मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने द्वितीय चरण की जनगणना के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में उपस्थित चार्ज अधिकारियों, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से कहा कि जन-गणना किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास, भविष्य की नीतियों और जन-कल्याणकारी योजनाओं के निर्धारण का आधार होती है। उन्होंने अवगत कराया कि जन-गणना 2027 के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण का कार्य संपन्न किया गया था, जिसमें मुख्य ध्यान इस बात पर था कि कोई भी मकान अथवा हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एच.एल.बी.) गणना से न छूटे, प्रथम चरण में भवनों की भौतिक स्थिति और वहां रहने वाले परिवारों की एक प्रारंभिक गणना की गई थी, अब दूसरा चरण प्रारंभ होने जा रहा है, जो अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है क्योंकि इस चरण में वास्तविक जनसंख्या की गणना होगी इसके अंतर्गत परिवार के प्रत्येक सदस्यों की व्यक्तिगत गणना के साथ-साथ उसकी जाति से संबंधित जानकारी भी विधिवत दर्ज की जाएगी। उन्होने बताया कि द्वितीय चरण की प्रश्नावली में कुल 40 प्रश्न सम्मिलित किए गए हैं, इन 40 बिंदुओं वाली प्रश्नावली को सभी चार्ज अधिकारी, शिक्षक भली-भांति समझ लें ताकि वह छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को सहजता से समझा सकें, प्रशासन की ओर से अधिकृत डिजिटल समूहों में इस संपूर्ण प्रश्नावली और उससे संबंधित पी.पी.टी. को साझा किया जाएगा, जिन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, जहां शिक्षक बच्चों को इन सभी 40 प्रश्नों के विषय में प्रशिक्षित किया जाये, जिससे स्व-गणना की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर त्रुटि की संभावना न रहे।

श्री त्रिपाठी ने स्व-गणना की समय-सारिणी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 16 नवम्बर से 30 नवम्बर 2026 तक की अवधि स्व-गणना हेतु निर्धारित की गई है, जिसके दौरान कोई भी नागरिक ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल के माध्यम से स्वयं अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकता है इसके उपरांत दि. 01 दिसम्बर 2026 से दि. 04 जनवरी 2027 तक प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर फील्ड कार्य पूरा किया जाएगा। उन्होंने सभी अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि पिछली बार जनपद स्तर पर स्व-गणना का कार्य कुछ विलंब से प्रारंभ हो पाया था, जिसके कारण जनपद प्रदेश में 08-वें स्थान पर रहा था, इस बार सुनियोजित रणनीति, समयबद्धता और वैज्ञानिक कार्यप्रणाली अपनाते हुए जनपद को पूरे उ.प्र. में प्रथम स्थान पर लाना है।
जिलाधिकारी ने शिक्षा तंत्र को इस अभियान की सबसे प्रमुख कड़ी बताते हुए कहा कि विद्यालयों की पहुंच, सरकारी तंत्र की सामूहिक शक्ति को मिला दिया जाए तो जनपद के लगभग 80 से 90 प्रतिशत परिवारों तक सीधी पहुंच बनाई जा सकती है, इसमें शिक्षा विभाग के साथ-साथ पेंशन योजनाओं, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आवास योजना, आशा बहुओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, शिक्षा मित्रों, पंचायत सहायकों, रोजगार सेवकों और मनरेगा तंत्र का भी पूरा सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि जन-सम्पर्क को शत-प्रतिशत प्रभावी बनाने के लिए विद्यालयों को परिवार के मुख्य अभिभावक तक पहुंचना होगा, इसके लिए