कुँ. आर. सी. महिला महाविद्यालय में डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का जयंती समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शेफाली यादव जी ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए किया। तत्पश्चात सभी शिक्षक शिक्षिकाओं ने भी आंबेडकर जी की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की संयुक्त सचिव डॉ सुशीला त्यागी जी ने कहा कि यह दिन हमें उन महान विचारक, समाजसेवी और संविधानकार का स्मरण कराता है जिसके संकल्पों ने आज के सशक्त भारत की नींव रखी। हमें ऐसे महापुरुष के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना चाहिए। महाविद्यालय की प्राचार्या जी ने आंबेडकर जी के जीवन एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा बाबा साहेब के आदर्शों को अपनाकर ही समाज में समानता, बंधुत्व और न्यायिक भावना को स्थापित कर सकेंगे।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता अलका पाठक जी ने कहा कि देश में आज महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों से समकक्षता रख रही हैं इसका संपूर्ण श्रेय हमारे संविधान निर्माता को है। वह महज़ दलित, वंचित और शोषितों के नेता नहीं थे अपितु उन्होंने महिलाओं के अधिकारों की जंग को पुरजोर तरीके से लड़कर हमें मजबूत आधार प्रदान किया।
कार्यक्रम में एनसीसी कार्यक्रम अधिकारी सविता जी तथा एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी श्री राजेश सेन एवं प्रतिभा जायसवाल के साथ साथ एनसीसी कैडेट्स तथा एनएसएस स्वयंसेविकाएं सम्मिलित रहीं। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापिका जया सिंह ने किया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से इस समय आंबेडकर जयंती पखवाड़ा मनाया जा रहा है ऐसे में महाविद्यालय में भी अनेक सृजनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। “डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के दर्शन की प्रासंगिकता एवं उपयोगिता” शीर्षक पर वाद-विवाद एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता तथा परंपरागत खेल कूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं की सूची निम्नवत है –
निबंध लेखन प्रतियोगिता में कुल पंद्रह छात्राओं ने प्रतिभाग किया जिसमें सोमलता, अंजली तथा दिव्या प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहीं।
वाद- विवाद प्रतियोगिता में कुल आठ छात्राओं ने भाग लिया जिसमें आभा मिश्रा, साल्वी शुक्ला तथा क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ स्थान रहीं।
परंपरागत खेल कूद प्रतियोगिता में बारह छात्राओं ने प्रतिभाग किया जिसमें भावना, काजल परमार तथा पायल प्रायः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहीं।



