मैनपुरी(सुवि)राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण, जनपद के प्रभारी मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने विकास भवन में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की संचालित योजना विवाह पुरस्कार प्रोत्साहन, दुकान संचालन एवं निर्माण योजना के 05-05 लाभार्थियों, 25 लाभार्थियों को एम.आर. किट, 60 दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल, 05 लाभार्थियों को बैसाखी उपलब्ध कराते हुये कहा कि केंद्र-प्रदेश सरकार दिव्यांगजन सशक्तिकरण के प्रति समान रूप से संवेदनशील, प्रतिबद्ध हैं, दिव्यांगों के हितार्थ संचालित योजनाएं दिव्यांगों की जीवन यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की सत्ता संभालने के उपरांत दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए, विकलांग शब्द का प्रयोग करने से हमारे दिव्यांगजनों में हीन भावना उत्पन्न होती थी लेकिन प्रधानमंत्री ने ‘विकलांग’ शब्द को शासन-प्रशासन के प्रचलन से हटाकर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग आरम्भ कराया, यह केवल शब्द परिवर्तन नहीं था बल्कि यह समाज की मानसिकता, दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास था, ‘दिव्यांग’ शब्द दिव्यता, विशेष क्षमता और ईश्वर प्रदत्त शक्ति का प्रतीक है, इस शब्द के माध्यम से दिव्यांगजन आज सम्मान, आत्मविश्वास और सशक्तिकरण का अनुभव कर रहे हैं।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि दिव्यांग भाई-बहन किसी भी प्रकार से सामान्य व्यक्तियों से कम नहीं हैं, ईश्वर ने उन्हें विशिष्ट क्षमताओं से संपन्न बनाया है, जिसके आधार पर वह जीवन में उच्चतम सफलताएँ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण स्वरूप कहा कि जगतगुरु रामभद्राचार्य जो 02 वर्ष की आयु में दृष्टिबाधित हो गए थे, उन्होने अपने जीवन में 18 भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया, 220 से अधिक ग्रंथों की रचना की और भारत का पहला निजी दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया, लगभग रू. 500 करोड़ की अनुमानित संपत्ति उन्होने प्रदेश सरकार को निःशुल्क समर्पित की ताकि दिव्यांगजन शिक्षा और सशक्तिकरण का यह महान कार्य आगे भी निरंतर चलता रहे। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दिव्यांगजन कल्याण के लिए अभूतपूर्व पहल की गई, वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में दिव्यांगांे को केवल रू. 300 प्रतिमाह पेंशन मिलती थी, जिसे प्रदेश सरकार ने बढ़ाकर रू. 01 हजार प्रतिमाह करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी द्वारा दिव्यांगजन की सुविधा के लिए रू. 32.50 करोड़ की लागत से 08 लाख 08 हजार दिव्यांगजनांे को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई, जिससे उन्हें रोजगार, शिक्षा और दैनिक जीवन की गतिविधियों में बड़ी राहत मिली है, दिव्यांगों हेतु दुकान संचालन के लिए रू. 10 हजार तथा दुकान निर्माण हेतु रू. 20 हजार की सहायता प्रदान की जा रही है ताकि दिव्यांगजन स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें, विवाह पुरस्कार योजना के अंतर्गत दंपति दिव्यांग होने की दशा में रू. 35 हजार का अनुदान प्रदान किया जा रहा है ताकि उनके वैवाहिक जीवन की शुरुआत मजबूत, सम्मानजनक बन सके, दिव्यांग बच्चों हेतु 03 से 07 वर्ष की आयु तक बचपन डे केयर सेंटर की व्यवस्था की गई है, जिसमें पढ़ाई, भोजन, आवागमन, देखभाल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का संपूर्ण खर्च विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।

जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि मानव सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं, नर सेवा ही नारायण सेवा है। उन्होने कहा कि शारीरिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य प्रदेश में तेजी हो रहा है। उन्होने कहा कि दिव्यांगजन समाज का अहम हिस्सा है, उन्हें समाज में सम्मान से जीने का अधिकार है, उन्हें उपेक्षा महसूस न हो इसके लिए केंद्र-प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु योजनाएं संचालित की हैं, योजनाओं का लाभ पाकर आज दिव्यांग सम्मान के साथ जीवन-यापन कर रहे हैं, प्रत्येक योजना में दिव्यांगजनों के लिए व्यवस्था की है, चिन्हित दिव्यांगजनों को शासन की संचालित जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने में वरीयता दी जा रही है।

इस दौरान पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा, मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, क्षेत्राधिकारी नगर संतोष कुमार, परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. सत्येंद्र कुमार, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी राजेश बघेल सहित बड़ी संख्या में दिव्यांग लाभार्थी आदि उपस्थित रहे।

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