मैनपुरी (सूवि) जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने वृहद गौ-संरक्षण केंद्र गुराई घिरोर के औचक निरीक्षण के दौरान गौशाला में व्याप्त गंदगी, अव्यवस्थाओं पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ग्राम प्रधान को नोटिस जारी करने, सचिव, मौजूदा पशु चिकित्साधिकारी, खंड विकास अधिकारी को चेतावनी जारी करने, तत्कालीन पशु चिकित्साधिकारी के निलंबन की संस्तुति किए जाने के निर्देश देते हुए खंड विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को हिदायत देते हुये कहा ज्यादा संख्या में सफाई कर्मियों को लगाकर 01 सप्ताह में गौशाला परिसर की बेहतर ढंग से सफाई कराना सुनिश्चित करें, अगले 01 माह में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की जाएं, गौशाला प्रांगण में बर्मी कंपोस्ट तैयार कर गोबर से खाद बनाकर उसकी बिक्री की व्यवस्था की जाए, गौशाला में संरक्षित अधिकांश गाय दुधारू हों, सुनिश्चित किया जाए प्रतिदिन गोबर, दूध की उत्पादकता का विवरण रखा जाए। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए मौके पर उपस्थित पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि अगले 01 सप्ताह में संरक्षित नर गोवंश के बधियाकरण की कार्यवाही करना सुनिश्चित करें, गौशाला में नर-मादा गोवंशों को अलग-अलग रखा जाए।
श्री सिंह ने पशु चिकित्साधिकारी को आदेशित करते हुए कहा कि संरक्षित गांेवंशों के स्वास्थ्य का प्रतिदिन परीक्षण किया जाए, गौशाला में पर्याप्त मात्रा में गौवंश हेतु दवाई उपलब्ध रहें, पर्याप्त मात्रा में भूसा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये, गोवंशों को दोनों समय हरा चारा, भूसा पर्याप्त मात्रा में खिलाया जाए, गौशाला से सबद्ध चारागाह की भूमि पर हरे चारे की बुवाई कराकर संरक्षित गोवंशों को खिलाया जाये, चारा डालते समय की फोटो भी संरक्षित रखे जाए। उन्होंने कहा कि गौशाला में संरक्षित गांेवंशों की एल्बम बनाई जाए, एल्बम, सारा रिकॉर्ड गौशाला पर ही उपलब्ध रहे। उन्होंने जानकारी करने पर पाया कि गौशाला में 412 गोवंश संरक्षित है, जिसमें से 205 गाय, 194 नंदी एवं 13 बच्चे हैं, सभी संरक्षित पशुओं की ईयर टैगिंग हो चुकी है। उन्होने कहा कि संरक्षित गौवंशों को ठंड से बचाव हेतु मुकम्मल व्यवस्था की जाये, केयर टेकर गौ-आश्रय स्थल पर ही रात्रि विश्राम करें, सचिव, खंड विकास अधिकारी ने बताया कि केयर टेकर शिशुपाल, सुरेश द्वारा रात्रि में गौशाला में ड्यूटी की जा रही है। उन्होने कहा कि गौशाला को स्वावलंबी, आय के संशाधन बढ़ाये जाने के लिए गोबर से कंडे, अगरबत्ती आदि बनाकर बिक्री की जाए, वर्मी कंपोस्ट से खाद बनाकर बेची जाए, दुधारू गाय के दूध की बिक्री की जाए, विभिन्न स्रोतों से प्राप्त धनराशि का पूरा विवरण रखा जाए।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी घिरोर राजकुमार, खंड विकास अधिकारी घिरोर अवधेश यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सोमनाथ, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.एस. राजपूत, अनिल कुमार सक्सैना, सचिव नरेंद्र कुमार, ग्राम प्रधान अनोज कुमार आदि उपस्थित रहे।




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