मैनपुरी 26 जुलाई, 2022- जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने विकासखंड बरनाहल के नवाटेढ़ा गांव में प्राकृतिक खेती पर आधारित गोष्ठी तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामवासियों, कृषकों का आव्हान करते हुए कहा कि सभी लोग पर्यावरण संतुलन के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाएं और उनकी देखभाल करें, घटते वन क्षेत्र, वृक्षों की कमी के कारण वातावरण में ऑक्सीजन का लेवल भी घट रहा है, भू-गर्भ जलस्तर में भी तेजी से गिरावट आ रही है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है, अन्नदाता किसान इस ओर ध्यान दें, नई पद्धति से खेती करें, रासायनिक खादों के बजाय जैविक खादों का प्रयोग करें, खेतों के किनारे वृक्ष लगाएं, बांस की खेती से जुडें, बांस की खेती जीवनदायिनी ऑक्सीजन का बेहतर स्रोत है साथ ही बांस की खेती आर्थिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित किसानों से संवाद करते हुए कहा कि अंधाधुंध रसायनिक खादों के प्रयोग के कारण भूमि की उर्वरा शक्ति घटी है, भूमि की ऊपरी परत की मिट्टी की सेहत काफी खराब हो चुकी है यदि यही हालात रहे तो आगामी 30 वर्ष के उपरांत 40 प्रतिशत आबादी के सामने खाद्यान्न का संकट होगा, यदि वृक्ष न लगाये गये और इसी प्रकार औद्योगिकीकरण, विकास योजनाओं के लिए पेड़ों का कटान जारी रहा तो 30 वर्ष के बाद पर्यावरण में ऑक्सीजन लेवल इतना कम होगा कि आदमी को अपने साथ ऑक्सीजन की बोतल लेकर चलना पड़ेगा, जल संचयन की दिशा में अभी से न सोचा गया और भू-गर्भ जल का दोहन इसी प्रकार होता रहा तो 30 वर्ष के उपरांत आधी आबादी, पशु-पक्षियों के सामने पीने के पानी का संकट होगा, प्रदूषित पर्यावरण, खराब मिट्टी की सेहत, भू-गर्भ जल की कमी के कारण मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता घटेगी, वातावरण में तमाम प्रकार के जीवाणु होंगे, जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित होंगे इसलिए सभी लोग आज से ही पर्यावरण संतुलन, घटते जलस्तर को रोकने, वन क्षेत्र को बढ़ाने की दिशा में कार्य करें ताकि आगे आने वाली पीढ़ी को बेहतर वातावरण मिल सके।
श्री सिंह ने कहा कि मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए पशु-पक्षियों, गौवंश, महिषवंश, जानवरों के लिए आरक्षित भूमि पर भी कब्जा कर लिया, वन क्षेत्र घटने के कारण लगभग 06 हजार प्रजातियां समाप्त हो चुकी है, शेष पशु-पक्षियों के सामने भी भयानक संकट है। उन्होंने कहा कि बदले हुए परिवेश में हमारे सामने पर्यावरण असंतुलन का खतरा है, बढ़ती हुई आबादी का दबाव, गिरता हुआ जलस्तर, लगातार मौसम का गर्म होना, बरसात में निरंतर कमी आना गंभीर चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे जंगलों का कम होना, निजी बगीचों में भी वृक्षों की संख्या का घटना, घटते वन क्षेत्र के कारण पशु-पक्षियों की प्रजातियां का समाप्त होना मानव जीवन के लिए खतरनाक संदेश है, हम सबको इस ओर अभी से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि आज समाज में मानवता, आत्मीयता में कमी आयी है, कुछ समय पूर्व जब गांव में किसी के घर में किसी की मृत्यु होती थी तो पूरे गांव में चूल्हा नहीं जलता था, आपस में चाहे जितना बैर हो, दुख की घड़ी में सब एक साथ खड़े रहते थे लेकिन आज परिस्थितियां बदली है, हम सबको इस पर विचार करना होगा।
मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार ने गोष्ठी में उपस्थित कृषकों का आह्वान करते हुए कहा कि अन्नदाता किसान रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से बचें, मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जैविक खादों का प्रयोग करें, अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने, आय में वृद्धि करने के लिए किसानों के हितार्थ केंद्र, प्रदेश सरकार की संचालित योजनाओं की जानकारी कर उनका लाभ लें, खेत-तालाब योजना में अपनी निजी भूमि पर 01 लाख 05 हजार रु. की लागत से तालाब का निर्माण कराएं, इस पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, खेत-तालाब योजना में तालाब में मछली पालन करने से आर्थिक स्थिति में सुधार होगा साथ ही तालाब के पानी से क्षेत्र के भू-गर्भ जल स्तर सुधरेगा, पूरे वर्ष सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध होगा। उन्होंने किसानों से कहा कि कृषि विभाग की संचालित सोलर पंप योजना, कृषि यंत्र अनुदान योजना, बीज अनुदान योजना का लाभ पाने के लिए कृषि विभाग से संपर्क कर लाभ प्राप्त करें। उन्होंने एडीओ कृषि को निर्देशित करते हुए कहा कि मौके पर ही कृषि विभाग की संचालित योजना का लाभ पाने के इच्छुक किसानों से औपचारिकताएं पूर्ण कराकर लाभ प्रदान करायें।
प्रगतिशील कृषक डॉ. कुमार वैभव ने जैविक खेती से जुड़कर हुए फायदों, बांस की खेती करने से भविष्य में होने वाले लाभ के संबंध में अपने अनुभव साझा करते हुए किसानों से कहा कि आप सब प्राकृतिक खेती से जुड़कर पर्यावरण सुधारने, मिट्टी की सेहत ठीक करने में अपना योगदान दें। खेत-तालाब योजना का लाभ पाने वाले कृषक अविनाश सिंह चौहान ने बताया कि योजना का लाभ पाने के बाद तालाब में मछली पालन कर आय में वृद्धि हुयी साथ ही जलस्तर में भी सुधार हुआ।
इस अवसर पर उप जिला जिलाधिकारी करहल सत्येन्द्र सिंह, डिप्टी कलेक्टर, खंड विकास अधिकारी करहल अंजलि सिंह, उप निदेशक कृषि डी.वी. सिंह, जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप, जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी विजय सिंह, के.वी.के. के वैज्ञानिक डा. सुशील कुमार के अलावा बड़ी संख्या में कृषक, ग्रामीण आदि उपस्थित रहे।