मैनपुरी(सुवि)क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान के सभागार में ’भारत की जनगणना 2027’ के द्वितीय चरण के अंतर्गत ’जनसंख्या की गणना’ हेतु फील्ड ट्रेनर्स के 03 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि जनगणना केवल व्यक्तियों की गिनती का सामान्य प्रशासनिक कार्य नहीं बल्कि यह किसी भी राष्ट्र, राज्य के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है, देश में बनने वाली समस्त जन-कल्याणकारी नीतियां, वित्तीय योजनाएं, बजट के सेक्टरवार प्राविधान और सामाजिक-आर्थिक विकास के सभी पैरामीटर्स पूर्णतः जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग द्वारा केंद्र से राज्यों के मध्य वित्तीय संसाधनों का जो डिवोल्यूशन (हस्तांतरण) किया जाता है, उसमें जनसंख्या का अनुपात और भौगोलिक क्षेत्रफल सबसे महत्वपूर्ण घटक होते हैं, 15-वें, 16-वें वित्त आयोग के मानकों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पेयजल और अवस्थापना विकास के मदों में धन का आवंटन इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होता है यदि किसी क्षेत्र की गणना में कोई कमी या अशुद्धि रह जाती है, तो वह क्षेत्र आगामी कई वर्षों तक विकास के वास्तविक लाभ और सरकारी बजट से वंचित रह सकता है इसलिए प्रत्येक ट्रेनर, प्रगणक की नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी है कि फील्ड में एक-एक व्यक्ति की प्रामाणिक और त्रुटिरहित प्रविष्टि दर्ज करे।

श्री त्रिपाठी ने जनगणना में शामिल जातीय गणना को अत्यंत संवेदनशील, गंभीर बताते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासनिक मशीनरी किसी भी राजनीतिक धारा से अलग रहकर नीतियों के निष्पक्ष, पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध होती है, फील्ड स्तर पर प्रगणकों द्वारा की गई एक छोटी सी लापरवाही, गलत प्रविष्टि सामाजिक स्तर पर गंभीर विवाद और भ्रम उत्पन्न कर सकती है। उन्होंने कहा कि केवल व्यक्ति की संख्या गिनने और उसकी जातिगत स्थिति को सही रूप से दर्ज करने में भारी अंतर होता है, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य श्रेणी के वर्गीकरण में किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति न हो, कई बार स्थानीय स्तर पर एक ही वर्ग के अलग-अलग उपनामों अथवा प्रमाण-पत्रों को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, जिसे प्रगणकों को भली-भांति समझना होगा यदि किसी गांव, मजरे में प्रविष्टि के दौरान लापरवाही हुई तो बाद में प्रशासनिक स्तर पर टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है, प्रत्येक फील्ड ट्रेनर यह सुनिश्चित करें कि प्रगणक पूरी तरह प्रशिक्षित होकर क्षेत्र में जायें, जाति से संबंधित प्रत्येक प्रविष्टि पूरी तरह नियमानुकूल और सत्यापित हो, जनगणना के दोनों चरणों के अंतर को समझाते हुए कहा कि प्रथम चरण में मकानों का सूचीकरण, आवासीय परिस्थितियों का ऑकलन किया गया था, अब द्वितीय चरण में वास्तविक व्यक्तियों की गणना की जानी है। उन्होने पल्स-पोलियो अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार ’एक भी बच्चा छूटा, सुरक्षा चक्र टूटा’ का संकल्प लेकर शत-प्रतिशत आच्छादन किया गया ठीक उसी तर्ज पर जनगणना में ’एक भी व्यक्ति छूटा, जनगणना चक्र टूटा’ के सिद्धांत पर काम करना होगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि शहरी, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बंद मकानों, अनुपलब्ध परिवारों की समस्या के समाधान के लिए विशेष कार्य-योजना बनायी जाये, अक्सर सुबह लोग काम पर निकल जाते हैं और शाम को लौटते हैं, जिससे कई मकानों पर ताला बंद मिलता है, ऐसे बंद घरों के लिए अलग से रजिस्टर बनाया जाए, उन पर विशेष मार्किंग या पैम्फलेट चस्पा कर पुनर्भ्रमण किया जाए, जब तक उस घर के प्रत्येक सदस्य की सही जानकारी प्राप्त न हो जाए, तब तक प्रक्रिया को अधूरा न छोड़ा जाए इसके अतिरिक्त उन्होंने बड़े गणना ब्लॉकों को संतुलित करने के लिए सहायक प्रगणकों के समन्वय पर बल दिया, जहां आबादी अधिक होने के कारण ब्लॉक विभाजित किए गए हैं, वहां पुराने, नए प्रगणक आपस में समन्वय स्थापित कर पूरे क्षेत्र का सघन कवरेज सुनिश्चित करें। उन्होने डिजिटल डाटा संकलन और एम.आई.एस. रिपोर्टिंग को लेकर भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अक्सर कार्मिकों में यह प्रवृत्ति देखी जाती है कि वह पूरे महीने का डाटा एकत्र कर अंतिम समय में एक साथ लॉक या फ्रीज करने का प्रयास करते है, यह अत्यंत अनुचित है क्योंकि इससे दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रभावित होती है और प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में गिरावट आती है, शासन स्तर पर प्रतिदिन एम.आई.एस. के माध्यम से प्रगति की निगरानी की जाती है, जैसे-जैसे गणना कार्य पूरा होता जाए, वैसे-वैसे डाटा का प्रतिदिन सत्यापन कर उसे सिस्टम में फ्रीज, फाइनलाइज किया जाए इसके साथ ही उन्होंने ’स्व-गणना’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्व-गणना के निर्धारित 15 दिनों की अवधि का अधिकतम उपयोग किया जाए यदि अधिक से अधिक नागरिक स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर देंगे तो प्रगणकों के लिए फील्ड सत्यापन का काम बेहद सुगम, तेज और पारदर्शी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मास्टर ट्रेनर ही गुरु की भूमिका में हैं इसलिए सभी प्रतिभागी पूर्ण अनुशासन और निष्ठा के साथ इस प्रशिक्षण को आत्मसात करें ताकि क्षेत्र में शत-प्रतिशत गुणवत्ता के साथ जनगणना कार्य संपन्न कराया जा सके।

इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर विकल्प, आचार्य टीईपी सेंटर सर्वेश कुमार शंखवार सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी, जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, बड़ी संख्या में फील्ड ट्रेनर्स उपस्थित रहे, प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनर्स की शंकाओं का समाधान किया गया और उन्हें व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से गणना प्रपत्रों एवं मोबाइल ऐप के संचालन की विस्तृत जानकारी दी गई।

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