मैनपुरी(सुवि)अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनन्द ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी विशेष मौसम बुलेटिन के अनुसार की खाड़ी में विकसित चक्रवाती तूफान अर्णब के प्रभाव से दि. 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के दौरान उ.प्र. के विभिन्न जनपदों में गरज-चमक, वज्रपात, तेज झोंकेदार हवाओं तथा बेमौसम वर्षा की संभवाना व्यक्त की गई है, कुछ क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा भी संभावित हैं, उक्त के दृष्टिगत कृषि विभाग द्वारा कृषकों, कृषि समितियों, कृषि उत्पादों के भंडारणकर्ताओं तथा सम्बन्धित अधिकारी कटाई एवं सुरक्षित भंडारण हेतु जिन कृषकों की खरीफ की फसलें, विशेषकर धान, दलहन एंव तिलहन की फसलें पककर तैयार हो चुकी है, वह मौसम की स्थिति एवं स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल कटाई कर उपज को सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर रखें, कटी हुई फसलों को खेतों, खलिहानों खुले स्थानों पर असुरक्षित में न छोड़े यदि तत्काल परिवहन संभव न हो, तिरपाल अथवा जलरोधी आवरण से ढककर सुरक्षित रखें, कटी हुई उपज को पर्याप्त वायु संचार वाले स्थान पर रखें, अनाज में नमी प्रवेश न करने दें, जिससे फफंूद लगने, दाने पड़ने, अंकुरण होने एवं गुणवत्ता खराब होने से बचाव हो सके,. जिन खेतों में फसल गिर गई है, वहां जल-भराव न होने दें तथा कटी हुई फसल के बड़लों को आवश्यकतानुसार बांधकर सुरक्षित करें। कृषि मंडियों एवं भंडारण केंद्रों हेतु मंडी समितियों के अधिकारी खुले में रखे अनाज एवं कृषि उपज को तत्काल सुरक्षित गोदामों अथवा ढके हुए स्थानों पर रखने की व्यवस्था करें, जिन स्थानों पर अनाज खुले में रखना अपरिहार्य हो, वहां पर्याप्त तिरपाल, जलरोधी शीट एवं ऊॅचें प्लेटफॉर्म की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, मंडियों में जल निकासी की व्यवस्था दुरूस्त रखी जाए तथा नालियों की सफाई कराई जाए, जिससे वर्षा का पानी अनाज के ढेरों, गोदामों एव आवागमन मार्गाें मे एकत्रित न हो।
उन्होने बताया कि आलू, सरसों एवं अन्य रबी फसलों की बुवाई सम्बन्ध में जो कृषक आलू की बुवाई कर रहे हैं अथवा करने जा रहे हैं वह प्रतिकूल मौसम के दौरान बुवाई स्थगित रखें, पहले से बोए गए खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें तथा क्यारियों में पानी जमा न होने दें, सरसों की बुवाई करनें वाले कृषक मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए बुवाई स्थगित रखें, मौसम बुलेटिन के कृषि परामर्श के अनुसार सरसों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह तक स्थगित रखने तथा खेत में अतिरिक्त नमी निकलने देने की सलाह दी गई है, खेतों में अनावश्यक सिंचाई न करें, वर्षा के बाद मिट्टी की स्थिति सामान्य एवं कृषि कार्यों के अनुकूल होने पर ही बुवाई और जुताई प्रारंभ करें, पशुधन सुरक्षा हेतु संभावित बेमौसम वर्षा, तेज हवाओं, गरज-चमक एवं वज्रपात से पशुधन की सुरक्षा के सम्बन्ध में पशुपालक अपने पशुओं को खुले खेतों, नदी-नालों के किनारे, जल-भराव वाले क्षेत्रों तथा असुरक्षित स्थानों पर न बांधे, पशुशाला में वर्षा के पानी की निकासी सुनिश्चित करें तथा फर्श को यथासंभव सूखा और फिसलन रहित रखें, पशुओं के लिए सूखा चारा, भूसा एवं पशु आहार सुरक्षित स्थान पर भंडारित करें, चारे को वर्षा से बचाएं तथा भीगा, सड़ा या फंफूदयुक्त चारा पशुओं को न खिलाएं, पशुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करायें, जलभराव अथवा गंदे पानी के स्त्रोत से पशुओं को पानी न पिलाए, गरज-चमक एवं वज्रपात के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे, खुले मैदान अथवा विद्युत खंभों और तारों के पास न रखें, पशुपालक मौसम सामान्य होने तक पशुओं को अनावश्यक रूप से दूर चराई के लिए न ले जाएं तथा स्थानीय मौसम की चेतावनियो को पालन करें।



