मैनपुरी(सुवि)मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने विकास खण्ड बरनाहल की ग्राम पंचायत बमटापुर में मत्स्य विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अन्तर्गत उप योजना मीठे जल में बॉयोफ्लाक तालाब निर्माण एवं ग्राम पंचायत निनौली के ग्राम मखिया में निर्माणाधीन लघु री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम का मौके पर जाकर निरीक्षण किया, सहायक निदेशक मत्स्य ने बताया कि उक्त योजना के अन्तर्गत परियोजना लागत 14.00 लाख का 60 प्रतिशत रु. 8.40 लाख अनुदान के रुप में लाभार्थी को दिया गया है, परियोजना की धनराषि के दो भाग है, जिसमें पहला भाग निर्माण से सम्बन्धित है, उक्त मद में तालाब का निर्माण, पॉलीलाईनर, ब्लोअर, जनरेटर, एवं भण्डार कक्ष व अन्य आधारभूत संरचना से सम्बन्धित अवयव हैं, द्वितीय भाग मे एक वर्ष हेतु निवेश, यथा पानी, मत्स्य बीज, मत्स्य आहार, दवायंे, मजदूरी आदि प्राविधानित हैं, यह परियोजना पंगेषियस मछली के लिए विषेश रुप से बनायी गयी है, मौके पर उपस्थित लाभार्थी के प्रतिनिधि निशान्त यादव ने बताया कि उक्त परियोजना में तालाब का क्षेत्रफल 1000 वर्ग मीटर है, जिसमें 24000 पंगेशियस मत्स्य अंगुलिकाओं का संचय किया गया है, उनके द्वारा बताया गया कि इस परियोजना मंे मत्स्य पालन हेतु पानी का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस 32 डिग्री सेल्सियस के मध्य रखना आवश्यक है, जिसको बनाये रखने के लिये ब्लोअर का प्रयोग किया जाता है, मछलियों हेतु ताजे पानी की आपूर्ति की जाती है, पानी से मिट्टी को अलग रखने के लिये पॉलीलाईनर का प्रयोग किया जाता है, जिसकी मोटाई 500 एम.एम. होती है। उक्त परियोजनार्न्तगत उत्पादित मछली का थोक बाजार मंे मूल्य लगभग रु. 150-160 प्रति किग्रा. प्राप्त हो रहा है, इस प्रकार प्रति वर्ष लगभग 04 से 05 लाख रु. की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है, मौके पर लाभार्थी को योजनान्तगर्त एवं बॉयोफ्लाक की अधिक से अधिक अपने स्तर पर विस्तार करने के लिए प्रेरित किया गया एवं प्रतिवर्ष नियमित रख-रखाव करने के हेतु निर्देशित किया गया।

सी.डी.ओ. ने लघु री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम के निरीक्षण के दौरान जानकारी करने पर पाया कि उक्त योजना के अन्तर्गत लाभार्थी द्वारा परियोजना लागत रू. 7.50 लाख का 60 प्रतिशत रु. 4.50 लाख अनुदान के रुप में लाभार्थी को दिया जाना है, परियोजना की धनराशि के दो भाग है, पहला निर्माण से सम्बन्धित है, जिसमंे टैंक का निमाणर््ा, भण्डार कक्ष, ब्लोअर, जनरेटर, व अन्य आधारभूत संरचना से सम्बन्धित है, द्वितीय भाग में एक वर्ष हेतु निवेष, यथा पानी, मत्स्य बीज, मत्स्य आहार, दवायें, मजदूरी आदि हेतु प्राविधानित है, यह परियोजना पंगेषियस मछली के विशेष रुप से बनायी गयी है, 09.00 मीटर व्यास वाले टैंक में आठ हजार पंगेशियस मत्स्य अंगुलिकाओं का संचय किया जा सकता है, मौके पर उपस्थित लाभार्थी जयदेवी ने बताया कि उक्त परियोजना मंे 9.00 मीटर व्यास का पक्का टैंक बनाया जा रहा है, जिसकी जल धारण क्षमता लगभग एक लाख लीटर है, उक्त परियोजनार्न्तगत उत्पादित मछली का थोक बाजार में मूल्य लगभग रु 150-160 प्रति किलोग्राम प्राप्त हो जाता है, इस प्रकार प्रति वर्ष लगभग 2.50 से 3.00 लाख रुपये
की शुद्ध आय प्राप्त होगी। उन्होने सहायक निदेशक मत्स्य को निर्देश दिये कि विभाग की संचालित योजनाओं का नियमित अनुश्रवण करें तथा लाभार्थी को योजना के सफल संचालन हेतु अपेक्षित सहयोग एवं समय-समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध करायें।
निरीक्षण के दौरान सहायक निदेशक मत्स्य धर्मराज चौहान, मत्स्य विकास अधिकारी धमनर््ेद्र्र कुमार, लाभार्थी जयदेवी, निशान्त यादव अन्य ग्रामवासी आदि उपस्थित रहे।



