मैनपुरी(सुवि)वृहद वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत विकास खंड मैनपुरी के ग्राम बड़ेरी में 28 एकड़ भूमि पर जन-प्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, एन.सी.सी., एन.एस.एस. कैडेट्स, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, समूह सखी, शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति में शासन स्तर से कार्यक्रम हेतु नामित दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री, अध्यक्ष महिला कल्याण निगम उ.प्र. कमलावती सिंह ने कहा कि ’’एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रकृति, मातृत्व, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य को समर्पित एक जनान्दोलन है, आज पूरे प्रदेश, देश में एक साथ चल रहा यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई चेतना का संचार करेगा यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसे जीवित रखने का संकल्प लें, तो आने वाले वर्षों में अधिकांश क्षेत्र पुनः हरियाली से आच्छादित हो जाएगा। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अभिभावकों, जन-प्रतिनिधियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि जिस उत्साह और समर्पण के साथ बच्चे अपनी माता के नाम की पट्टिकाएं लेकर इस अभियान में शामिल हुए हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायक है, जब कोई बच्चा अपनी माँ के नाम से पौधा लगाता है, तो उसका उस पौधे से भावनात्मक रिश्ता बन जाता है और वही रिश्ता उसके संरक्षण की सबसे बड़ी गारंटी बनता है।

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अध्यक्ष महिला कल्याण निगम ने कहा कि जनपद प्रशासन द्वारा इस विशाल परिसर को एक आदर्श हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है, नगर वन, औषधि वाटिका, नक्षत्र वाटिका और अन्य थीम आधारित क्षेत्रों का विकास न केवल पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देगा बल्कि लोगों को भारतीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति भी जागरूक करेगा, ऐसे प्रयास अन्य जनपदों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए गीत-संगीत, लोककला, नुक्कड़-नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति की पूजा की परंपरा रही है, हमारे पूर्वजों ने पीपल, बरगद, नीम, आंवला, आम और अन्य वृक्षों को केवल पेड़ नहीं बल्कि जीवनदाता माना, आज भी हम अपने पूर्वजों द्वारा लगाए गए वृक्षों के फल, छाया और शुद्ध वातावरण का लाभ उठा रहे हैं, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम भी आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसी ही हरित धरोहर छोड़कर जाएँ।

जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि वृक्षारोपण को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जन-भागीदारी से जुड़ा जीवंत अभियान बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि वृक्षारोपण कार्यक्रम एक उत्सव का स्वरूप ग्रहण करे, जिसमें प्रत्येक नागरिक उत्साहपूर्वक सहभागी बने और पौधारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं। उन्होने कहा कि पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं बल्कि जीवंत अस्तित्व हैं, जिस प्रकार मनुष्य का जीवन होता है, उसी प्रकार वृक्ष भी संवेदनशील होते हैं, इसलिए प्रत्येक पौधा लगाना एक नए जीवन का सृजन करने के समान है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष ’’एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान के अंतर्गत बच्चों ने अपनी माता के नाम से पौधों पर टैग लगाए हैं, यह पहल बच्चों को पौधों के प्रति भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि 06 माह बाद पुनः इस स्थल पर कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा, जिसमें प्रत्येक विद्यालय अपने-अपने विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए पौधों की स्थिति का अवलोकन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय की जिम्मेदारी होगी कि शिक्षक समय-समय पर आकर पौधों की देखभाल और उनके संरक्षण की समीक्षा करें ताकि लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर वृक्ष का स्वरूप धारण कर सकें।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि 28 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस वृहद वृक्षारोपण स्थल पर चरणबद्ध तरीके से लाखों पौधे रोपित किये जाएंगे, यह क्षेत्र भविष्य में आस-पास के गांवों के लिए हरित विरासत का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि यहां थीम आधारित वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ जैव विविधता का भी संवर्धन हो सके। उन्होंने कहा कि विभिन्न खंडों में बरगद, पीपल, धूंधल, आंवला सहित अनेक प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं ताकि गौरैया सहित अन्य पक्षियों एवं वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास और भोजन उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के कारण अनेक पक्षी और जीव अपने प्राकृतिक आवास खो रहे हैं इसलिए ऐसे पौधारोपण की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होने कहा कि स्थल पर एक ओर हरिशंकरी, त्रिवेणी एवं पंचवटी की अवधारणा पर आधारित थीम वाटिका विकसित की जा रही है जबकि दूसरी ओर बड़े स्तर पर ब्लॉक प्लांटेशन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनपद के प्रत्येक विकासखंड में 02-02 स्थलों का चयन कर इसी प्रकार के आदर्श वृक्षारोपण स्थल विकसित किए जाएंगे, वृक्षारोपण अभियान की नियमित मासिक समीक्षा की जाएगी तथा वन विभाग को प्रत्येक स्थल की डिजिटल डायरी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यह निरंतर पता चलता रहे कि कितने पौधे सुरक्षित हैं, कितने विकसित हो रहे हैं तथा जिन पौधों को क्षति पहुंची है, उनके स्थान पर समयबद्ध रूप से नए पौधे लगाए जा सकें।

जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, बढ़ती जनसंख्या और तीव्र विकास के कारण बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई हुई है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव आज पर्यावरण पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, वृक्षों की कमी के कारण प्रदूषण बढ़ा है, स्वच्छ ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हुआ है तथा पर्यावरण का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ा है इसलिए वर्तमान समय में वृक्षारोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित ’’एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माँ के सम्मान और प्रकृति के संरक्षण से जोड़ने का प्रेरक माध्यम है, माँ के नाम लगाया गया पौधा केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है।

पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा ने कहा कि यह केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है, आज लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र का इतिहास और भूगोल बदलने का कार्य करेगा। उन्होने कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज की भीषण गर्मी में लोग हाथों में उपलब्ध पर्चों से हवा कर रहे हैं लेकिन यदि आज लगाए जा रहे पौधों का संरक्षण किया गया तो 03-04 वर्ष बाद यही स्थान घने वृक्षों की छाया से आच्छादित होगा और न तो गर्मी से बचने के लिए अस्थायी उपायों की आवश्यकता होगी और नाहीं ऐसे आयोजनों के लिए बड़े टेंट लगाने पड़ेंगे, चारों ओर हरियाली का वातावरण स्वयं प्राकृतिक शीतलता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण मानव जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और वृक्षारोपण इसका सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होने कहा कि वर्तमान पीढ़ी जिन फलदार एवं छायादार वृक्षों का लाभ उठा रही है, वह पूर्वजों द्वारा लगाए गए थे, उसी प्रकार आज लगाए जा रहे पौधों का लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।

कार्यक्रम स्थल पर प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, पैक्सफेड के अध्यक्ष प्रेमसिंह शाक्य, पूर्व विधायक अशोक सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गोविंद भदौरिया, अनुजेश प्रताप सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों आदि ने ’’एक पेड़ मां के नाम’’ रोपित कर पर्यावरण का संदेश दिया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह, उप जिलाधिकारी सदर अभिषेक कुमार, क्षेत्राधिकारी नगर अशोक सिंह, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. शोभनाथ चौरसिया, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी राजेश बघेल, जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी राजनाथ राम, बाल विकास परियोजना अधिकारी हरिओम बाजपेई, उप क्षेत्रीय वनाधिकारी राजीव दीक्षित सहित संबंधित अधिकारियों के अलावा मंजूषा चौहान, डॉ. विमल पांडेय, अन्य पार्टी पदाधिकारी आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन नीरज दुबे ने किया।

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