मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने आई.जी.आर.एस., जन-सुनवाई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की विभागवार समीक्षा के दौरान कहा कि प्रशासन की वास्तविक पहचान जनता के बीच उसकी कार्यशैली, संवेदनशीलता और समस्या समाधान की गति से होती है यदि शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण नहीं होगा, तो जनता का विश्वास कमजोर होगा और प्रशासन की छवि भी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि भूमि विवादों के निस्तारण में आ रही जटिलताओं, वर्तमान प्रणाली अत्यधिक लंबी, कठिन होने के फलस्वरूप साधारण विवाद भी वर्षों तक लंबित रहता है, कई-कई मामलों में 10 से 15 वर्षों तक न्याय नहीं मिल पाता, जो न्याय के मूल सिद्धांत के विपरीत है, “न्याय में विलंब, न्याय से वंचित करने के समान है, इस समस्या के समाधान के लिए “मिशन समाधान” नामक एक अभिनव पहल को लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भूमि विवादों का त्वरित, पारदर्शी और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि “मिशन समाधान” अभियान 07 मई से प्रारम्भ किया जाएगा, जो प्रत्येक बृहस्पतिवार को आयोजित होगा। उन्होंने बैठक में उपस्थित उप जिलाधिकारियों, तहसीदारों को निर्देशित करते हुए कहा कि सुनिश्चित किया जाये कि अभियान के अंतर्गत प्रत्येक लेखपाल द्वारा अपने क्षेत्र में लंबित एवं बार-बार आने वाले विवादों का चिन्हांकन, चिन्हांकन में पक्ष-विपक्ष का नाम, विवाद का प्रकार, भूमि का विवरण सहित समस्त तैयरियां 01 सप्ताह में सूची एक्सेल फॉर्मेट में तैयार कर ग्रामवार, डिसेंडिंग ऑर्डर में प्रस्तुत की जाए ताकि जिन गांवों में अधिक विवाद हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जा सके। उन्होेंने कहा कि डेटा की सटीकता इस अभियान की सफलता की कुंजी होगी, अभियान के तहत संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी, जिनमें राजस्व निरीक्षक टीम लीडर होगा, उनके साथ 04-05 लेखपाल, एक उप निरीक्षक और 03-04 पुलिस कर्मी शामिल होंगे, जनपद में 24 टीमें एक साथ विभिन्न गांवों में जाकर कार्य करेंगी, टीमें गांव में जाकर दोनों पक्षों की उपस्थिति में मौके पर ही विवाद का समाधान करेगी, जिसमें सीमांकन, कब्जा दिलाना और अवैध कब्जा हटाना जैसे कार्य शामिल होंगे, समाधान के बाद स्पॉट मेमो तैयार किया जाएगा, जिसमें दोनों पक्षों के हस्ताक्षर, फोटोग्राफ और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल होगी यदि भविष्य में कोई पक्ष विवाद को पुनः उठाता है, तो तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराकर कानूनी कार्यवाही की जाएगी, जिससे दोबारा विवाद की संभावना समाप्त हो सके। उन्होने कहा कि इस मॉडल के माध्यम से मामलों का स्थायी समाधान होगा, सरकारी, सार्वजनिक भूमि भी अतिक्रमण से मुक्त कराई जा सकेगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान को तीन चरणों में संचालित किया जाएगा, प्रथम चरण में अधिक विवाद वाले गांवों का सामूहिक निस्तारण किया जाएगा, द्वितीय चरण में क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए छोटे समूहों में शेष विवादों का समाधान किया जाएगा, तृतीय चरण में ऐसे गांवों को “विवाद रहित गांव” घोषित किया जाएगा, जहां सभी प्रमुख समस्याओं का समाधान हो चुका होगा। “संवेदना पहल” के तहत उप जिलाधिकारियों, तहसीदारों को निर्देशित किया कि वह शोकग्रस्त परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त करें, जिन परिवारों में तेरहवीं या अन्य शोक कार्यक्रम होंगे, वहां प्रशासनिक अधिकारी सम्बन्धित लेखपाल उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि आई.जी.आर.एस. प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु “प्रोबेबिलिटी सिद्धांत” को अपनाया जाये, अतिरिक्त प्रयास कर संतुष्टि प्रतिशत बढाया जाये, प्रत्येक शिकायत के गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान को प्राथमिकता दें, क्षेत्र में नियमित रूप से किए जा रहे दुरुस्ती, विरासत, सीमांकन आदि कार्यो को भी आई.जी.आर.एस. प्रणाली में शामिल कर ट्रैक किया जाए, जिससे संतुष्टि प्रतिशत में वृद्धि हो और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके, इसके लिए एक नया फॉर्मेट तैयार कर सभी अधिकारियों को उपलब्ध कराया गया है, जिसका अनुपालन अनिवार्य होगा।

उन्होने फॉरवर्डिंग संस्कृति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शिकायतों को केवल “अग्रसारित” करना समस्या का समाधान नहीं है, प्रत्येक स्तर पर अधिकारी स्वयं तथ्यात्मक परीक्षण करें, अपना मंतव्य दर्ज करें और उसके बाद ही प्रकरण को आगे बढ़ाएं, लेखपाल की रिपोर्ट को अंतिम मानने की प्रवृत्ति समाप्त की जाए और राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार तथा तहसीलदार स्तर पर भी गहन परीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिम्मेदारी तय किए बिना कोई भी कार्य प्रभावी नहीं हो सकता, आई.जी.आर.एस. की गुणवत्ता सुधार के लिए प्रत्येक तहसील में एस.डी.एम. (न्यायिक) को नोडल अधिकारी नामित करते हुए नियमित रूप से शिकायतों की समीक्षा करने, रैंडम जांच, गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन औसतन 70 शिकायतें आती हैं, तो मासिक स्तर पर यह संख्या लगभग 2100 होती है, प्रत्येक लेखपाल के हिस्से में औसतन 10-12 शिकायतें ही आती हैं, ऐसे में कार्यभार अधिक होने का तर्क स्वीकार्य नहीं है।

इस दौरान अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनंद, अपर जिलाधिकारी न्यायिक राजेश चंद्र सहित समस्त उप जिलाधिकारी, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, कलैक्ट्रेट के विभिन्न अनुभाग प्रभारी आदि उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here