मैनपुरी(सुवि)सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम निर्यात प्रोत्साहन विभाग के तत्वाधान में आर्य समाज मंदिर में आयोजित 10 दिवसीय उ.प्र. ट्रेड शो स्वदेशी मेला-2025 का शुभारंभ करते हुए सदस्य विधान परिषद संतोष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नारा दिया है लोकल-फॉर-वोकल पर शहर, गांव, क्षेत्र, जिले में जो चीज बनती है उनके प्रति हम चर्चा करें, उनके बारे में लोगों को जागरूक करें। उन्होने कहा कि अतीत में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, जिस ब्रिटेन और फ्रांस का राज दुनिया के तमाम देशों पर था, उनके साम्राज्य का सूरज कभी अस्त नहीं होता था, उन्होंने समुद्री बेड़ों के माध्यम से अपने साम्राज्य को बढ़ाया लेकिन मौर्या डायलेस्टी, गुप्ता डायलेस्टी के अंदर ही 03 सदी ईसा पूर्व और 03 सदी ईसा बाद हमारे समुद्री बेड़े हुआ करते थे, जिसके माध्यम से हमारा व्यापार तमाम अन्य देशों में हुआ करता था, हम इलायची, लौंग, तमाम भारतीय मसाले, भारतीय उत्पाद, बंगाल का मलमल पूरी दुनिया में जहां भी हमारी पहुंच थी, समुद्री बेड़ों के माध्यम से निर्यात भी करते थे इसलिए भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, लेकिन बाद के कालखंड में कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई कि 01 हजार साल तक हम पराभूत रहे, हमारे स्वदेशी लोगों ने किसी तरह लड़ाई तो लड़ी लेकिन पूरी तरह से कभी कब्जा नहीं हो पाया लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद हमारा देश गुलाम रहा, लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद भारत को जिस दिशा में सरकारों को बढ़ाना चाहिए था, उस दिशा में तेजी से कार्य नहीं हुआ, आजादी से पूर्व भारत में कुटीर उद्योग घर-घर में छाये हुये थे, गांव कुटीर उद्योगों के सबसे बडे उत्पादक केन्द्र थे लेकिन देश के कुटीर उद्योगों को नष्ट कर दिया, जो कपड़ा हम बनाते थे वह ब्रिटेन की कपड़ा फैक्ट्रीयों में बनने लगा जिस कारण देश का कपड़ा उद्योग नष्ट हुआ।

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सदस्य विधान परिषद ने कहा कि वर्ष 2014 में यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश की बागडोर संभालते ही स्वदेशी को बढ़ावा देने का कार्य किया, विशेष रूप से जब दुनिया में 02 वर्षों तक कोरोना कालखंड से गुजर रही थी, दुनियां की अर्थव्यवस्था, निजी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से बिगड़ रही थी, कई देशों की अर्थव्यवस्था भी ठप हो गयी, उस समय प्रधानमंत्री जी ने लोकल-फॉर-वोकल और आत्मनिर्भर भारत की घोषणा की, भारत तेजी से आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ा, आज तमाम चीजें देश में बन रही हैं, उन्होने मेड इन इण्डिया के साथ मेक इन इण्डिया को भी लागू करने का कार्य किया। उन्होने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत प्रधानमंत्री जी ने दुनिया के लोगों को आमंत्रित किया, मेक इन इण्डिया के तहत उनके उत्पादों का उत्पादन भारत में करें, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग का बाजार है, जो दुनिया की बड़ी कंपनियों, विश्व के देशों को आकर्षित करता है, लेकिन आप केवल अपनी चीजों को ही नहीं बनाएंगे बल्कि टेक्नोलॉजी भी हम लेने का काम करेंगे, भारत में सर्वाधिक मोबाइल बनाये जा रहे है, सबसे ज्यादा मोबाइल उ.प्र. के नोएडा जिले में बन रहे हैं। उन्होने कहा कि देश में माइक्रो चिप की समस्या रहती थी, लेकिन अब माइक्रो चिप के उत्पादन में भी भारत समर्थ हुआ है। उन्होने कहा कि ए.आई. की तरफ दुनियां बढ़ रही है, ए.आई. के क्षेत्र में भारत ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं, लखनऊ सहित अन्य शहर दुनिया में ए.आई. के क्षेत्र में भविष्य में पहचान स्थापित करने वाले है।

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उन्होने कहा कि अभी हाल ही में ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान स्वदेशी हथियारों के दम पर पाकिस्तान के 09 आतंकी अड्डों, 11 वायु सैनिक अड्डों को ध्वस्त करने का कार्य किया, जब पाकिस्तान ने चाईना में बनी ड्रोन, मिसाइल से आक्रमण करने का प्रयास किया तो हमारी रक्षा कवच प्रणाली ने सुदर्शन चक्र का नाम देकर सभी हमले नाकाम कर दिये, उनको आसमान में ही उड़ने का काम किया। उन्होने कहा कि आज हमारे देश में तेजस का निर्माण हो रहा है, उन्नत किस्म के हैलीकॉप्टर, गन भी बन रहे हैं। उन्होने कहा कि हम अन्य देशों से आयात के साथ उनकी टैक्निक को भी खरीदेंगे और स्वदेश में उसका निर्माण कर शोध को बढ़ावा देकर और विस्तार देने का कार्य करेंगे। उन्होने आव्हान करते हुये कहा कि सभी लोग अपने घर, नगर, गांव, कस्बे के आस-पास बनी चीजों, देश में बनी हुई वस्तुओं, भारतीय उत्पादों को बढ़ावा दें क्यांेकि हमारे देश के उपभोक्ता बाजार की ताकत दुनियां में आज सबसे ज्यादा है।

जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि स्वदेशी मेले का मुख्य उद्देश्य जनपद के उत्पादों को बढ़ावा देना है, एक जनपद-एक उत्पाद योजना के तहत प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जनपद के परपंरागत उत्पादों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया, हर जनपद में ऐसा कोई न कोई उत्पाद, कारीगर हैं जो उस जिले को विशिष्ट बनाते हैं, जनपद का तारकशी उद्योग को प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन से विशिष्ट पहचान मिली। उन्होने कहा कि ऐसे कारीगर जो गांव में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, उनके उत्पादों को बाजार मिले, उनकी कारीगरी, योग्यता को शहर के लोग देखें, सराहें और उनके उत्पाद को उचित मूल्य पर खरीदें, ऐसा अवसर प्रदान करने के लिए राज्य सरकार के निर्देशन पर स्वदेशी मेले का आयोजन किया गया है। उन्होने कहा कि शिक्षित युवा नौकरी पाने के लिए नहीं बल्कि अन्य लोगों को रोजगार देने वाले बनें, यह तभी संभव होगा जब स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करके स्थानीय उत्पादों से प्रेरणा ग्रहण करके आगे बढ़ेंगे, स्थानीय उत्पादन किसी जगह के विशिष्ट उत्पाद क्यों होते हैं, क्योंकि वहां पर उसी उत्पादन के लिए कच्चा माल, परिस्थितियां और कारीगर उपलब्ध रहते हैं, ऐसे कारीगर अपनी कलाकृति के कौशल को पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित करते रहते हैं, यदि इस कला को प्रोत्साहन न दिया जाए, हम इस कला के उत्पाद को न खरीदें, तो धीरे-धीरे यह कला दम तोड़ देगी। उन्होने कहा कि उ.प्र. को वर्ष 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने, देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आवश्यक है, हम अपने परम्परागत कारीगरों के उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार उपलब्ध करायें, स्वदेशी उत्पादकों की खरीदारी को बढ़ावा दें। उन्होने कहा कि केवल आधुनिकता से विकसित प्रदेश नहीं बन सकता, जो समाज अपनी पुरातन परंपरा को छोड़ता है, वह कहीं न कहीं विकास की अंधी दौड़ में विलुप्त हो जाती है, हमें विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति, अपनी परंपरा का भी सम्मान करना होगा।

जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने कहा कि स्वदेशी मेले के आयोजन से स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने लोकल-फॉर-वोकल का नारा देकर स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया ताकि देश के कामगारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि स्वदेशी मेले में जनपद की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा उत्पादित सामान की खरीदारी अवश्य करें।

मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने सभी आगतुंकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वदेशी मेले से जनपद के निर्मित उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा जिससे यहां के उद्यमियों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। उन्होने कहा कि सिर्फ स्वदेशी बोलना ही नहीं है बल्कि स्वदेशी को अपनाना भी है, तभी हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था में सुधार होगा। स्वदेशी मेले में स्वयं सहायता समूह द्वारा उत्पादित सामिग्री, कृषि विभाग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, कलाकृति आर्ट, बाल विकास एवं पुष्टाहार, सीएम युवा आदि योजनाओं, विभागों के स्टॉल लगाये गये, स्वदेशी मेला दि. 18 अक्टूबर तक संचालित रहेगा।

इस दौरान अध्यक्ष पैक्सफेड प्रेम सिंह शाक्य, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष राहुल चतुर्वेदी, प्रदीप चौहान, ब्लॉक प्रमुख जागीर मुनेष चौहान, अनुराग पांडेय, अनुजेश प्रताप सिंह, संतोष सिंह चौहान, यतेंद्र जैन, भूपेंद्र यादव, डॉ. विमल पांडेय, प्रदीप चौहान राज, प्रदीप तिवारी, शेर सिंह भदोरिया, राहुल राठौर, उत्तम गुप्ता, ज्ञानेंद्र चौहान, कविता राठौर, श्याम मोहन चौहान, पंकज भदौरिया, मंजूषा चौहान, साधना गुप्ता, सीमा चौहान सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों के अलावा क्षेत्राधिकारी करहल अजय पाल सिंह, परियोजना निदेशक सत्येन्द्र कुमार, ग्रामोद्योग अधिकारी पवन यादव आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन उपायुक्त उद्योग उत्कर्ष चन्द्र ने किया।