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बैंकर्स जनहित में कार्य करें, शासन की जन-कल्याणकारी, लाभार्थीपरक योजनाओं में प्राथमिकता पर ऋण उपलब्ध कराएं- अंजनी कुमार।
मैनपुरी(सुवि)बैंकर्स मुख्यमंत्री युवा स्वःरोजगार योजना, एक जनपद-एक उत्पाद, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा आदि लाभार्थीपरक योजना में संबंन्धित विभागों द्वारा प्रेषित की गई पत्रावलियों को प्राथमिकता पर स्वीकृत कर ऋण-वितरण करें, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत भेजी गई पत्रावलियों पर सी.सी.एल. का लाभ मिले ताकि समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत, स्वावलंबी बन सकें। अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक, भारतीय स्टेट बैंक की ऋण जमानुपात की स्थिति निराशाजनक है, जिससे प्रतीत होता है कि उक्त बैंक धनराशि जमा करने में रुचि ले रहे हैं, लेकिन ऋण-वितरण में लापरवाही बरती जा रही है, संबंधित शाखा प्रबंधक ऋण-जमानुपात की स्थिति सुधारने के लिए तत्काल प्रभावी कार्यवाही करें।
उक्त निर्देश जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने जिला स्तरीय समीक्षा समिति, बैंकर्स की बैठक के दौरान देते हुये कहा कि प्रत्येक बैंक का ऋण-जमानुपात 60 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए लेकिन अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का सीडी रेशियो मात्र 40.02 प्रतिशत तथा भारतीय स्टेट बैंक का सीडी रेशियो मात्र 40.83 है, सम्बन्धित शाखा प्रबन्धक माह के अंत तक इसमें  सुधार करें। उन्होने बैंकर्स से कहा कि जनहित में कार्य करें, शासन की जन-कल्याणकारी, लाभार्थीपरक योजनाओं में प्राथमिकता पर ऋण उपलब्ध कराएं, ऋण-वितरण में बैंकर्स विलंब न करें, स्वीकृत पत्रावलियों पर तत्काल ऋण-वितरण किया जाए, बैंकर्स अपने यहां अकारण पत्रावलियों को लंबित न रखें यदि ऋण स्वीकृत न हो सके तो आख्या अंकित कर पत्रावली संबंधित विभाग को वापस भेजी जाए।
श्री सिंह ने समीक्षा के दौरान पाया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वार्षिक लक्ष्य 66 के सापेक्ष 140 पत्रावलियां प्रेषित की गयीं, जिसमें से 62 स्वीकृत कर 49 पर ऋण-वितरण किया गया, जबकि 17 पत्रावलियां स्वीकृत हेतु लंबित हैं, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के वार्षिक लक्ष्य 106 के सापेक्ष 234 पत्रावलियां प्रेषित की गयीं, जिसमें से 84 स्वीकृत कर 56 पर ऋण-वितरण किया गया, जबकि 81 पत्रावलियां स्वीकृत हेतु लंबित हैं, 65 पत्रावलियां बैंकों द्वारा वापस की गयीं हैं, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अन्तर्गत वार्षिक लक्ष्य 36 के सापेक्ष 60 पत्रावलियां बैंकों को प्रेषित की गयीं, जिसमें से 12 पत्रावलियां स्वीकृत कर 04 पर ऋण-वितरण किया गया, जबकि 44 पत्रावलियां स्वीकृत हेतु लंबित है। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा के दौरान पाया कि 3350 वार्षिक लक्ष्य सापेक्ष 3404 पत्रावलियां विभिन्न बैंकों को प्रेषित की गईं, जिनमें से 2695 को स्वीकृत कर 1779 पर ऋण वितरण किया जा चुका है, स्वीकृति के उपरांत भी अभी 161 पत्रावलियां सी.सी.एल. हेतु अवशेष हैं। उन्होंने अंसतोष व्यक्त करते हुये कहा कि फसली, कृषि ऋण, एम.एस.एम.ई., अन्य प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में यूनियन बैंक, बैंक ऑफ़ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ़ बड़ोदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्रा की प्रगति बेहद खराब है, सम्बन्धित शाखा प्रबन्धक प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में ऋण वितरण कर प्रगति सुधारें।
मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने बैंकर्स से कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में सी.सी.एल. की प्रगति ठीक नहीं हैं, सी.एम. डैशबोर्ड पर जनपद बी-श्रेणी में चल रहा है, बैंकर्स की हीला-हवाली के कारण समूह की महिलाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि योजना महिलाओं को सशक्त एवं स्वावलंबी बनाने के लिए संचालित हैं। उन्होने किसान क्रेडिट कार्ड की समीक्षा करने पर पाया कि व्यवसायिक बैंक द्वारा नवीनीकरण लक्ष्य 70725 के सापेक्ष 18890, नये के.सी.सी. के लक्ष्य 30687 केे सापेक्ष 15280 एवं सहकारी बैंक द्वारा नवीनीकरण लक्ष्य 4109 के सापेक्ष 6176, नये के.सी.सी. के लक्ष्य 3086 केे सापेक्ष 441 किसान क्रेडिट कार्ड बनाये गये हैं।
इस दौरान ए.डी.डी.एम. नाबार्ड मितेश कुमार, आर.बी.आई. से श्रवण कुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप, उपायुक्त उद्योग उत्कर्ष चंन्द्र, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी पवन यादव के अलावा विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक आदि उपस्थित रहे, बैठक का संचालन अग्रणी जिला प्रबंधक रामचंद्र साहा ने किया.