मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जूम मीटिंग के माध्यम से विभिन्न स्तरों से प्राप्त जन-शिकायतों के निस्तारण, निराश्रित गोवंशों के संरक्षण, अंश निर्धारण, फॉर्मर रजिस्ट्री एवं आयुष्मान कार्ड की प्रगति की समीक्षा की, जन-शिकायतों के निस्तारण की स्थिति संतोषजनक न पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को कार्य-प्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि कुछ विभागीय अधिकारियों द्वारा जन-सुनवाई पोर्टल को गंभीरता से नहीं देखा जा रहा है, उसे कंप्यूटर ऑपरेटर के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय अधिकारी स्वयं प्रतिदिन सुबह-शाम जन-सुनवाई पोर्टल पर लॉगिन कर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करें तथा उनके गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की जिम्मेदारी स्वयं लें। उन्होंने कहा कि कई विभागों द्वारा बड़ी संख्या में शिकायतों को स्पेशल क्लोज किया जा रहा है, तमाम शिकायतों के निस्तारण से शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हैं, शासन स्तर से प्राप्त फीडबैक में 50 प्रतिशत से अधिक शिकायतों पर असंतुष्ट फीडबैक प्राप्त होना गंभीर स्थिति है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी शिकायत को अनावश्यक रूप से स्पेशल क्लोज न किया जाए, प्रत्येक शिकायत का तथ्यों के आधार पर गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि शिकायत का निस्तारण करने के उपरांत संबंधित शिकायतकर्ता से वार्ता कर उसकी संतुष्टि प्राप्त की जाए, शिकायतकर्ता से वार्ता के बाद ही निस्तारण आख्या पोर्टल पर अपलोड की जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा जन-शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही, औपचारिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, समीक्षा के दौरान उन्होने पाया कि अधिशासी अभियंता विद्युत, सहायक महा निरीक्षक निबंधक, पशु चिकित्साधिकारी घिरोर, बेवर द्वारा शत-प्रतिशत शिकायतों में स्पेशल क्लोज की कार्यवाही की है, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने पाया कि अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत बेवर, करहल तथा अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद मैनपुरी द्वारा भी 60 प्रतिशत से अधिक शिकायतों को स्पेशल क्लोज किया गया है, जिन शिकायतों का निस्तारण किया गया है, उनमें भी 50 प्रतिशत से अधिक शिकायतकर्ताओं का असंतुष्ट फीडबैक प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि अधिकारी जन-शिकायतों के प्रति गंभीर रहें, प्रत्येक प्राप्त शिकायत का स्वयं संज्ञान लेकर प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें, भविष्य में किसी भी विभाग द्वारा शिकायतों को अनावश्यक रूप से स्पेशल क्लोज किए जाने, शासन स्तर से प्राप्त फीडबैक में असंतुष्ट पाए जाने पर संबंधित अधिकारी का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए प्रभावी कार्यवाही की जाएगी।

उन्होने फॉर्मर रजिस्ट्री की समीक्षा करते हुए उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद में फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति में सुधार के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए, अपने-अपने विभाग के ग्राम स्तरीय कार्मिकों को फॉर्मर रजिस्ट्री पूर्ण कराने का लक्ष्य निर्धारित कर नियमित रूप से उनसे प्रगति एवं फीडबैक प्राप्त किया जाए, प्रतिदिन कम से कम 500 किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित की जाए ताकि जनपद की रैंकिंग में सुधार हो सके।

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