मैनपुरी(सुवि)भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी श्याम लता आनन्द, अपर जिलाधिकारी न्यायिक राजेश चन्द्र ने बाबा साहेब के चित्र का अनावरण कर माल्यार्पण, पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने भारतीय संविधान की महत्ता, उसके निर्माण की पृष्ठभूमि तथा स्वतंत्रता के बाद देश में आए सामाजिक, आर्थिक परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का संविधान केवल शासन संचालन का दस्तावेज नहीं बल्कि यह एक जीवंत संकल्प है, समानता-न्याय और बंधुत्व पर आधारित समाज के निर्माण की आधारशिला है। उन्होने कहा कि संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने विश्व के विभिन्न देशों के संविधानों का गहन अध्ययन कर उनकी श्रेष्ठ विशेषताओं को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप समाहित किया, उस समय भारत की सामाजिक संरचना अत्यंत जटिल थी, जहाँ जातिगत भेद-भाव और सामाजिक विषमता गहराई तक जमी हुई थी, उस दौर में समाज के बड़े वर्ग को समान अधिकार और अवसर प्राप्त नहीं थे, जिस कारण सामाजिक विभाजन और असंतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई देता था।

श्री सिंह ने कहा कि जिस प्रकार लगभग दो से ढाई सौ वर्ष पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका में नस्लीय भेद-भाव की स्थिति थी, वैसी ही स्थिति भारत में भी स्वतंत्रता से पूर्व देखने को मिलती थी, उस समय व्यक्ति का सामाजिक स्थान उसके जन्म से निर्धारित होता था और यह भेद-भाव बचपन से ही उसके जीवन को प्रभावित करता था, यहाँ तक कि बच्चों को भी यह एहसास कराया जाता था कि वह किस वर्ग या जाति में जन्मे हैं और उसी आधार पर उनके साथ व्यवहार किया जाता था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान के माध्यम से इस असमानता को समाप्त करने का ठोस प्रयास किया गया, पिछले 70-75 वर्षों की यात्रा में भारत ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, आज समाज में छुआ-छूत और जाति-आधारित भेद-भाव की घटनाएँ बहुत कम हो गई हैं और अधिकांशतः समाज ने समानता और सम्मान के मूल्यों को स्वीकार कर लिया है, यद्यपि कुछ दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं-कहीं ऐसी घटनाएँ देखने को मिल सकती हैं लेकिन व्यापक रूप से देश सामाजिक समरसता की दिशा में आगे बढ़ चुका है। उन्होने कहा कि सामाजिक समानता के साथ आर्थिक समानता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जब तक आर्थिक असमानता बनी रहेगी, तब तक पूर्ण सामाजिक समानता की स्थापना संभव नहीं है, जो व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम होता है, उसके प्रति समाज का व्यवहार स्वतः सम्मानजनक हो जाता है इसलिए आवश्यक है कि समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र-राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाएँ इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, इन योजनाओं का लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना है ताकि वह भी मुख्यधारा में शामिल हो सके।

उन्होंने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों से कहा कि संचालित योजनाओं का लाभ बिना भेद-भाव, बाधा के पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाने का कार्य करें, यही सच्ची श्रद्धांजलि उन महापुरुषों के प्रति होगी, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक रूप से जयंती मनाना या कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके विचारों, आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही वास्तविक सम्मान है।
अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनन्द ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके द्वारा दिया गया संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होने कहा कि बाबा साहब के प्रसिद्ध संदेश “शिक्षित बनो-संगठित हो और संघर्ष करो” का उल्लेख करते हुए कहा कि यही तीन सूत्र समाज के उत्थान का आधार हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति और समाज को आगे बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम है इसलिए हमें शिक्षा के प्रसार को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे अनेक प्रतिभाशाली लोग होते हैं जो संसाधनों की कमी या अन्य परिस्थितियों के कारण शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते, ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने स्तर से उनका सहयोग करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति किसी एक जरूरतमंद की शिक्षा में योगदान देता है, तो वह समाज में एक बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उन्होने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने केवल भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भेद-भाव के विरुद्ध आवाज उठाई, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए जीवन का हर क्षण समर्पित किया, उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और निरंतर समाज के उत्थान के लिए कार्य करते रहे।
अपर जिलाधिकारी न्यायिक राजेश चन्द ने कहा कि यह सर्वविदित है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन में कठिन संघर्षों का सामना किया, विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और देश के संविधान निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिनाइयाँ सफलता की राह में बाधा नहीं बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब हम किसी कार्य को करने का प्रयास करते हैं, तो अपनी कमियों, संसाधनों की कमी या अन्य समस्याओं का हवाला देकर उस कार्य को टाल देते हैं, यह प्रवृत्ति हमें आगे बढ़ने से रोकती है, इसके विपरीत हमें यह सोच विकसित करनी चाहिए कि उपलब्ध संसाधनों में रहकर हम किस प्रकार अधिकतम परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। उन्होने कहा कि सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के पास समाज के हर वर्ग के लोग अपनी समस्याएँ लेकर आते हैं, जिनमें सबसे कमजोर और वंचित वर्ग के लोग भी शामिल होते हैं, ऐसे में यह हमारी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है कि हम सुनिश्चित करें कि अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुँच सके। उन्होंने कहा कि “अंत्योदय” की अवधारणा अर्थात समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान ही डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों की मूल भावना से मेल खाती है यदि हम अपने कार्यों के माध्यम से सबसे कमजोर व्यक्ति को सशक्त बना पाते हैं, तो यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डिप्टी कलेक्टर धु्रव शुक्ला, शिव नरेश ए.आई. जी. निबन्धन पवित्र कुमार, कलेक्ट्रेट के लोकेंद्र सिंह आदि ने संविधान निर्माता डा. भीमराव अंबेडकर के जीवन-दर्शन पर अपने विचार व्यक्त किये। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी हरेन्द्र सिंह, रमेश तोमर, ई.-डिस्ट्रिक मैनेजर सौरभ पाण्डेय, रोहित दुबे, पुष्पेन्द्र कुमार, वीरेश पाठक, कालीचरन, ताज़ीम नवी, प्रदीप कुमार, अनुज कुमार, सुशील पाल, राहुल मिश्रा, राज कुमार, सुभाष चन्द्र, सत्येन्द्र सिंह, सुमित, प्रवीन, अजय यादव, राहुल कुमार, विनय यादव, ऋषि द्विवेदी, जितेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का सफल संचालन वेद प्रकाश श्रीवास्तसव ने किया।



