमाकान्त उपाध्याय ने गो-संरक्षण एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गौशालाओं का संचालन केवल औपचारिकता न होकर एक जिम्मेदारीपूर्ण एवं परिणामोन्मुख व्यवस्था के रूप में किया जाए, सरकार द्वारा गोवंश के संरक्षण हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है, उपलब्ध करायी जा रही धनराशि का उपयोग पारदर्शिता के साथ सीधे गोवंश के हित में किया जाए। उन्होने कहा कि प्रत्येक गौशाला में गोवंश को निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराया जाए। उन्होने कहा कि यदि आवश्यक हो तो पोषण स्तर को और बेहतर बनाने हेतु अतिरिक्त संसाधनों का भी समुचित उपयोग किया जाए, विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक गोवंश को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में चोकर एवं अन्य पौष्टिक आहार उपलब्ध हो, जिससे उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो सके, हरे चारे की उपलब्धता को गोवंश के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी गौशालाओं में उपलब्ध गोचर भूमि का उपयोग किया जाए, नेपियर घास एवं अन्य हरे चारे का उत्पादन प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए ताकि लंबे समय तक स्थायी रूप से पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।

सदस्य गो-सेवा आयोग ने कहा कि पशु चिकित्सक नियमित रूप से गौशालाओं का भ्रमण कर गोवंश के स्वास्थ्य की निगरानी करें, प्रत्येक 03 माह पर कीड़ों की दवा खिलाई जाये, टीकाकरण, अन्य आवश्यक उपचार किए जाएं, विशेष रूप से कमजोर एवं कुपोषित गोवंश की पहचान कर उनके लिए अलग से पोषण एवं उपचार की व्यवस्था की जाए ताकि उनकी स्थिति में शीघ्र सुधार हो सके। उन्होने कहा कि सभी गौशालाओं में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए, नांद, पानी के टैंक एवं पूरे परिसर की नियमित सफाई कराई जाए, स्वच्छ एवं ताजे पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि गोवंश किसी भी प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रह सके, समय-समय पर पानी, चारे की नादों की चूने से पुताई कराई जाए, जिससे कीटाणुओं का प्रभाव कम हो और स्वच्छ वातावरण बना रहे। उन्होने कहा कि गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर जैविक खाद तैयार की जाए ताकि गौशालाओं को अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्राप्त होगा, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

सदस्य गो-सेवा आयोग द्वारा जानकारी करने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद में 47 गौशालाएं संचालित है, जिसमें से 03 वृहद गौशाला अहिरवा, इज्जतपुर खजुरारा, गुराई में संचालित है, 10 कान्हा गौ आश्रय स्थलों का संचालन स्थानीय निकायांे द्वारा किया जा रहा है, जनपद में संचालित गौशालाओं में 07 हजार 172 गोवंश संरक्षित है, जिसमें 2272 नर एवं 4900 मादा गोवंश संरक्षित हैं, मुख्यमंत्री गोधन सहभागिता योजना के अन्तर्गत निर्धारित सुपुर्दगी के लक्ष्य 1683 के सापेक्ष अब तक 2313 गोवंश में गोपालकों को उपलब्ध कराया जा चुका है, योजनान्तर्गत सुपुर्द किये गये सभी गोवंशों के भरण-पोषण हेतु गोपालकों को माह जुलाई 2026 तक की धनाराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जनपद में संचालित गौशालाओं में हरे चारे की उपलब्धता हेतु नेपियर घास की बुवाई कराई गई है। उन्होने नोडल अधिकारियों, अधिशाषी अधिकारी नगर निकाय, खंड विकास अधिकारियों से कहा कि जब भी अपने क्षेत्र की गौशालाओं का निरीक्षण करने जाएं, वहां की गोचर भूमि पर हरे-चारे की बुवाई, जिन किसानों द्वारा नेपियर घास लगाई गई है, उसका स्थलीय निरीक्षण अवश्य करें।

समीक्षा बैठक से पूर्व श्री उपाध्याय ने विकासखंड कुरावली की गो-आश्रय स्थल सोनई, कान्हा गो-आश्रय स्थल ज्योति खुड़िया एवं कान्हा आश्रय स्थल कुरावली के निरीक्षण के दौरान खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी से कहा कि संरक्षित गौवंशों को समय से भूसा-चारा खिलाया जाए, सफाई के विशेष प्रबंध किये जाएं तथा गोबर का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए, किसी भी गो-आश्रम स्थल, गौशाला में जल-भराव की स्थिति उत्पन्न न हो, सुनिश्चित किया जाए। उन्होने कहा कि वर्षा के मौसम में पशुओं में बीमारी का खतरा बना रहता है इसलिए संरक्षित गौवंशों का नियमित टीकाकरण कराया जाए, उनके स्वास्थ्य की उचित देखभाल की जाए तथा सरंक्षित गोवांश के नियमित टीकाकरण के साथ समय-समय पर कीड़े की टेबलेट खिलाई जाएं।

बैठक में जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, प्र. मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. सउद हुसैन, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका बुद्धि प्रकाश, खंड विकास अधिकारी कुरावली, जागीर, सुल्तानगंज, सुनील कुमार, निरंजन त्रिपाठी, उमेश कौशल, सहायक अभियंता लघु सिंचाई राहुल कुमार, उप वनाधिकारी वंदना, सहायक अभियंता लोक निर्माण पुष्पेन्द्र कुमार के अलावा अधिशाषी अधिकारी नगर निकाय, पशु चिकित्सा अधिकारी, गो-सेवक आदि उपस्थित रहे।

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