मैनपुरी(सुवि)राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण, जनपद के प्रभारी मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने शिव पैलेस में आयोजित किसान-मजदूर सम्मेलन में विभिन्न योजनाओं में लाभार्थियों को टूलकिट, श्रमकार्ड आदि वितरित करने के उपरांत उपस्थित श्रमिकों, कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत-जी राम जी ग्रामीण रोज़गार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है, इस योजना के लागू होने से समृद्ध, सक्षम और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव मजबूत होगी, विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन भारत के ग्रामीण रोज़गार और विकास ढांचे में एक निर्णायक सुधार का मार्ग प्रशस्त करेगा, यह अधिनियम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम-2005 महात्मा गांधी नरेगा को प्रतिस्थापित करते हुए आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाला एक आधुनिक वैधानिक ढांचा प्रदान करेगा जो विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप है। उन्होने कहा कि यह अधिनियम सशक्तिकरण, विकास, कन्वर्जेंस और परिपूर्णता के सिद्धांतों पर आधारित यह अधिनियम ग्रामीण रोज़गार को एक कल्याणकारी योजना से आगे बढ़ाकर विकास का एकीकृत माध्यम बनाता है, यह ग्रामीण परिवारों की आय, सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, कृषि और ग्रामीण श्रम के बीच संतुलित प्राविधान बुवाई और कटाई के चरम सीजन के दौरान कृषि से संबंधित गतिविधियों हेतु कृषि श्रम की उपलब्धता आसान करने के लिए यह अधिनियम राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित करने का अधिकार प्रदान करेगा, जिससे कृषि उत्पादकता और श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के मध्य संतुलित समायोजन सुनिश्चित होगा, साप्ताहिक आधार पर अथवा किसी भी स्थिति में कार्य की समाप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर भुगतान किए जाने का प्राविधान किया गया है, मजदूरी और मानदेय का भुगतान एक सप्ताह के भीतर डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में किया जाएगा, बिचौलियों, दलालों और भ्रष्ट तत्वों की भूमिका समाप्त होगी, जो व्यक्ति मेहनत करेगा, उसका पूरा पारिश्रमिक सीधे उसी के खाते में पहुँचेगा, पारदर्शिता को और मजबूत करने के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था की गई है।

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प्रभारी मंत्री ने कहा कि मनरेगा की मूल अवधारणा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नव-युवकों, मजदूरों और बेरोजगारों को न्यूनतम रोजगार उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की थी किंतु दुर्भाग्यवश, पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में यह योजना अपने उद्देश्यों को पूर्ण रूप से हासिल नहीं कर सकी, योजना का लाभ कुछ प्रभावशाली लोगों, दलालों या चुनिंदा व्यक्तियों तक सीमित रह गया, व्यापक स्तर पर धन का दुरुपयोग हुआ और वास्तविक जरूरतमंदों तक उसका पूरा लाभ नहीं पहुँच सका। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संसद के पटल पर कहा था कि केंद्र से भेजे गए 100 रुपये में से केवल 15 रुपये ही लाभार्थी तक पहुँच पाते हैं और शेष राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है, उनका यह वक्तव्य उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाता है, इसी प्रकार मनमोहन सिंह के दस वर्षों के कार्यकाल में मनरेगा पर लगभग 02 लाख करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की गई किंतु अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए, योजना चली धनराशि भी खर्च हुई, परंतु ग्रामीण जनता को उसका समुचित और स्थायी लाभ नहीं मिल सका, जब यह स्पष्ट हो गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण की मौजूदा व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है, तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस व्यवस्था में मूल-भूत परिवर्तन का संकल्प लिया, उन्होने दृढ़ निश्चय किया कि इस योजना को केवल नाम बदलने तक सीमित न रखकर, क्रियान्वयन, पारदर्शिता और प्रभाव को भी बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले इस योजना के अंतर्गत सीमित प्रकार के कार्य होते थे, वहीं अब इसका दायरा बढ़ाकर जल संरक्षण, जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक परिसंपत्तियों का संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, योजना को पीएम गति शक्ति सहित अन्य विकास योजनाओं से जोड़ा गया है ताकि इसके माध्यम से किए जाने वाले कार्य केवल अस्थायी न हों बल्कि दीर्घकालीन विकास में सहायक बनें।

