मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने रू. 3800.11 लाख की लागत से निर्माणाधीन सांस्कृतिक केन्द्र, संग्रहालय एवं रू. 2461.61 लाख की लागत से निर्माणाधीन प्रेक्षागृह, बहुउद्देशीय हॉल के निरीक्षण के दौरान कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के अभियंता, ठेकेदारों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण कक्षों, अतिथि गृह एवं सम्पूर्ण परिसर में चल रहे निर्माण, सौन्दर्यीकरण सहित समस्त कार्यों को टुकड़ों-टुकड़ों में करने के बजाय एक साथ समानान्तर रूप से संचालित किया जाए, जिससे सम्पूर्ण परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सके, कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान उन्होने कक्षों एवं प्रेक्षागृह के प्रवेश द्वारों पर लगाए जा रहे ग्लास एवं फ्रेमिंग का अवलोकन करते हुए कहा कि कांच पर उ.प्र. के प्रमुख लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों कथ्थक, भरतनाट्यम व अन्य सांस्कृतिक विधाओं के आकर्षक पैटर्न एवं थीम आधारित डिजाइनों का अंकन कराया जाए। उन्होने सीलिंग में कोब लाइट लगाने तथा विद्युत का कार्य पूर्ण होते ही अंतिम पेंटिंग फिनिश कराने के निर्देश दिए।

श्री त्रिपाठी ने दीवारों के निर्माण, प्लास्टर कार्य का निरीक्षण करते हुए कहा कि दीवार से बाहर निकल रही अतिरिक्त ईंटों के हिस्सों, पुराने प्लास्टर को तोड़कर पूरी सतह को समतल बनाया जाए ताकि वॉल पैनलिंग का कार्य निर्बाध रूप से हो सके, वॉल पैनलिंग को कोने से लेकर मुख्य गेट तक पूरी तरह से मैच कराया जाए ताकि डिजाइन का प्रवाह एक समान दिखे, किसी भी प्रकार का बेमेलपन नजर न आए। उन्होंने साउंड सिस्टम की वायरिंग, बेस तैयार करने के कार्य को भी तत्काल शुरू कराकर शीघ्र पूरा करने को कहा, शौचालय, स्टोर एवं आस-पास के क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान उन्होने टाइल्स, सीढ़ी, सीसी कार्य को मजबूती से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने फॉल सीलिंग के सम्बंध में निर्देशित करते हुए कहा कि यदि खुली पट्टी वाली सीलिंग बनाई जा रही है तो उसे आधुनिक रेस्टोरेंट शैली के अनुसार इस प्रकार व्यवस्थित किया जाए कि वह बदसूरत न लगे बल्कि उसका रूप निखर कर आए, इस तरह के छोटे-मोटे फिनिशिंग कार्यों में अनावश्यक विलंब न किया जाए। उन्होने परिसर के बाहरी हिस्से में पत्थर लगाने के कार्य का निरीक्षण करते हुए आदेशित किया कि जॉइंट्स पर विशेष ध्यान दिया जाए, पत्थरों की लेयरिंग आगे-पीछे न हो तथा उनके बीच प्रॉपर ग्राउटिंग कर एक समान फिनिशिंग सुनिश्चित की जाए, भारी पत्थरों को दीवार पर मजबूती से टिकाने के लिए फासनर का अनिवार्य रूप से प्रयोग किया जाये ताकि भविष्य में उनके गिरने या किसी अप्रिय दुर्घटना की आशंका न रहे, पाथ-वे में लाल, पीले रंग के पत्थरों, मार्बल की फ्लोरिंग को निर्धारित पैटर्न के अनुसार ही बिछाया जाये।
निरीक्षण के दौरान परिसर में कार्य कर रहे मजदूरों द्वारा खुले में पानी बहाए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मजदूरों के लिए अलग से अस्थायी वॉशरूम की व्यवस्था की जाए तथा जल-निकासी के लिए समुचित ड्रेनेज बनाया जाए, जिससे पानी खुले में न बहे। उन्होने गेस्ट हाउस के आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह से साफ-सुथरा कर सुंदर लैंडस्केपिंग कराने को कहा। उन्होंने कहा कि परिसर में खड़े यूकेलिप्टस के पुराने पेड़ों को नियमानुसार मूल्यांकन कराकर एवं समिति गठित कर नीलाम कराया जाये साथ ही परिसर में उपयुक्त छायादार, शोभाकार पौधे लगाए जाएं। उन्होने कैफेटेरिया एवं किचन एरिया को व्यवस्थित करने, पार्किंग, मुख्य मार्ग के किनारे जल-भराव को रोकने के लिए नाले व पार्किंग क्षेत्र का समुचित विकास करने तथा परिसर में उपर्युक्त स्थानों पर 02 से 03 सजावटी लाइट, पोल स्थापित कराने, वाटर एवं फायर फाइटिंग पाइप लाइनों की जांच करने, पूरे परिसर को फ्रंट-सेंट्रिक मॉडल पर स्वच्छ व आकर्षक बनाने के भी निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी संतोष बहादुर सिंह, कार्यदायी संस्था के अभियंता आदि उपस्थित रहे।



