मैनपुरी(सुवि) जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कलैक्ट्रेट सभागार में जनपद के अधिकारियों, कर्मचारियों को स्व-गणना के सम्बन्ध में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जनगणना किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास की आधारशिला होती है और यही वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से भविष्य की योजनाओं का निर्माण किया जाता है, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधार-भूत संरचना, प्रशासनिक इकाइयों के विस्तार, संसाधनों के वितरण तथा जन-प्रतिनिधित्व के निर्धारण जैसे सभी महत्वपूर्ण निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, किसी जनपद में कितने विद्यालय होने चाहिए, कितने मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता है, कितने प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित होंगे, कितने नए विकास खंडों का गठन होगा तथा जनसंख्या के अनुपात में निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किस प्रकार किया जाए, सभी विषय सीधे तौर पर जनगणना से प्राप्त आंकड़ों पर निर्भर करते हैं, इस दृष्टि से जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि विकास की दिशा तय करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया को इस बार 02 चरणों में संचालित किया जा रहा है, जिसमें पहला चरण भी दो उप-चरणों में विभाजित है, एक ओर पारंपरिक पद्धति के अंतर्गत 07 मई से 20 जून तक प्रगणक घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार से जानकारी एकत्र करेंगे वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक का उपयोग करते उक्त अवधि में स्व-गणना अर्थात सेल्फ एन्यूमरेशन का अवसर प्रदान किया गया है, यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल है, जिसमें नागरिक स्वयं अपने परिवार का विवरण ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर सकते हैं, ऑनलाइन माध्यम न केवल समय की बचत करेगा बल्कि आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करेगा।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि डिजिटल माध्यम से स्व-गणना की सुविधा जनगणना प्रक्रिया को अधिक सहभागी और सरल बनायेगी, नागरिक अपने घर बैठे ही कम्प्यूटर, मोबाइल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। उन्होने कहा कि डेस्कटॉप या लैपटॉप के माध्यम से स्व-गणना करना अधिक उपयुक्त है क्योंकि इसमें लोकेशन निर्धारण अधिक सटीक रूप से किया जा सकता है, मोबाइल के माध्यम से भी यह कार्य संभव है लेकिन उसमें स्थान की सटीक पहचान में कुछ सीमाएं हो सकती हैं इसलिए जहां संभव हो, वहां डेस्कटॉप आधारित प्रणाली का उपयोग करना बेहतर होगा। उन्होने कहा कि जनपद स्तर पर इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए एक सुविचारित रणनीति तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत सरकारी तंत्र से जुड़े सभी कर्मचारियों, मानदेय कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, अनुमान के अनुसार जनपद में लगभग 25 लाख की जनसंख्या है, जिसमें लगभग 05 से 5.5 लाख परिवार शामिल हैं यदि औसतन एक परिवार में 04 से 05 सदस्य माने जाएं, तो यह आंकड़ा और स्पष्ट हो जाता है कि जनगणना की प्रक्रिया कितनी व्यापक है। उन्होने कहा कि प्रशासनिक ऑकलन के अनुसार, सरकारी तंत्र और उससे जुड़े लाभार्थियों के माध्यम से लगभग 60 प्रतिशत परिवारों तक सीधी पहुंच संभव है, इसका अर्थ यह है कि लगभग 03 लाख परिवारों की स्व-गणना आसानी से कराई जा सकती है यदि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें, यह लक्ष्य न केवल व्यवहारिक है, बल्कि जनसहभागिता के माध्यम से इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होने कहा कि स्व-गणना की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए सबसे पहले विभागीय स्तर पर कार्य प्रारंभ किया जा रहा है, प्रत्येक विभागाध्यक्ष को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह अपने अधीन कार्यरत सभी कर्मचारियों की स्व-गणना सुनिश्चित करायें। उन्होने कहा कि यह अभियान केवल एक सीमित अवधि तक चलने वाला कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया के रूप में संचालित किया जाएगा, जिसमें 07 मई से 20 मई तक विशेष अभियान चलाया जाएगा, इस अवधि में अधिकतम परिवारों की स्व-गणना सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा ताकि बाद के चरण में प्रगणकों का कार्य भी सुगम हो सके यदि अधिक से अधिक लोग स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर देते हैं, तो घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने की आवश्यकता भी कम हो जाएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।
मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने कहा कि जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी, प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना होगी, जिसमें प्रत्येक भवन, आवासीय इकाई एवं उपलब्ध सुविधाओं का विवरण एकत्र किया जाएगा, इस चरण में घर-घर जाकर मकान की स्थिति, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, रसोई ईंधन, इंटरनेट सुविधा, मोबाइल, वाहन एवं अन्य परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी, यह चरण आगामी जनसंख्या गणना के लिए आधार तैयार करेगा। उन्होने बताया कि द्वितीय चरण में प्रत्येक परिवार के सदस्यों से संबंधित सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विवरण संकलित किए जाएंगे, जनगणना की संदर्भ तिथि 01 मार्च 2027 निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार सभी आंकड़े संकलित किए जाएंगे।
प्रशिक्षण में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मयंक शर्मा ने स्व-गणना के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी, इस दौरान जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, परियोजना निदेशक सत्येन्द्र सिंह, उप कृषि निदेशक नरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी शिवम यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी अवधेश सिंह, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी अरूण कुमार शुक्ला, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर सौरभ पाण्डेय, नाजिर रोहित दुबे सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी आदि उपस्थित रहे।