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उन्होंने कहा कि योजना के नाम को लेकर कुछ लोगों द्वारा भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, महात्मा गांधी किसी एक दल या विचारधारा के नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के हैं, महात्मा गांधी भगवान श्रीराम को अपना आराध्य मानते थे, उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते थे, महात्मा गांधी की इसी आस्था और विचारधारा का सम्मान करते हुए उनके आराध्य देव भगवान श्रीराम के नाम पर इस योजना को नाम दिया गया है, इसका उद्देश्य न तो किसी महापुरुष को हटाना है और नाही किसी के सम्मान को कम करना बल्कि गांधी जी के विचारों, मूल्यों को और व्यापक रूप से सम्मान देना है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व प्रगति की है, भारत, जो कभी विश्व की 11वीं अर्थव्यवस्था था, आज चौथे स्थान पर पहुँच चुका है और आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 80 करोड़ से अधिक लोगों को वर्षों तक निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया गया और आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से करोड़ों नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की गई, विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीण भारत में खुशहाली, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखेगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में यह योजना एक मजबूत आधार सिद्ध होगी।

जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में आम नागरिक, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के किसान, मजदूर और युवा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, केन्द्र-प्रदेश सरकार जनता के कल्याण, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है, सरकार की योजनाएँ केवल कागजों तक सीमित न रहें बल्कि उनका वास्तविक लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचे, यही केन्द्र-प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है साथ ही प्रदेश, राष्ट्र के विकास में अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए हम सक्रिय भागीदारी निभाएँ। उन्होंने कहा कि हम सबके लिए यह अत्यंत हर्ष, सौभाग्य का विषय है कि मंत्री जी ने अत्यंत सरल, सहज और स्पष्ट शब्दों में विकसित भारत जी राम जी योजना के उद्देश्य, स्वरूप और उसके महत्व के बारे में हम सभी को विस्तार से अवगत कराया, हम सभी का कर्तव्य बनता है कि अपने गांव, जनपद, प्रदेश, राष्ट्र को विकसित बनाने के लिए सरकार की योजनाओं का सही उपयोग करें, ईमानदारी से कार्य करें और दूसरों को भी जागरूक करें ताकि विकसित भारत का सपना साकार हो सके।

मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने कहा कि आज के कार्यक्रम का मुख्य केंद्र-बिन्दु विकसित भारत जी राम जी योजना है, पहले मनरेगा में 100 दिन की गारंटी मिलती थी लेकिन अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जो इस योजना में महत्वपूर्ण बदलाव है, इस योजना में काम न मिलने की दशा में बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्राविधान किया गया है, समय पर भुगतान न होने पर मुआवजा देने की व्यवस्था की गयी है, इस योजना में कृषि और श्रमिकों में समन्वय का विशेष ध्यान रखा गया है।

प्रभारी मंत्री, जिलाध्यक्ष, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजनांतर्गत दर्जी ट्रेड में वंदना, रागिनी पाल, सोनी देवी, ज्योति, सीमा गुप्ता को सिलाई मशीन किट, शिव शंकर, अजीत कुमार, कमलेश शर्मा, मदन गोपाल को श्रमकार्ड, श्रम विभाग की कन्या विवाह योजनान्तर्गत कैलाश, प्रमोद कुमार को चैक, मनरेगा में 100 दिन पूर्ण करने वाली शीला देवी, अनीता देवी, विनोद कुमार, रतन सिंह, प्रवेन्द्र, राजेश, दिलीप कुमार, अरविन्द, सुनील कुमार, जितेन्द्र, गग्न कुमार को प्रमाण पत्र, शॉल प्रदान कर सम्मानित किया।

इस दौरान जिलाध्यक्ष ममता राजपूत, जिला प्रभारी अनिल चौधरी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान, राघवेंद्र दुबे, डॉ. विमल पांडेय सहित अन्य जन-प्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारियों के अलावा पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. सत्येंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग उत्कर्ष चंन्द्र, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी राजेश बघेल सहित बड़ी संख्या में कृषक, श्रमिक, महिलाएं आदि उपस्थित रहे।