मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कलेक्ट्रेट स्थित पारिजात सभागार में निराश्रित गो-आश्रय स्थलों के सुदृढ़ीकरण, गोवंश संरक्षण तथा संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि गो-आश्रय स्थलों की वित्तीय स्थिति, मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं, सुरक्षा प्रबंधों, गोवंश के भरण-पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबन्ध किये जायें। उन्होने गोसेवा कोष की स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कोष में स्थानीय स्तर पर जनसहयोग बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं, कोष में दान और सहयोग को सुगम बनाने के लिए क्यूआर कोड जारी किया जाए और विभिन्न विभागों, ब्लाकों तथा इच्छुक नागरिकों व किसानों से समन्वय कर निधि का संवर्धन किया जाए ताकि गोशालाओं की तात्कालिक और महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति में धन की कोई बाधा न आए। उन्होने गो-आश्रय स्थलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को परखने के लिए खंड विकास अधिकारियों, अधिशासी अधिकारियों को 01 सप्ताह के भीतर गैप एनालिसिस कराने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी गोशालाओं में बाउंड्रीवाल, शेड, जल निकासी, पानी की समुचित उपलब्धता, नाद और आगामी शीत ऋतु से बचाव के प्रबंधों का ऑकलन किया जाए, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के आगामी प्रस्तावों में इन कमियों को दूर करने के लिए फंड कन्वर्जेंस की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, जिन गोशालाओं में बाउंड्रीवाल का अभाव है, वहां तत्काल बाउंड्रीवाल का प्रस्ताव सम्मिलित किया जाये, जिससे निराश्रित गोवंश सुरक्षित रहे और बाहरी, जंगली जानवरों से उनका बचाव सुनिश्चित हो सके।

श्री त्रिपाठी ने डी.पी.आर.ओ., अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक ब्लॉक एवं बड़ी ग्राम पंचायतों में कैटल कैचर क्रय किये जाएं और उनका रोस्टर निर्धारित किया जाए ताकि संबंधित ग्राम पंचायतें तय शुल्क और ईंधन व्यवस्था के तहत उनका उपयोग कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि खुले वाहनों या ट्रॉलियों में पशुओं को अव्यवस्थित ढंग से न भरा जाए, बल्कि पशु क्रूरता निवारण मानकों का पालन करते हुए पर्याप्त क्षमता वाले मानक कैटल कैचर ही क्रय किये जाएं। उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थलों से सबद्ध 207 हे. गोचर भूमि में से शेष बची भूमि पर तत्काल बरसीम, हरे चारे की बुवाई कराई जाए, किसानों के माध्यम से नेपियर घास की जड़ों की आपूर्ति, चारे की खरीद की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा पात्र किसानों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान कराया जाए। उन्होने कहा कि सभी गो-आश्रय स्थलों पर एक ही मानक कंपनी के सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उन्हें जिला स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम से जोड़ा जाए। उन्होने गोशालाओं के कुशल संचालन हेतु स्वयं सहायता समूहों, सक्षम सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता बढ़ाने पर बल देते हुए ’गो-सखी’ जैसी व्यवस्था लागू करने तथा संबंधित प्रस्तावों को जिला स्तरीय समिति से अनुमोदित कराकर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जनपद की कुछ गौशालाओं से गोवंशों के रख-रखाव एवं गौशाला में सुविधाओं के अभाव से संबंधित शिकायतें निरंतर प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं में संरक्षित गोवंशों की बेहतर देखभाल की जाए यदि भविष्य में किसी भी गौशाला में सुविधाओं के अभाव, गोवंशों के देखरेख में लापरवाही की शिकायतें प्राप्त हुई तो संबंधित केयरटेकर की जिम्मेदारी तय होगी साथ ही संबंधित पशु चिकित्साधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय, खंड विकास अधिकारी की भी जवाबदेयी निर्धारित की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संतोष बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनन्द, डिप्टी कलेक्टर अनुराग प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सऊद के अलावा खंड विकास अधिकारी, अधिशाषी अधिकारी नगर निकाय, पशु चिकित्साधिकारी आदि उपस्थित रहे।



