मैनपुरी(सुवि)विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश थीम पर आयोजित उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति पत्र, टूलकिट, आवास की चाबी, विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित करने के पश्चात उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश केवल भारत का एक राज्य नहीं बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव का केंद्र है। यह भूमि गंगा-यमुना की पुण्यधारा से सिंचित है, भारतीय संस्कृति का विश्व में शंखनाद करने वाला प्रदेश है। उन्होने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हम उस प्रदेश के वासी हैं, जहां भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि स्थित है। भगवान श्रीराम ने उत्तर से दक्षिण तक यात्रा कर पूरे भारत को एक सूत्र में बांधा और समाज के वनवासी, गिरिवासी, आदिवासी तथा वंचित वर्गों को संगठित कर शक्ति का निर्माण किया, रावण जैसी सबसे बड़ी शक्ति को परास्त कर यह संदेश दिया कि संगठित समाज दुनिया की किसी भी ताकत को पराजित कर सकता है, भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का मार्ग दिखाया, कुरुक्षेत्र के मैदान में उन्होंने अर्जुन को कर्म का महत्व समझाकर जीवन में संघर्ष और कर्तव्य का संदेश दिया, श्रीकृष्ण का यह उपदेश आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होने कहा कि भगवान शंकर का प्राकट्य केंद्र भी उत्तर प्रदेश है, भगवान शंकर ने पूरे भारत को ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों के माध्यम से एकता के सूत्र में बांधा। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश केवल धार्मिक भूमि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश सारनाथ में दिया और उन्होंने अंतिम सांस कुशीनगर में ली, जैन तीर्थंकरों की स्थली भी उत्तर प्रदेश है, यह प्रदेश ऋषि-मुनियों की तपस्थली रहा है, जहां भारद्वाज, वशिष्ठ, वाल्मीकि, विश्वामित्र, दुर्वासा, भृगु जैसे महान तपस्वियों ने साधना की, काशी विश्व की सबसे प्राचीन नगरी, नैमिषारण्य, शुक्रताल, प्रयागराज का संगम, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन जैसे असंख्य तीर्थ स्थल उत्तर प्रदेश को अद्वितीय पहचान प्रदान करते हैं, यह भूमि केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी केंद्र रही है। उन्होनेे कहा कि उत्तर प्रदेश साहित्य और संस्कृति की जननी है, महाभारत, रामायण, उपनिषद और रामचरितमानस जैसी महान रचनाओं का सृजन इसी धरती पर हुआ, भक्ति आंदोलन का उद्गम भी उत्तर प्रदेश मे ही हुआ, सूरदास, तुलसीदास, कबीर, रसखान जैसे संत कवियों ने प्रेम, भक्ति और सद्भाव का संदेश दिया, आधुनिक साहित्य में प्रेमचंद, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामचंद्र शुक्ल, राहुल सांकृत्यायन जैसे महान साहित्यकार उत्तर प्रदेश की देन हैं, काव्य जगत में जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, हरिवंश राय बच्चन जैसे कवियों ने प्रदेश को गौरवान्वित किया। उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम और क्रांति की भूमि भी है, महारानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद, मंगल पांडेय, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान जैसे वीरों ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी, यह प्रदेश राष्ट्रभक्ति, बलिदान और साहस का प्रतीक है, गंगा, यमुना, सरयू, गोमती, घाघरा, गंडक, रामगंगा, शारदा जैसी पवित्र नदियां यहां बहती हैं, इन नदियों का जल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति की पहचान है। उन्होने कहा कि ब्रज, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली, खड़ी बोली, संस्कृत और उर्दू जैसी भाषाओं की समृद्ध परंपरा यहां विकसित हुई, यहां के मेले और पर्व भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं, महाकुंभ, माघ मेला, नौचंदी मेला, गढ़मुक्तेश्वर मेला, बटेश्वर मेला जैसे आयोजन हमारी परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं।

श्री उपाध्याय ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, प्रदेश अब सुशासन, सुरक्षा-समृद्धि का मॉडल बन चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश 01 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ओडीओपी योजना ने प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान दी है, कृषि उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है, गेहूं, चावल, मक्का, दलहन और तिलहन सहित हर फसल में प्रदेश अव्वल है, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर देने में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में प्रदेश ने ऐतिहासिक प्रगति की है, सर्वाधिक एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी अभूत-पूर्व परिवर्तन हुआ है।उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जब जिले, गांव विकसित होंगे, तब प्रदेश विकसित होगा और प्रदेश विकसित होगा तो देश विकसित होगा, यदि उत्तर प्रदेश महान बनेगा, तो भारत भी महान बनेगा।

