चुनावी माहौल में इन दिनों हर जगह राजनीति की चर्चा चल रही है। ज्योतिष भी इससे दूर नहीं है। आजकल हर एक ज्योतिषी के पास राजनीति में भाग्य आजमाने वालों की भीड़ उमड़ रही है। तो जानते हैं कि राजनीति में सफलता किन्हें मिलती हैं।
कुंडली में 12 घर होते हैं और नौ ग्रह उनमे विराजमान होते हैं ए तब प्रश्न उठता है कि राजनीति के क्षेत्र में कौन से घर और कौन से ग्रह सफलता दिलाते हैंघ् सबसे पहले बात करते हैं ग्रहों की. एक तरफ जहां सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है तो मंगल को सेनापतिए बृहस्पति को मंत्री और सलाहकार माना गया है जबकि चन्द्रमा को राजमाता का दर्जा प्राप्त है। वहीं राहु को राजनीति का कारकए शनि को सेवा और जनता का कारक माना गया है। बुध ग्रह व्यक्ति को अच्छा वक्ता बनाता है। ऊपर बताए गए जितने ग्रहों का सम्बन्ध लग्नेश चतुर्थेश दशमेश से होगा राजनीति के क्षेत्र में सफलता की संभावनाएं उतनी ही बढ़ जाती हैं।
कुंडली के पहले भाव या घर को लग्न भाव कहा जाता हैए मजबूत लग्न भाव भी राजनीति के क्षेत्र में सफलता दिला देता है। जैसे मेष और कर्क लग्न की कुंडली में सूर्य शनि राहु और मंगल की स्थिति अच्छी हो तो राजनीति में सफलता मिल सकती है। भारतीय राजनीति में कर्क लग्न के व्यक्ति ज्यादा सफल होते दिखाई देते हैं एचाहे वो प्रधानमंत्री रहे हों या कोई और बड़े नेता। बृहस्पति कर्क में उच्च का होता है और गुरु मंगल की युति योगकारक हो जाती है। ये संयोग भी हो सकता है क्योंकि प्रत्येक लग्न के लिए स्थिति अलग अलग होती है।
राजनीति में सफलता के लिए पहलेए चौथे दसवें और ग्यारहवें घर की भूमिका ज्यादा होती है क्योंकि पहला घर खुद का व्यक्तित्व होता है तो चतुर्थ भाव जनता काए दसवां घर राज्य का और ग्यारहवां घर लाभ का और सामाजिक विस्तार का घर है। इसको ऐसे भी समझ सकते हैं . सूर्य राजा है यदि सूर्य खुद की या उच्च राशि में होकर केंद्र त्रिकोण आदि शुभ भावों में बैठा हो या मित्र राशि में शुभ भाव में हो या दसवें घर पर सूर्य की दृष्टि हो तो राजनीति में सफलता मिल सकती है।
चतुर्थ भाव जनता का भाव है इसलिए अगर चतुर्थेश चौथे घर में हो या उस पर दृष्टि हो। शनि उच्च का होकर केंद्र या त्रिकोण में हो या बृहस्पति बलवान होकर लग्न में बैठा हो या दशमेश और चतुर्थेश का सम्बन्ध बन रहा हो तो राजनीतिक जीवन में सफलता मिल सकती है। इसी तरह सूर्य और बृहस्पति या चन्द्रमा और बृहस्पति का योग बन रहा हो तो भी राजनैतिक सफलता दिला सकता है। राजनीति में सफलता के लिए कुछ विशेष योग जरूर होते हैं जैसे लग्नेशए चतुर्थेशए दशमेश का केंद्र या त्रिकोण में होना इसी तरह सूर्य चंद्र गुरु राहु शनि का इनसे सम्बंधित होना।
छठे घर को सेवा का घर कहते हैं। कुंडली में राहू का संबंध छठेए सातवेंए दसवें या ग्यारहवें घर से हो तो व्यक्ति का रुझान राजनीति में देखा गया है।
यदि छठे घर का संबंध चतुर्थेश या दशमेश से होता है तो व्यक्ति जनता की सेवा करता है और राजनीति में सफलता पा सकता है। जनता का समर्थन मिलता है। वहीं दूसरा घर धन और वाणी का भाव है यहां अगर गुरु बुध सूर्य हों और छठे घर में मंगल हो तो भी व्यक्ति राजनीति में सफलता पा सकता है। बारहवें घर का राहु और छठे घर का केतु भी बहुत सहायक बन सकता है। दशमेश और सप्तमेश का सम्बन्ध भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आचार्य अंकित;-विनायक फीचर्स



