मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कलैक्ट्रेट सभागार में सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्म दिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हुये उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई। उन्होने शपथ दिलाते हुये कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाये रखने के लिए स्वयं को समर्पित करें। उन्होने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने पूरे जीवन एकता, अखंडता पर बल दिया। उन्होने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर लगान के विरूद्ध बारदोली, खेड़ा सत्यागृह किया, इन्हीं आन्दोलनों से उन्हें ख्याति के साथ सरदार की उपाधि भी मिली। उन्होने कहा कि सरदार पटेल के भाषण में इतनी ऊर्जा, तेज था कि लोगों में उत्साह भर जाता था, एक लेखक ने लिखा है कि उनके भाषण इतने ऊर्जावान थे कि मुर्दे में भी जान आ जाती थी।

श्री सिंह ने कहा कि आजादी के समय देश में सैकड़ों छोटी-छोटी रियासतें थीं, सभी रियासतें स्वतंत्र थी, तमाम प्रांत थे, सभी की सोच, विचार अलग-अलग थी, उन सबको एक-जुट करने की चुनौती तत्कालीन राष्ट्र के निर्माताओं के सामने थी, जिसको पूरा करना कदाचित संभव नहीं हो पा रहा था लेकिन देश पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने व्यक्तिगत योगदान देकर सभी रियासतों को एक-जुट करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि भारत को एकीकृत करने, बड़ी संख्या में रियासतों को विलय करने में सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आजादी के समय अंग्रेजों ने रियासतों को छूट दी थी, वह अपनी स्वेच्छा से भारत के साथ जाएं या पाकिस्तान के साथ या फिर स्वतंत्र रहें, आजाद भारत के सामने सभी को एक-जुट रखने की बड़ी चुनौती थी और इसे देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने एक-जुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने कहा कि सभी लोग लौह पुरुष के आचरण का अनुसरण करें, आगे आने वाली पीढियों को अपने महापुरुषों के बारे में बताएं, स्वतंत्रता प्राप्त करने में कितने लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, असहनीय कष्ट झेले, स्वतंत्रता पाने के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ी, यह हमारी आगे आने वाली पीढ़ियों को मालूम होना बेहद जरूरी है।
अपर जिलाधिकारी राम जी मिश्र ने कहा कि देश के प्रथम गृहमंत्री, उप प्रधानमंत्री ने पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, उनके अंदर निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता थी, उन्होने कभी भी अपने फैसलों को नहीं बदला यही वजह है कि उन्हें लौह पुरूष की उपाधि से विभूषित किया गया। अपर जिलाधिकारी न्यायिक नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि आजादी केे बाद लगभग सभी रियासतों ने भारत के साथ विलय करने की सहमति दी, सिर्फ 03 रियासत हैदराबाद, जूनागढ़, जम्मू एंड कश्मीर ने सहमति नहीं दी, इनमें से हैदराबाद, जूनागढ़ को विलय कराने की जिम्मेदारी सरदार पटेल को मिली जिसे उन्होने अपनी अद्भुत निर्णय क्षमता से आसानी से विलय कराया। डिप्टी कलेक्टर धु्रव शुक्ला, नाजिर रोहित दुबे, रवि बाबू ने भी सरदार बल्लभ भाई पटेल के व्यक्तित्व पर विचार व्यक्त किये।
इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जगदीश दीक्षित, प्रशासनिक अधिकारी हरेन्द्र सिंह, डी.जी.सी. सुधाकर मिश्रा, ई-डिस्ट्रिक मैनेजर सौरभ पाण्डेय, अनिल सक्सैना, वीरेश पाठक, रमेश तोमर, प्रदीप कुमार, जितेन्द्र कुमार, सत्येन्द्र कुमार, कालीचरन, पुष्पेन्द्र सिंह, अनुज कुमार, अजय यादव, अवनीश कुमार, कलैक्ट्रेट के विभिन्न अनुभाग प्रभारी आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने किया।




Good
Comments are closed.