मैनपुरी(सुवि)मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत इंटरफेस कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने महिला चिकित्सकों, शिक्षकों, विभिन्न क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं के अलावा घरेलू हिंसा उत्पीड़न से ग्रसित महिलाओं से सीधे संवाद करते हुए कहा कि केंद्र-प्रदेश सरकार ने महिलाओं-बालिकाओं की शिक्षा-सुरक्षा, स्वास्थ्य के अलावा स्वावलंबन, आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए तमाम योजनाएं संचालित की हैं, महिलाओं-बालिकाओं का किसी भी स्तर पर शोषण न हो, सभी को शिक्षा, सुरक्षा मिले, पीड़ित महिला-बालिका को तत्काल न्याय मिले इसके लिए प्रत्येक थाने पर महिला हेल्प-डेक्स की स्थापना कर वहां महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई ताकि पीड़ित महिला निःसंकोच अपनी बात कह सके। उन्होने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल अधिकार देने तक सीमित नहीं बल्कि समाज, परिवार और नई पीढ़ी को सही दिशा देने की जिम्मेदारी भी मातृशक्ति के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आवश्यक है लेकिन उसका सदुपयोग और अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है, अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन करने से ही स्वस्थ एवं सशक्त समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों में संयुक्त परिवारों का स्वरूप तेजी से समाप्त हो रहा है, पहले परिवारों में महिलाएं अपने सुख-दुख एक-दूसरे के साथ साझा कर लेती थीं, जिससे छोटे-छोटे विवाद स्वतः ही समाप्त हो जाते थे, आज संवाद की कमी और छोटे-छोटे अहंकार पारिवारिक कलह का कारण बन रहे हैं यदि समय रहते बातचीत, आपसी समझ विकसित की जाएं तो अनेक विवादों को न्यायालय तक पहुंचने से पहले ही समाप्त किया जा सकता है।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को सबसे अधिक विवेकपूर्ण सोच की आवश्यकता है, किसी भी बात पर बिना सत्यापन, विश्वास करने की प्रवृत्ति सामाजिक तनाव को बढ़ाती है, समाज की अग्रणी महिलाएं लोगों को जागरूक करें, परिवारों में संवाद बढ़ाएं तथा जहां कहीं भी अन्याय, उत्पीड़न हो, वहां पीड़ित महिलाओं को आगे बढ़कर सहयोग, उचित मार्ग-दर्शन प्रदान करें। उन्होंने कहा कि कई बार छोटे-छोटे पारिवारिक विवाद गंभीर रूप धारण कर लेते हैं जबकि थोड़ी बातचीत, मध्यस्थता से उनका समाधान संभव होता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की भूमिका केवल कानूनी कार्यवाही तक सीमित नहीं बल्कि सामाजिक समरसता बनाए रखना भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होने किशोरियों के सर्वांगीण विकास के लिए ’’किशोरी मंच’’ की अवधारणा को अत्यंत प्रभावी बताते हुए कहा कि प्रत्येक गांव में 25-30 किशोरियों का समूह बनाकर उन्हें जीवन कौशल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक विरासत तथा सही निर्णय लेने की क्षमता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को इन समूहों का संरक्षक बनाया जाएगा ताकि किशोरियों को नियमित मार्ग-दर्शन प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होता है, इस आयु में भावनात्मक निर्णय भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए आवश्यक है कि किशोरियों को सही मार्ग-दर्शन, पारिवारिक मूल्यों और आत्मविश्वास से जोड़ा जाए, जिससे वह किसी भी प्रकार के भ्रम या प्रलोभन का शिकार न बन सकें।

जिलाधिकारी ने कहा कि मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, अब आवश्यकता इस बात की है कि समाज की जागरूक महिलाएं, स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षिकाएं तथा सामाजिक संगठन मिलकर किशोरियों के व्यक्तित्व विकास और परिवारों में सकारात्मक वातावरण निर्माण की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है यदि परिवार मजबूत होंगे तो समाज भी मजबूत होगा, छोटे-छोटे विवादों को संवाद, समझदारी और आपसी विश्वास के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है, महिलाओं की सकारात्मक भागीदारी से सामाजिक समरसता को नई दिशा मिलेगी। उन्होने उपस्थित महिलाओं से आह्वान किया कि वह नई पीढ़ी को संस्कार, शिक्षा, आत्मविश्वास, स्वच्छता, सामाजिक जिम्मेदारी, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि किशोरियों में किया गया निवेश भविष्य की संपूर्ण मातृशक्ति और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का निवेश है यदि आज सही दिशा में प्रयास किए गए तो आने वाले वर्षों में समाज अधिक जागरूक, संवेदनशील, सुरक्षित और सशक्त बनकर सामने आएगा।

सुदिति ग्लोबल एकेडमी की छात्राओं ने स्वागत गीत एवं राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने घरेलू हिंसा, बाल विवाह, बाल श्रम पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। पीड़िता रुचि यादव, इंदिरा सिंह, बंदना, कुसमा देवी, डोली, सीमा, चंद्रावती, नम्रता, प्रीति, उर्मिला, मुन्नी देवी, शोभा, पूजा, सुमन, अंजलि आदि ने अपनी व्यथा सुनाई। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली रंजना चतुर्वेदी, लता पाण्डेय, कुसुम मोहन, मनोरमा दास, ऋचा मिश्रा, अनुपम शुक्ला, किरन सौजिया, गौरी, अनुपम गुप्ता, शशी वशिष्ठ, सुमन यादव, मधु माला यादव, रूपाली रस्तोगी, चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर डॉ. प्रिया सचान सेंगर, डॉ. आभा पाण्डेय गुप्ता, डॉ. दिव्या सरीन सेंगर, डॉ. पल्लवी निखार पाल, डॉ. शैलजा सचान, नर्सिंग ऑफीसर रूचि यादव, ए.एन.एम. मनीषा, आशा कार्यकत्री मीरा, बच्चों, महिलाओं की सहायता हेतु उत्कृष्ट कार्य करने पर बाल संरक्षण अधिकारी अल्का मिश्रा, जेंण्डर स्पेशलिस्ट प्रतिभा, पुलिस विभाग से खुशबू उपाध्याय, प्रभारी महिला सहायता प्रकोष्ठ सविता सेंगर, महिला आरक्षी ज्योति, बाल विकास एवं पुष्टाहार से नीतू, आगंनबाड़ी कार्यकत्री संध्या, आपदा विशेषज्ञ अंकित सक्सैना, एन.आर.एल.एम. से अर्चना शाक्य, पीएलवी ग्रीशा को प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनन्द, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अभिषेक तिवारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी राजनाथ राम आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन बाल संरक्षण अधिकारी अल्का मिश्रा ने किया।

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