मैनपुरी(सुवि)मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने जिला स्तरीय गौ-संरक्षण समिति की बैठक में उप जिलाधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, अधिशाषी अधिकारी नगर निकाय, पशु चिकित्साधिकारियों, नोडल अधिकारियों से कहा कि अपने-अपने क्षेत्र की गौशालाओं का निरीक्षण कर वहां संरक्षित गौवंशों हेतु सभी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करायें। उन्होने कहा कि संचालित गौ-आश्रय स्थलों के सभी अभिलेख अद्यावधिक रहें, गौशालाओं में पर्याप्त मात्रा में भूसा, दाना, पशुओं हेतु दवाई की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए, पशु चिकित्साधिकारी अपने अधीन प्रत्येक गौशाला में प्रतिदिन जाकर पशुओं की देखभाल करें, गोबर-गोमूत्र, दूध का प्रयोग गौशालाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्थाई-अस्थाई गौशाला से चारागाह की भूमि अटैच की जाए, चारागाह की भूमि में हरे चारे की बुवाई कराई जाए, सभी गौशालाओं में संरक्षित गोवंशों के लिए हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए, जानकारी करने पर पाया कि जनपद में 1999 हे. भूमि गौशालाओं से सबद्ध हैं, जिसमें से 80 हे. पर हरे चारे की बुवाई कराई जा चुकी है।
सी.डी.ओ. ने समीक्षा के दौरान पाया कि जनपद में संचालित 52 स्थायी-अस्थायी गौशालाओं में 11575 गौवंश संरक्षित हैं जो निर्धारित क्षमता से काफी अधिक हैं, जिस पर उन्होने खंड विकास अधिकारियों से कहा कि जिन क्षेत्रों में अधिक गौवंश गौशालाओं में संरक्षित हैं, वहां अस्थायी गौशालाओं का निर्माण कराकर उनमें गौवंशों को संरक्षित किया जाये, जानकारी करने पर पाया कि गुराई, पतारा, नानामऊ, सोनई, हथपऊ, जखऊआ एवं नगर पालिका क्षेत्र में संचालित वृहद गौशाला टी.ई.पी. नगर में क्षमता से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। उन्होने मुख्यमंत्री निराश्रित गौवंश सहभागिता योजना की जानकारी करने पर पाया कि 1683 लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 2115 गौवंश सहभागिता योजना में पशुपालकों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं, इस पर उन्होंने खंड विकास अधिकारियों, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय को निर्देशित करते हुए कहा कि सहभागिता योजना में पशुपालकों को अधिक से अधिक गौवंश संचालित गौशालाओं से लेने के लिए प्रेरित करें, सहभागिता योजना में जिन पशुपालकों द्वारा गौवंश लिए गए हैं, उनका सत्यापन कराकर समय से धनराशि उपलब्ध कराई जाए, खंड विकास अधिकारी सत्यापन में विलंब न करें, प्रतिमाह समय से सत्यापन रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें ताकि पशुपालकों को योजना के अन्तर्गत उपलब्ध करायी जाने वाली धनराशि का भुगतान समय से हो सके।
उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशु चिकित्साधिकारियों को निर्देशित करते हुये कहा कि वर्षा ऋतु के दृष्टिगत गौशाला में संरक्षित गोवंशों को प्राथमिकता पर गला घोंटू, खुरपका के टीके लगाए जाएं, किसी भी गौशाला में जल-भराव की स्थिति न रहे, सुनिश्चित किया जाए। उन्होने खंड विकास अधिकारियों, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय को आदेशित करते हुए कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में संचालित गौशालाओं का नियमित रूप से निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, जिन गौशालाओं में जल-भराव की संभावना है, वहां जल निकासी के बेहतर प्रबंध किए जाएं, प्रत्येक गौशाला में गोबर गैस प्लांट संचालित रहें, वर्मी कंपोस्ट का निर्माण कराया जाए। उन्होंने क्षेत्राधिकारी से कहा की गौवंशों की तस्करी रोकने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही हो।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आर.सी. गुप्ता, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. सोमदत्त सहित समस्त खंड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय, पशु चिकित्साधिकारी आदि उपस्थित रहे।



