मैनपुरी: पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने नव-निर्माण के 09 वर्ष कार्यक्रम के उपलक्ष्य में उ.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के तत्वाधान में प्रत्येक विकास खंड में बेहतर कार्य करने वाले 02-02 ग्राम प्रधानों को प्रशस्ति पत्र, माटीकलां टूलकिट्स योजनान्तर्गत 25 इलैक्ट्रॉनिक चॉक, 06 पगमिल मशीन, 08 दोना-पत्तल मेकिंग मशीन, 11 पॉपकार्न मेकिंग मशीन लाभार्थियों को वितरित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक पर आधारित टूल किट, उपकरण कामगारों के जीवन और आजीविका में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि केन्द्र-प्रदेश सरकार का निरंतर प्रयास है कि “हर हाथ को काम” मिले और प्रत्येक व्यक्ति देश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सके, इसी उद्देश्य से पारंपरिक कुटीर उद्योगों को नई तकनीक और संसाधनों से जोड़ा जा रहा है ताकि वह वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होने कहा कि एक समय ऐसा था जब गांव पूरी तरह आत्मनिर्भर होते थे, गांवों में ही दैनिक जीवन की अधिकांश आवश्यक वस्तुएं तैयार हो जाती थीं, चाहे वह बुनकरी हो, पत्तल निर्माण हो या अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं, सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण जीवन संतुलित और आत्मनिर्भर था, समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और वैश्वीकरण के इस दौर में आवश्यकताएं एवं जीवनशैली में परिवर्तन आया है, ऐसे में सरकार ने भी अपनी योजनाओं को आधुनिक समय के अनुरूप ढालते हुए नई तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के माध्यम से लोगों को सशक्त बनाने का कार्य किया है। वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रकार की चुनौतियां सामने आ रही हैं, ऐसे समय में यह आवश्यक है कि हम अन्य देशों पर अत्यधिक निर्भर न रहें, बल्कि अपने संसाधनों और क्षमताओं को विकसित कर आत्मनिर्भर बनें, महात्मा गांधी द्वारा परिकल्पित आत्मनिर्भर गांव की अवधारणा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है यदि गांव मजबूत होंगे, तो देश स्वतः मजबूत होगा, इसलिए कुटीर उद्योगों, स्थानीय उत्पादन और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देना समय की मांग है।

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पर्यटन मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है, महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, उपकरण एवं विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि वह आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें, रोजगार एवं आय के अवसर मिलते हैं, तो परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है, आत्मनिर्भर महिलाएं न केवल अपने परिवार का सहयोग करती हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होने कहा कि लाभार्थियों के उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) की व्यवस्था पर विशेष फोकस है, लाभार्थियों को अपने उत्पाद बेचने में कोई असुविधा न हो इस हेतु प्रशासन, संबंधित विभाग उनकी सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और उन्हें बाजार में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी, अनुदान, ऋण सुविधा एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, आवश्यकता केवल इस बात की है कि लोग इन योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और उनका लाभ उठाएं। उन्होने कहा कि आज प्राप्त हो रहे आधुनिक उपकरणों का पूर्ण उपयोग करें और अपने कार्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक गांव आत्मनिर्भर बने, जब गांव आत्मनिर्भर होंगे, तो क्षेत्र, जनपद, प्रदेश और अंततः पूरा देश आत्मनिर्भर बनेगा, इससे देश को किसी अन्य राष्ट्र पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और हम एक सशक्त एवं विकसित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ सकेंगे।

जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल है, ऐसे कुशल व्यक्तियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है, जो पारंपरिक रूप से अपने हुनर के माध्यम से जीवनयापन करते आए हैं, आज वितरित किए जा रहे आधुनिक उपकरण न केवल रोजगार का साधन बनेंगे बल्कि लाभार्थियों को अपने हुनर को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर भी देंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजनाओं का सबसे बड़ा लाभ यह है कि व्यक्ति को किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती, वह स्वयं अपने कौशल के आधार पर आत्मनिर्भर बन सकता है और सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग अपनी क्षमताओं को पहचानें और उन्हें आय के स्रोत में परिवर्तित करें।

जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने प्रत्येक व्यक्ति में निहित कौशल और निपुणता को आजीविका में परिवर्तित करना ही वितरण कार्यक्रम का उद्देश्य है, यह कार्यक्रम उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की चिंता की जा रही है, आज करोड़ों लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी व्यक्ति को भोजन के अभाव का सामना न करना पड़े, “हर पेट को अनाज और हर हाथ को काम” देने की नीति के तहत सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि भोजन की व्यवस्था ही पर्याप्त नहीं होती बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर, रोजगार, आजीविका के साधन भी उपलब्ध कराना आवश्यक है, इसी सोच के साथ पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, जो लोग वर्षों से पारंपरिक कार्यों में दक्ष हैं, उन्हें अब आधुनिक उपकरणों और तकनीकी ज्ञान से सुसज्जित किया जा रहा है, वर्तमान दौर प्रतिस्पर्धा का है, बाजार में टिके रहने के लिए उत्पादन की गुणवत्ता एवं मात्रा दोनों को बढ़ाना आवश्यक है, आधुनिक उपकरणों के माध्यम से कारीगर न केवल अधिक उत्पादन कर पाएंगे बल्कि अपने उत्पादों को बाजार में बेहतर तरीके से प्रस्तुत भी कर सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी, जब व्यक्ति अपने कौशल के आधार पर आय अर्जित करता है, तभी वह अपने जीवन स्तर को ऊंचा उठा सकता है और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है, प्राप्त टूल किट्स का सदुपयोग करें और अपने कार्य में और अधिक दक्षता लाएं। उन्होंने कहा कि लाभार्थी अपने उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) या अन्य किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वह प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं, प्रशासन एवं संबंधित अधिकारी उनकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर रहेंगे, जीवन के प्रत्येक चरण जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित है, कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां सहायता के लिए योजना उपलब्ध न हो, योजनाओं, संसाधनों और धन की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल इस बात की है कि लोग इन योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और उनका अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा ने कहा कि पूर्व में कारीगर पारंपरिक चाक जैसे साधनों पर निर्भर रहते थे, जिनमें अत्यधिक शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती थी, उत्पादन सीमित रहता था, आय के अवसर भी कम होते थे किंतु अब तकनीकी उन्नयन के माध्यम से इन्हीं पारंपरिक विधाओं को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया जा रहा है, इलेक्ट्रॉनिक चॉक जैसे आधुनिक उपकरणों के माध्यम से न केवल कारीगरों की मेहनत कम हुई है, बल्कि उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर हुई है और बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ी है। उन्होने कहा कि गांवों में रहने वाले कारीगर पीढ़ियों से अपनी पारंपरिक कला में दक्ष रहे हैं और यही कला उनकी आजीविका का मुख्य आधार रही है किंतु तकनीकी संसाधनों के अभाव में वे समय के साथ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ते चले गए, अब इस प्रकार की योजनाओं के माध्यम से उन्हें पुनः सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे वह न केवल अपने कौशल को पुनर्जीवित कर सकेंगे, बल्कि उसे आधुनिक स्वरूप देकर अधिक लाभ भी अर्जित कर सकेंगे।

मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने कहा कि योजना के माध्यम से विभिन्न प्रकार के तकनीकी उन्नयन (टेक्नोलॉजिकल इम्प्रूवमेंट्स) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कुटीर उद्योगों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, यह कार्यक्रम वर्ष भर संचालित किया जाता है, जिससे निरंतर लाभार्थियों को सहायता मिलती रहे, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्होने कहा कि आज का समय डिजिटल और तकनीकी विकास का है और “डिजिटल इंडिया” जैसी पहल के माध्यम से देश में स्थानीय निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने “ग्लोबल से लोकल” की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि हमें वैश्विक तकनीकों और मानकों का उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन को सशक्त बनाना होगा, पारंपरिक कार्यों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर उत्पादन क्षमता बढ़ाएं और अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में स्थापित करें, केवल पारंपरिक उपकरणों के सहारे आज के वैश्विक प्रतिस्पर्धी बाजार में टिके रहना संभव नहीं है, इसलिए आधुनिक मशीनों और तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वह अधिक से अधिक संख्या में कुटीर उद्योगों और स्थानीय उत्पादन गतिविधियों से जुड़ें, लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं उपलब्ध हैं, लाभार्थी बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते हैं, विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत अनुदान प्राप्त कर सकते हैं तथा अपने उद्योग को आगे बढ़ा सकते हैं।

इस अवसर पर अनुजेश प्रताप सिंह, उदय चौहान, कविता राठौर, शशि राजपूत के अलावा क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी पवन यादव सहित ग्राम प्रधान, लाभार्थी आदि उपस्थित रहे।