पूर्व मंत्री, विधायक भोगांव राम नरेश अग्निहोत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की आत्मा है, संस्कृति, धार्मिक धरोहर की दृष्टि से उत्तर प्रदेश सबसे श्रेष्ठ है, जलवायु की दृष्टि से अद्वितीय, सबसे अधिक अन्न उत्पादन करने वाला प्रदेश है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना से प्रत्येक जनपद के उत्पाद को नई पहचान दिलाने का कार्य किया, प्रदेश के जनपदों के उत्पादों को विश्व में पहचान दिलाने का कार्य किया साथ ही बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर हुआ, अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी प्रदेश ने लम्बी छलांग लगाई, वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश की पहचान बीमारू प्रदेश के रूप में थी, गुंडागर्दी प्रदेश में व्याप्त थी, अपराधियों का बोलबाला था लेकिन प्रदेश के मुखिया के नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज है। उन्होने कहा कि सरकारी विभागों के साथ-साथ नये उद्योगों, कल कारखानों में लाखों बेरोजगार नौजवानों को नौकरियां प्रदान करने का कार्य हुआ। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री का सपना वर्ष 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने का है, प्रधानमंत्री का यह सपना तभी साकार होगा जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे विकसित प्रदेश बनेगा। उन्होंने उपस्थित जन-सामान्य का आह्वान करते हुए कहा कि सभी मिलकर इस प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने में अपना योगदान दें।

जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आज हम सबके लिए गौरव की बात है, महाराष्ट्र का एक महान प्रदेश उत्तर प्रदेश है, आप सब सहमत होंगे कि भारत के इतिहास की बात करें तो इतिहास पर हम गर्व करते हैं, अपने इतिहास, अपनी गौरवशाली संस्कृति में तो हमें यह बातें करनी चाहिए कि इस इतिहास और संस्कृत का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से ही जुड़ा हुआ है, हमारे आराध्य श्री राम, श्री कृष्णा और विभिन्न ईश्वरीय अवतार उत्तर प्रदेश में हुये, महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली, महावीर जैन की तपोस्थली भी बहुत नजदीक है, किसी का भी इतिहास का कोई भी पन्ना उठा कर देख लीजिए, उत्तर प्रदेश के बिना अधूरा है, हमारी संस्कृति के विभिन्न रंग जो उत्तर प्रदेश में दिखाई देते है। उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश यदि एक देश होता तो जनसंख्या, भौगोलिक की दृष्टि से विश्व का पांचवा सबसे बड़ा देश होता। उन्होने कहा कि स्वतंन्त्रता आन्दोलन में जनपद का बड़ा योगदान रहा है, पांडव कालीन इतिहास से लेकर वर्तमान तक एक शानदार इतिहास रहा है, उत्तर प्रदेश हिमालय के बहुत नजदीक है, अगर उत्तराखंड अलग न हुआ होता तो हिमालय से लेकर गंगा-जमुना का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में समाहित था। उन्होने कहा कि एक जनपद-एक उत्पाद योजना ने जनपद के तारकशी उद्योग को प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश-विदेश मंे पहचान दिलाने का कार्य किया अब एक जनपद-एक व्यंजन के रूप में नारायण मिष्ठान भंडार की सोनपपड़ी को चुना गया है, जनपद की सोनपपड़ी को एक बार खा लेता है वह अन्य स्थान पर भी जाकर कोशिश करता है कि किसी तरह यहां की सोनपपड़ी उसको उपलब्ध हो जाए।

जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि 24 जनवरी 1950 को प्रदेश का नाम उत्तर प्रदेश हुआ, पूर्व में इस प्रदेश को अलग-अलग कई नामों से जाना जाता था। उन्होने कहा कि पूर्व की सरकारों ने प्रदेश की स्थापना दिवस पर कोई उत्सव, कार्यक्रम आयोजित नहीं किये, लेकिन वर्ष 2017 में प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक एवं यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने उ.प्र. दिवस मनाने का निर्णय लिया और जब से निरतंर 24 जनवरी को उ.प्र. दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना प्रदेश के प्रत्येक जनपद में नयी पहचान दिलाने का कार्य किया, प्रदेश के मुखिया ने उत्तर प्रदेश की स्थापना दिवस पर इस वर्ष एक जनपद- एक व्यंजन योजना के अन्तर्गत नारायण मिष्ठान भंडार की सोनपपड़ी को एक व्यंजन में शामिल किया है, जो जनपद के लिए गौरव की बात है।

इस दौरान पैक्सफेड के अध्यक्ष प्रेमसिंह शाक्य, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, पूर्व विधायक अशोक चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि गोविंद भदोरिया, पूर्व जिलाध्यक्ष राहुल चतुर्वेदी, ब्लॉक प्रमुख जागीर, बेवर मुनेष चौहान, भल्लू चौहान, विशाल बाल्मिक, उदय चौहान, भूपेंद्र यादव, मंजूषा चौहान, अनुजेश प्रताप सिंह यादव, विशंभर तिवारी, प्रदीप सिंह चौहान राज, सीमा चौहान, डॉ. विमल पांडेय, अनूप मिश्रा, कविता राठोर, विद्यालय की प्रबंधक सुमन चौहान सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों के अलावा पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, अपर जिलाधिकारी श्याम लता आनन्द, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.सी. गुप्ता, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. सत्येंद्र कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार, उपायुक्त उद्योग उत्कर्ष चन्द्र, जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ. अवधेश सिंह, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय डॉ. एस.पी. सिंह, अग्रणी जिला प्रबन्धक रामचन्द्र साहा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. सोमदत्त, जिला प्रोबेशन अधिकारी राजनाथ राम, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी राजेश बघेल, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी दीपिका गुप्ता, जिला पूर्ति अधिकारी रमन मिश्रा, स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी रविंद्र गौर आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का सफल संचालन बाल संरक्षण अधिकारी अल्का मिश्रा ने किया।