मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने रु. 24.61 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन बहुद्देशीय हॉल, प्रेक्षागृह, सांस्कृतिक केंद्र एवं रू. 38 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन संग्रालय के कार्य का मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करते हुए कार्यदायी संस्था सी.एन.डी.एस. के सहायक परियोजना प्रबंधक को निर्देशित करते हुए कहा कि निर्माणाधीन कार्यों में गुणवत्ता, मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होने निरीक्षण के दौरान कार्यदायी संस्था के अभियंता से फॉल सीलिंग कार्य में प्रयुक्त जीआई शीट, रबर वॉशर एवं जीआई वॉशर की गुणवत्ता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक पॉइंट पर उच्च गुणवत्ता वाले रबर, जीआई वॉशर अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, जिससे भविष्य में पानी के रिसाव एवं सीपेज की समस्या उत्पन्न न हो। उन्होने कहा कि छोटे-छोटे ड्रिल होल से कुछ समय बाद पानी का रिसाव शुरू हो जाता है, जिससे पूरी फॉल सीलिंग प्रभावित होती है, निर्माण कार्य में एंटी-रस्ट कोटिंग अत्यंत महत्वपूर्ण है, बिना उचित एंटी-रस्ट ट्रीटमेंट एवं प्राइमर कोटिंग के लोहे की संरचनाओं में जंग लगने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे संपूर्ण संरचना की मजबूती प्रभावित हो सकती है इसलिए लोहे के गाटर, सपोर्ट एवं फिक्सिंग पार्ट्स को पूर्ण एंटी-रस्ट ट्रीटमेंट के बाद ही स्थापित किया जाए, जिन हिस्सों में वेल्डिंग हुई है, वहां विशेष रूप से दोबारा एंटी-रस्ट कोटिंग करायी जाए।

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श्री त्रिपाठी ने निरीक्षण में कुछ स्थानों पर टाई बार की असमान स्थिति एवं टेढ़े-मेढ़े एलाइनमेंट पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यदायी संस्था के अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी टाई बार की पुनः जांच कर आवश्यकतानुसार सुधार कराया जाए, टाई बार ही संपूर्ण भार को संतुलित एवं वितरित करने का कार्य करते हैं, इसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी भविष्य में गंभीर संरचनात्मक समस्या उत्पन्न कर सकती है। उन्होने निरीक्षण के दौरान कार्यदायी संस्था के अभियंता को आदेशित करते हुए कहा कि कार्य में केवल स्वीकृत एवं मानक गुणवत्ता की सामग्री का ही उपयोग किया जाए, किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता न हो। उन्होने कहा कि निर्माण कार्य केवल वर्तमान उपयोग को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि दीर्घकालिक स्थायित्व को ध्यान में रखते हुए किया जाए, सभागार में बैठने की क्षमता, दृश्यता को लेकर भी तकनीकी परीक्षण कराया जाये, अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति को भी स्टेज स्पष्ट रूप से दिखाई दे, कुर्सियां लगाकर वास्तविक स्थिति का परीक्षण कराया जाये यदि आवश्यक हो तो स्टेज की ऊंचाई, एलीवेशन में तकनीकी संशोधन कर दर्शकों के लिए बेहतर दृश्यता सुनिश्चित की जाए।

उन्होने कार्यदायी संस्था के अभियंता को निर्देश दिए कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मल्टीपर्पज उपयोग, वॉल पैनलिंग, ग्लास स्ट्रक्चर, पर्दा व्यवस्था एवं अन्य इंटीरियर कार्यों का समन्वित प्लान तैयार किया जाए, जिससे भवन उपयोगी, सुरक्षित एवं आकर्षक स्वरूप में विकसित हो सके। उन्होने कहा कि वीआईपी मूवमेंट एवं विशेष अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वीआईपी रूम, प्रवेश मार्ग एवं संबंधित सुविधाओं हेतु वीआईपी रूम के आसपास उपलब्ध अतिरिक्त स्थान का बेहतर उपयोग किया जाये, उक्त क्षेत्र में सुव्यवस्थित पेंट्री एवं वॉशिंग एरिया विकसित किया जाए, जिससे आगंतुकों एवं विशिष्ट अतिथियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें साथ ही ग्रीन रूम, कलाकारों के चेंजिंग रूम तथा सुरक्षा व्यवस्था को भी व्यवस्थित एवं कार्यात्मक बनाने के निर्देश दिए। उन्होने प्रेक्षागृह, बहुद्देशीय हॉल के निरीक्षण के दौरान पाया कि अनुबन्ध लागत् के सापेक्ष कार्यदायी संस्था को अब तक रू. 15 करोड़ अवमुक्त किया गया है, जिसके सापेक्ष अब तक रू. 14.50 करोड़ की धनराशि व्यय हो चुकी है, प्रस्तावित कार्य मुख्य भवन, ऑडिटोरियम एवं बहुद्देशीय हॉल का निर्माण कार्य प्रस्तावित है, जिसके अन्तर्गत 800 क्षमता का ऑडिटोरियम, साउण्ड सिस्टम, स्टेज लइटिंग, कर्टेन, स्टेप लाइटिंग, कार्पेट फ्लोरिंग, स्टेज पर बुडिंग फ्लोरिंग, जलापूर्ति, विद्युतीकरण एवं बहुद्देशीय हॉल सम्मिलित है, संग्रालय हेतु स्वीकृत रू. 38 करोड़ के सापेक्ष अब रू. 20 करोड़ अवमुक्त हो चुका है।

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. सत्येन्द्र सिंह, कार्यदायी संस्था के अभियंता आदि उपस्थित रहे।

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