मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने जिला स्तरीय समीक्षा समिति एवं विशेष जिला सलाहकार समिति की बैठक में बैंकवार क्रेडिट-डिपॉजिट सी.डी. रेशियो, वार्षिक ऋण योजना, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना सहित विभिन्न स्व-रोजगार एवं रोजगारपरक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि जनपद की आर्थिक प्रगति और शासन स्तर पर होने वाली रैंकिंग में बैंकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जनपद की वर्तमान स्थिति अपेक्षित स्तर की नहीं है तथा इसमें सुधार के लिए सभी बैंक अधिकारियों को गंभीरता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऋण वितरण में कमी और योजनाओं में लंबित प्रकरण जनपद की प्रगति को प्रभावित करते हैं इसलिए सभी बैंक अपने प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए ठोस कार्य-योजना बनाएं। उन्होने बैंक शाखावार ऋण-जमानुपात की समीक्षा के दौरान पाया कि कुछ बैंकों में ऋण वृद्धि दर संतोषजनक नहीं है तथा कुछ बैंकों में ऋण वितरण में कमी दर्ज की गई है, बैंक ऑफ़ बड़ौदा का सीडी रेशियो सबसे खराब पाये जाने पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बैंक द्वारा शासन की महत्वाकांक्षी, लाभार्थीपरक योजना यथा प्रधानमंत्री स्व-निधि योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना, किसान क्रेडिट कार्ड आदि योजनाओं में ऋण वितरण में रुचि नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने बैंक के शाखा प्रबंधक को निर्देशित करते हुए कहा कि अगली तिमाही में कम से कम 05 प्रतिशत ऋण वितरण में वृद्धि करें ताकि सी.डी. रेशियो में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, इंडियन बैंक ऑफ़ महाराष्ट्रा, यूको बैंक, एक्सिस बैंक, एच.डी.एफ.सी. बैंक में भी ऋण जमानुपात पर सुधार की गुंजाइश है।
श्री त्रिपाठी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा के दौरान असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि विभिन्न बैंकों में 133 पत्रावलियां सी.सी.एल. हेतु लंबित है, सर्वाधिक 69 पत्रावलिया ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यवृत्त में, 27 पत्रावलियां बैंक ऑफ़ इंडिया मे, 20 पत्रावलियां भारतीय स्टेट बैंक में स्वीकृत, ऋण वितरण हेतु शेष है कमोवेश यही स्थिति मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना में हैं, योजनान्तर्गत विभिन्न बैंकों को 1073 पत्रावलिया प्रेषित की गई, जिसके सापेक्ष मात्र 185 पत्रावलियों को स्वीकृत कर 120 पर ऋण वितरण किया गया है, विभिन्न बैंक शाखाओं द्वारा 399 पत्रावलियों को निरस्त कर वापस किया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आत्मनिर्भर निर्भर, स्वावलंबन के लिए संचालित योजना में बैंकर्स की उदासीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बैंकर्स को सचेत करते हुए कहा कि सभी लाभार्थीपरक योजनाओं में प्रेषित पत्रावलियों को प्राथमिकता पर स्वीकृत कर ऋण वितरण करना सुनिश्चित करें ताकि युवा, महिला स्वतःरोजगार स्थापित कर सके।उन्होने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा के दौरान कहा कि यह भारत सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाली योजना है, इसके माध्यम से आम नागरिकों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के अंतर्गत विभिन्न बैंकों में 491 आवेदन लंबित हैं, भारतीय स्टेट बैंक में सर्वाधिक 111, बैंक ऑफ इंडिया में 104, पंजाब नेशनल बैंक में 68, बैंक ऑफ बड़ौदा में 54, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 36, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 34, केनरा बैंक में 32 पत्रावलियां ऋण वितरण हेतु लंबित हैं, जिस पर उन्होने बैंकर्स से कहा कि विशेष अभियान चलाकर लंबित आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें।
मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने वार्षिक ऋण योजना पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि कृषि, एम.एस.एम.ई., स्वरोजगार, लघु उद्योग तथा अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाया जाना आवश्यक है। उन्होंने बैंकर्स से कहा कि वह वार्षिक ऋण योजना के लक्ष्यों का गंभीरतापूर्वक अध्ययन कर उसके अनुरूप कार्य करें। उन्होने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के बिना जनपद का समग्र आर्थिक विकास संभव नहीं है। बैठक में उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, नाबार्ड से मीतेश यादव, आर.बी.आई. प्रतिनिधि अशोक सिंह कुशवाह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सोमदत्त, जिला कृषि अधिकारी अविशंाक चौहान, सहायक उपायुक्त उद्योग उत्कर्ष चंन्द्र सहित विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक आदि उपस्थित रहे, बैठक का संचालन अग्रणी जिला प्रबंधक रामचंद्र शाहा ने किया।



