मैनपुरी(सुवि)जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कलैक्ट्रेट में तिरंगा फहराकर दोनों महापुरुषों के चित्रों का अनावरण, पुष्प अर्पित कर गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आज तकनीक का सुखद परिणाम है कि हम जो भी पढ़ना चाहते हैं, वह जानकारी हमें तुरंत मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रायः यह देखा जा रहा है कि हम में से कुछ लोग थोड़ा सा ज्ञान प्राप्त करने के बाद निर्णायक की भूमिका में आ जाते हैं और तत्काल किसी भी प्रकरण, व्यक्ति के बारे में निर्णय देने लगते हैं। उन्होंने कहा की पूर्णतया एक ऐसा शब्द है, जिसे कभी भी प्राप्त नहीं किया जा सकता, दर्शन, धर्म, एक और एक शून्य होने की बात करते हैं, वह भी जानते हैं कि इसकी पूर्णतया को प्राप्त करना असंभव है, थोड़े से ज्ञान पर निर्णायक की भूमिका निभाने का चलन आजकल तेजी से बढ़ रहा है, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में भी सोशल मीडिया पर विगत् कुछ वर्षों से लोग अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं, विचार व्यक्त करना गलत नहीं लेकिन विचार व्यक्त करने से पहले व्यक्ति को महापुरुषों के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति कसौटी को मापने का सबसे बेहतर मापदंड अपने आपको उन परिस्थितियों में रखकर विचार करना है, तत्काल किसी बात पर निर्णय देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विगत् कुछ समय से महापुरुषों के विरुद्ध इस पर टिप्पणी करने का प्रचलन बढ़ा है, जो समाज के लिए किसी भी दशा में ठीक नहीं है।

IMG 20251002 WA0007

श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य-अहिंसा का मार्ग चुन हमें अंग्रेजों के महान साम्राज्य से आजादी दिलाई, स्वतंत्रता आंदोलन से पूर्व और आजादी के बाद कोई भी लड़ाई सत्य-अहिंसा के बल पर नहीं लड़ी गई, सत्य-अहिंसा का मार्ग सिर्फ गांधी जी ने अपनाया, गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका के प्रवास के दौरान सत्य-अहिंसा पर चलकर देश को आजाद कराने का प्रण लिया, हमें ऐसे वीर-बलिदानियों के त्याग को भी नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने देश को आजाद करने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दी, स्वतंत्रता आंदोलन में मैनपुरी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि सत्य-अहिंसा, सत्याग्रह लोगों को एकत्र करने का सबसे बेहतर रास्ता था, जो गांधी जी ने अपनाया। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने असहयोग आंदोलन तमाम विरोधों के बावजूद इसलिए वापस लिया कि वह आंदोलन अपने रास्ते से भटक रहा था, इसके बाद नमक आंदोलन, दांडी यात्रा जैसे आंदोलन चलाये इससे पहले इस प्रकार के आंदोलन विश्व में कहीं भी नहीं देखे गए थे। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सबसे सम्मान से देखे जाने वाला यदि कोई व्यक्ति है तो वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी है, जिन्हें आज भी पूरा विश्व सम्मान की दृष्टि से देखता है, अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे वैज्ञानिक ने कहा था कि आगे आने वाली पीढियांे को विश्वास नहीं होगा की हाड़-मास के ऐसे मानव ने भी कभी पृथ्वी पर जन्म लिया था, जिसने सत्य-अहिंसा के बल पर चलकर अंग्रेजी साम्राज्य को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया, अल्बर्ट आइंस्टीन जैसा बुद्धिमान व्यक्ति यदि राष्ट्रपिता के प्रति ऐसा भाव रखता है, तो हमारे बीच के कुछ लोग राष्ट्रपिता पर ऐसी टिप्पणी कैसे कर सकते है।

