.मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने स्व-गणना की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिला कार्यक्रम अधिकारी, आई.सी.डी.एस., उपायुक्त एन.आर.एल.एम. जिला पंचायत राज अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा स्व-गणना कार्य में रुचि नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि आज सायं तक प्रत्येक दशा में अपने-अपने विभाग से सम्बन्धित कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों, बाल विकास परियोजना अधिकारी, आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं, आशा, ए.एन.एम., ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत सचिव, सखी समूह, रोजगार सेवक आदि से स्व-गणना करना सुनिश्चित करें। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उपायुक्त एन.आर.एल.एम., पंचायती राज, बाल विकास, माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तीकरण, सैनिक कल्याण, डूडा, विद्युत, उद्योग, खाद्य एवं रसद, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन, युवा कल्याण, होमगार्ड्स, आयुर्वेदिक एवं यूनानी, तहसील करहल, किशनी में भी प्रगति बेहद निराशाजनक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि गांव-गांव कैंप लगवाकर स्व-गणना की प्रगति सुधारें यदि कल तक सुधार नहीं हुआ तो खराब प्रगति वाले विभाग के अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि जनगणना केंद्र-प्रदेश सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं पर है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही अक्षम्य होगी। उन्होने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बांट-माप, राजकीय पॉलीटेक्निक, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा, मंडी परिषद, सैनिक कल्याण द्वारा जिला मुख्यालय, ग्राम स्तर पर तैनात कार्मिकों, विभागीय योजनाओं के लाभार्थियों में से किसी की भी स्व-गणना नहीं करायी गयी है, दिव्यांगजन सशक्तीकरण द्वारा 14003 के सापेक्ष मात्र 06, समाज कल्याण विभाग द्वारा 95243 के सापेक्ष मात्र 47, परियोजना अधिकारी डूडा द्वारा 2661 के सापेक्ष मात्र 04, मनरेगा विभाग द्वारा 202576 के सापेक्ष 403, पंचायती राज विभाग द्वारा 297862 के सापेक्ष 657, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग द्वारा 109577 के सापेक्ष मात्र 598, जिला, ग्राम स्तरीय कर्मियों, योजना के लाभार्थियों एवं स्टेकहोल्डर्स की ही स्व-गणना करायी गयी है, जो सम्बन्धित अधिकारियों की उदासीनता का प्रतीक है। उन्होने कहा कि उपरोक्त अधिकारियों द्वारा स्व-गणना कार्य में रूचि नहीं ली जा रही है, जो अत्यन्त खेदजनक है। उन्होने निर्देशित करते हुए कहा कि कम, शून्य प्रगति के कारणों का उल्लेख करते हुए तत्काल कार्मिकों की स्व-गणना कराते हुए सूचना जनगणना सेल को उपलब्धत कराना सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी, प्रधानाचार्य राजकीय पॉलिटेक्निक, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान से कहा कि अपने-अपने नियंत्रणाधीन सभी विद्यालयों में कैंप लगाकर अधिक से अधिक स्व-गणना करायें। उन्होंने विद्यालय प्रबंधकों, प्रधानाध्यापकों से कहा कि जनपद के समस्त विद्यालयों में दि. 13, 14 एवं 15 मई को कैंपों का आयोजन कराकर शत-प्रतिशत पंजीकृत बच्चों के अभिभावकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराते हुए उनसे स्व-गणना करायें, छात्र-छात्राएं भी स्व-गणना कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, जो छात्र-छात्राएं 25 या उससे अधिक स्व-गणना कराकर एसई आई.डी. उपलब्ध कराएंगें, उन्हें जिलाधिकारी द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा साथ ही ऐसे विद्यालय जो स्व-गणना कार्य में बेहतर कार्य करेंगे, उन्हें भी समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने जन-सामान्य से अपील करते हुए कहा कि स्व-गणना प्रक्रिया से जुड़कर स्व-गणना कर राष्ट्रीय कार्यक्रम में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
श्री त्रिपाठी ने फॉर्मर रजिस्ट्री की समीक्षा के दौरान असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जनपद में फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति संतोषजनक नहीं है बावजूद इसके जिला कृषि अधिकारी द्वारा नियमित समीक्षा नहीं की जा रही है और नाहीं फॉर्मर रजिस्ट्री के कार्य में रुचि ली जा रही है। उन्होंने उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी सहित समस्त उप जिलाधिकारियों को आदेशित करते हुए कहा कि प्रतिदिन गांव-गांव कैंप आयोजित कराकर फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति सुधारें, फॉर्मर रजिस्ट्री में सबसे खराब प्रगति तहसील किशनी, भोगांव की है, गत् दिवस तहसील किशनी में मात्र 08, तहसील भोगांव में मात्र 22, तहसील कुरावली में 33, तहसील घिरोर में 56, तहसील करहल में 65 एवं तहसील सदर में 104 फॉर्मर रजिस्ट्री हुई है। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि प्रतिदिन प्रत्येक तहसील में कम से कम 250 फॉर्मर रजिस्ट्री की जाए ताकि फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति में सुधार हो सके।
इस दौरान अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनन्द, डिप्टी कलेक्टर ध्रुव शुक्ला, संध्या शर्मा, उप कृषि निदेशक नरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मयंक शर्मा, ई-डिस्ट्रिक मैनेजर सौरभ पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।



