मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने सेवा-संकल्प अभियान के तहत एक जनपद-एक उत्पाद प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना के अंतर्गत अपैरल ट्रेनिंग एंड डिजाइन सेंटर कानपुर के तत्वाधान में सुदामा गार्डन में आयोजित 10-दिवसीय कौशल एवं उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में जरी-जरदोजी और तारकशी शिल्प में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जनपद की समृद्ध शिल्प परंपरा में जरी-जरदोजी, तारकशी प्रमुख स्थान रखते हैं, जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण औपचारिकता पूरी करना या टूलकिट का वितरण करना नहीं बल्कि शहरी, ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को वास्तविक रूप में आर्थिक स्वावलंबन प्रदान कर लखपति दीदी की श्रेणी में खड़ा करना है। उन्होंने जरी-जरदोजी शिल्प की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कार्य अत्यंत कलात्मक, बहुमूल्य है, इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती बैकवर्ड, फॉरवर्ड लिंकेज की होती है यदि किसी कारीगर को कच्चा माल सही दाम पर न मिले या तैयार उत्पाद की बिक्री की उचित व्यवस्था न हो, तो उनकी पूंजी, मेहनत व्यर्थ चली जाती है, गांव के बाजारों में इस प्रकार के महंगे शिल्प की मांग सीमित रहती है जबकि बड़े शहरों में इसकी भारी मांग है, विशेषकर शादी-विवाह और त्योहार के सीजन में लहंगे, साड़ियां, सूट, दुपट्टों पर जरी-जरदोजी के वस्त्रों की आवश्यकता होती है। उन्होने कहा कि जिला प्रशासन प्रशिक्षुओं को दिल्ली के चांदनी चौक, अन्य बड़े व्यापारिक केंद्रों से सीधे जोड़ने की ठोस रूप-रेखा तैयार कर रहा है, व्यापारियों द्वारा कपड़ा, कच्चा माल, डिजाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे तैयार करने पर समूहों को प्रति उत्पाद निर्धारित पारिश्रमिक प्राप्त होगा।

श्री त्रिपाठी ने प्रशिक्षण प्रदाता संस्था के प्रतिनिधियों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव प्रदान किया जाये, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं सभी 125 महिलाओं को 20-25 के छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर समीपवर्ती जनपद फर्रूखाबाद, स्थानीय स्तर पर जरी-जरदोजी का कार्य कर रहीं स्वयं सहायता समूह की अनुभवी बहनों के पास एक्सपोजर विजिट के लिए भेजा जाए, फील्ड विजिट से प्रशिक्षु महिलाएं कार्य प्रणाली, तकनीक, डिजाइनिंग और बाजार की मांग को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगी। उन्होंने उपायुक्त उद्योग को निर्देशित करते हुए कहा कि ग्रामीण घरों में स्थान के अभाव के कारण कारीगरों को असुविधा का सामना करना पड़ता है इसके स्थायी समाधान के लिए भोगांव नगर पंचायत, सिकंदरपुर, कोसमा तथा अन्य चयनित ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा एवं अन्य अभिसरण योजनाओं के सहयोग से सर्व-सुविधायुक्त वर्किंग स्टेशन स्थापित कराये जायें, इन साझा कार्य-स्थलों पर मशीनें स्थापित रहें ताकि महिलाएं अपनी सुविधानुसार पहुंचकर सामूहिक रूप से कार्य कर सकें, इन केंद्रों का संचालन स्वयं महिला समूहों द्वारा ही कराया जाये, सभी प्रशिक्षित महिलाओं के छोटे-छोटे समूह गठित कर उनका किसान उत्पादक संगठन या क्लस्टर तैयार किया जाए ताकि सामूहिक रूप से कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पाद भेजने में सुगमता रहे साथ ही प्रशिक्षण उपरांत समूहों के कार्यों की नियमित ट्रैकिंग, समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर उपायुक्त उद्योग डॉ. बनवारी लाल, सहायक प्रबन्धक उद्योग अजय परिहार, अपैरल ट्रेनिंग एंड डिजाइन सेंटर के प्रतिनिधि, प्रशिक्षु महिलाएं उपस्थित रहीं।