IMG 20251002 WA0008

जिलाधिकारी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हमारा देश समर्थ नहीं था हम तेजी से विकास कर रहे थे, उस समय अमेरिका ऐसे देश को अनाज देता था, जो खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं था, अमेरिका से गेहूं भारत आता था लेकिन जब पाकिस्तान से युद्ध छिड़ा तो अमेरिका ने गेहूं न भेजने की धमकी दी लेकिन हिमालय जैसी दृढ़ता रखने वाले लाल बहादुर शास्त्री दबाव, धमकी के आगे झुके नहीं। उन्होने देशवासियों से एक समय उपवास रखने का आह्वान किया और देशवासियों ने उनके आह्वान पर उपवास रखे ताकि अमेरिका पर खाद्यान्न की आत्मनिर्भरता कम हो। उन्होने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 02 साल से कम कार्यकाल में देश को रक्षा, खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया, उन्होंने जय जवान-जय किसान का नारा दिया, देश में हरित क्रांति आयी, हरित क्रांति के उपरांत बढ़ती हुई आबादी के बावजूद आज हम खाद्यान्न के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं साथ ही हम खाद्यान्न का निर्यात भी कर रहे हैं। उन्होंने सभी का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसी महान विभूतियों के बारे में टिप्पणी करने वालों का तार्किक विरोध करें, महापुरुषों के बारे में अधिक से अधिक पढ़ें, उनके बारे में जानकारी करें, स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के बारे में बच्चों को अवश्य बताएं ताकि उन्हें भी देश के गौरवमयी स्वतंत्रता आंदोलन की जानकारी हो।

अपर जिलाधिकारी न्यायिक ज्ञानेश्वर प्रसाद ने कहा कि दोनों महापुरुषों के कृतित्व, व्यक्तित्व के बारे में सभी को जानकारी लेनी चाहिए, गांधी जी ने जिस समय जन्म लिया उस समय हमारा देश अंग्रेजों के पराधीन था, गांधी जी बैरिस्टर की शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात जब दक्षिण अफ्रीका गए तो उनके साथ रास्ते में बहुत भेद-भाव हुआ, जिससे प्रेरणा लेकर उन्होंने आजादी दिलाने के लिए तमाम आंदोलन संचालित किये, अहिंसा के रास्ते पर चलकर अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर किया, दोनों महापुरूषों की कथनी-करनी में कोई अंतर नहीं था, सभी लोगों को दोनों महापुरुषों के बताए हुए रास्ते पर चलने की शपथ लेनी चाहिए, सत्य-अहिंसा, प्रेम को अपने जीवन में उतारें, तभी जीवन में सफल हो सकेंगे।

राजस्व अधिकारी ध्रुव शुक्ला ने कहा कि आज हम जिन महापुरुषों का जन्म दिवस मना रहे हैं, उनमें गांधी जी सत्य-अहिंसा के पुजारी थे वहीं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सादगी, ईमानदारी के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकारों का पालन करते हुए देश को सफल स्वावलम्बी बनाने में अपना योगदान दें। डिप्टी कलेक्टर शिव नरेश ने कहा कि आज हम उन दो महापुरुषों का जन्म दिवस मना रहे है,ं जिसमें से एक ने देश को सत्य-अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराया वहीं सादगी के प्रतीक पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान-जय किसान का नारा देकर जहां देश की सरहदों को सुरक्षित करने का कार्य किया वहीं खाद्यान्न के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने उपस्थित लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि सभी अपने दायित्वों का निर्वहन निष्ठा पूर्वक करें, देश को विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दें ताकि कोई विकसित राष्ट्र हमारी नीतियों में दखल-अंदाजी न कर सके।

गोष्ठी को सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. श्वेता सैनी, जिला आबकारी अधिकारी हितेन्द्र कुमार शेखर, प्रशासनिक अधिकारी हरेंद्र कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी अल्का मिश्रा, लोकेंद्र ने संबोधित किया, सत्य प्रकाश द्विवेदी ने गांधी जी की प्रिय रामधुन प्रस्तुत की, कार्यक्रम का संचालन वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर अंजली सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी मनोज यादव, ई-डिस्ट्रिक मैनेजर सौरभ पाण्डेय, अनिल सक्सैना, रोहित दुबे, वीरेश पाठक, सत्येंद्र सिंह, काली चरन, अनुज कुमार, श्रीकृष्ण, राहुल, आलम, पुष्पेन्द्र कुमार, सौम्य वर्धन, अजय यादव के अलावा अन्य अनुभाग प्रभारी आदि उपस्थित रहे।

—————————————————