भूमि अधिग्रहण में किसानों की सहमति सर्वाेपरि, उचित मुआवजा और क्षेत्रीय विकास सरकार की प्राथमिकता- जिलाधिकारी।
मैनपुरी 02 जुलाई, 2026- जनपद में प्रस्तावित पर्यटन एवं आधार-भूत विकास परियोजना के लिए भूमि क्रय संबंधी प्रक्रिया के अंतर्गत जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने प्राथमिक विद्यालय जसराजपुर प्रथम में भैंसरोली के मजरा नूरमपुर, जसराजपुर के किसानों के साथ संवाद करते हुए कहा कि शासन की मंशा किसी भी किसान की भूमि जबरन लेना नहीं बल्कि सहमति के आधार पर उचित प्रतिकर देकर क्षेत्र का समग्र विकास करना है, जिससे किसानों के हित सुरक्षित रहें और स्थानीय लोगों को भविष्य में रोजगार एवं आर्थिक अवसर भी प्राप्त हों। उन्होने कहा कि प्रस्तावित परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन एवं अन्य विकास कार्यों को नई गति मिलेगी, इससे स्थानीय स्तर पर व्यापार, रोजगार, परिवहन, दुकानें, होटल, अन्य व्यावसायिक गतिविधियों तथा आधार-भूत सुविधाओं का विस्तार होगा, जिसका प्रत्यक्ष लाभ गांव के लोगों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े विकास कार्य का उद्देश्य केवल निर्माण नहीं बल्कि स्थानीय नागरिकों की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि किसानों की भावनाओं और क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पहले से निर्धारित भूमि दरों का पुनरीक्षण कराया, पहले जहां सामान्य भूमि की दर रू. 30 लाख प्रति बीघा निर्धारित था, जिसे बढ़ाकर रू. 40 लाख प्रति बीघा किया गया, इसी प्रकार सड़क किनारे स्थित भूमि का मूल्य रू. 75 लाख से बढ़ाकर रू. 80 लाख प्रति बीघा निर्धारित किया गया, यह वृद्धि शासन के नियमों के अंतर्गत उपलब्ध अधिकतम सीमा तक की गई है और लिंक एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में निर्धारित दरों के अनुरूप प्रभावित गांवों को भी लाभ दिया गया है।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि शासन की प्राथमिकता सहमति के आधार पर भूमि क्रय करना है यदि किसान सहमत होते हैं तो उन्हें बिना किसी अनावश्यक प्रक्रिया के सीधे भुगतान प्राप्त होगा तथा उन्हें विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया लंबी होती है, जिसमें विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही, अभिलेखीय औपचारिकताएं तथा भुगतान में समय लग सकता है, प्रशासन चाहता है कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो तथा उनका पूरा प्रतिकर पारदर्शी तरीके से सीधे भूमि स्वामी को प्राप्त हो। उन्होने कृषकों का आव्हान करते हुए कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में जबरन भूमि नहीं लेना चाहती यदि किसी गांव के किसान सहमत नहीं होते हैं तो परियोजना को अन्य स्थान पर भी स्थानांतरित किया जा सकता है, प्रदेश के अनेक जनपद विकास परियोजनाओं के लिए प्रयासरत् हैं, इसलिए जहां स्थानीय स्तर पर सहमति मिलेगी वहीं शासन संसाधनों का उपयोग करेगा। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वह केवल वर्तमान परिस्थिति ही नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र के विकास, रोजगार, पर्यटन और नई आर्थिक संभावनाओं को भी ध्यान में रखकर निर्णय लें। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए पूरे गांव की भूमि नहीं ली जा रही बल्कि सीमित क्षेत्र की ही आवश्यकता है, अधिकांश किसानों के पास पर्याप्त भूमि बनी रहेगी तथा प्राप्त प्रतिकर से वह आवश्यकतानुसार अन्य स्थान पर भूमि भी क्रय कर सकते हैं। उन्होने ग्राम प्रधानों एवं किसान प्रतिनिधियों से गांव स्तर पर आपसी सहमति बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि सभी किसान आपस में विचार-विमर्श कर सामूहिक निर्णय से प्रशासन को अवगत कराएं, प्रशासन किसानों के हितों के साथ खड़ा है और उनकी सहमति के उपरांत ही प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें तथा उनकी प्रत्येक जिज्ञासा का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।
जानकारी करने पर उप जिलाधिकारी ने बताया कि ग्राम जसराजपुर, नूरमपुर में पर्यटन विकास हेतु लगभग 11-12 हे. भूमि क्रय की जानी है, जिसमें से अब तक 03.6 हे. भूमि के बैनामें हो चुके हैं, उक्त भूमि लगभग 100 कृषकों से क्रय की जानी है। इस दौरान ग्रामवासियों के अलावा उप जिलाधिकारी भोगांव नीरज कुमार द्विवेदी, ग्राम प्रधान अर्जुन सिंह, अनुज कुमार, क्षेत्रीय लेखपाल अरविंद कुमार आदि उपस्थित रहे।