विद्यालयों में क्लस्टर आधारित अभिभावक-शिक्षक बैठकें की जायें, सभी कक्षाओं के अभिभावकों को एक ही दिन बुलाकर औपचारिकता पूरी करने के बजाय, कक्षाओं और छात्र संख्या के अनुपात में समूहों में विभाजित करके सप्ताह में दो से तीन दिन एक-एक घंटे के सत्र आयोजित किए जाएं। उन्होने छात्र-छात्राओं को स्वैच्छिक रूप से इस राष्ट्रीय दायित्व से जोड़ने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना की घोषणा करते हुए कहा कि जो छात्र-छात्राएं अपने परिवार की स्व-गणना सफलतापूर्वक पूर्ण कराएंगे, उन्हें आगामी परीक्षाओं में 05 अतिरिक्त ग्रेस अंक दिए जाएंगे, वहीं जो विद्यार्थी अपने परिवार के साथ-साथ आस-पड़ोस और रिश्तेदारों के परिवारों की भी स्व-गणना संपन्न कराएंगे, उन्हें कार्य के आधार पर 06-10 तक अतिरिक्त ग्रेस अंक प्रदान किए जाएंगे, उत्कृष्ट कार्य करने वाले छात्र-छात्राओं को जिला प्रशासन की ओर से उन्हें विशेष प्रशस्ति-पत्र देकर जन-गणना ग्राही के रूप में अलंकृत किया जायेगा।
उन्होने विद्यालयों में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान अनिवार्य रूप से 5 मिनट का समय जन-गणना विमर्श के लिए आरक्षित करने, प्रतिदिन किसी एक विद्यार्थी अथवा शिक्षक से जन-गणना के राष्ट्रीय उद्देश्यों और 40 प्रश्नों के प्रारूप पर अपने विचार प्रस्तुत किये जायें, इसके अतिरिक्त विद्यालयों में निबंध, रंगोली और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाये, आधुनिक संचार माध्यमों के उपयोग कर छात्र-छात्राएं स्व-गणना के पश्चात यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया माध्यमों पर अपने अनुभव साझा करते हुए छोटे-छोटे वीडियो और व्लॉग्स बनाए जाएं, दि. 13 नवम्बर को जनपद के सभी नगरीय, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभात फेरियां और जन-गणना रैलियां निकाली जाएं, यह रैलियां मुख्य सड़कों पर केवल खानापूर्ति के लिए न निकाली जाएं बल्कि प्रत्येक विद्यालय अपने निकटतम किसी मोहल्ले, वार्ड या ग्राम पंचायत को चिन्हित कर तख्तियों, नारों और पैम्पलेट्स के माध्यम से घर-घर जाकर जन-जागरूकता का संदेश दे।
मुख्य विकास अधिकारी सन्तोष बहादुर सिंह ने कहा कि स्व-गणना की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण घटक जनरेट होने वाली आई.डी. है, नागरिकों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म सबमिट करने के बाद मिलने वाली इस विशिष्ट आई-डी को सुरक्षित रखना अनिवार्य है क्योंकि केवल फॉर्म सम्बिट कर देने मात्र से प्रक्रिया पूर्ण नहीं मानी जाएगी, दि. 01 दिसम्बर से जब प्रगणक घर-घर सत्यापन के लिए पहुंचेंगे, तब नागरिकों को अपनी यही आई.डी. दिखानी होगी, इस आई.डी. में संबंधित स्थान की लोकेशन पूर्व से दर्ज होगी जिससे प्रगणक का कार्य सुगम और प्रमाणित होगा यदि नागरिक अपनी आई.डी. सुरक्षित नहीं रखते हैं, तो स्व-गणना का उद्देश्य प्रभावित होगा और प्रगणक को पुनः पूरी प्रक्रिया नए सिरे से दोहरानी पड़ेगी। उन्होंने विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को एक रजिस्टर बनाकर एस.ई. आई-डी अनिवार्य रूप से नोट करने हेतु निर्देशित करें।
बैठक में अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनंद, डिप्टी कलेक्टर अरविन्द कुमार सिंह, विकल्प, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी सूर्य प्रताप सिंह, जिला प्रभारी जनगणना शैल्जा त्रिवेदी सहित खंड शिक्षाधिकारी, राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य आदि उपस्थित रहे।



