मैनपुरी (सूवि)जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने जिला सलाहकार समिति बैंकर्स की बैठक में उपस्थित विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों से कहा कि बैंकर्स ऋण-जमानुपात पर ध्यान दें, सिर्फ धनराशि जमा करने पर ध्यान केंद्रित न करें बल्कि ऋण वितरण पर फोकस करें, भारतीय स्टेट बैंक का सीडी रेशियो बेहद खराब है, बैंकर्स शासन की संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रेषित पत्रावलियों को प्राथमिकता पर स्वीकृत कर ऋण वितरण करें ताकि लाभार्थी अपना स्वतः रोजगार स्थापित कर स्वावलंबी बने। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मत्स्य, पशुपालकों को केसीसी योजना का लाभ बैंकर्स की हीला-हवाली के कारण नहीं मिल पा रहा है, मत्स्य, पशु पालन के बड़ी संख्या में आवेदन पत्र बैंकों में स्वीकृत के उपरांत भी ऋण वितरण हेतु लंबित है, काफी संख्या में आवेदन पत्र बैंकर्स द्वारा स्वीकृत ही नहीं किए गए हैं। उन्होंने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बैंकर्स सोच बदलें, जरूरतमंद पात्र व्यक्ति को ऋण उपलब्ध कराने में दिलचस्पी दिखाएं। उन्होंने कहा कि जनपद की प्रत्येक बैंक का ऋण-जमानुपात 60 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए लेकिन भारतीय स्टेट बैंक का सीडी रेशियो मात्र 42 प्रतिशत है जो निराशाजनक है, ऋण वितरण में प्राइवेट सेक्टर की आई.सी.आई.सी.आई., एच.डी.एफ.सी., एक्सिस बैंक ने काफी बेहतर कार्य किया है, अन्य बैंकर्स भी इन बैंकों से प्रेरणा लेकर ऋण वितरण की स्थिति सुधारें।
श्री सिंह ने संचालित विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा करने पर पाया कि मुख्यमंत्री युवा स्वःरोजगार योजना में वार्षिक लक्ष्य 173 के सापेक्ष विभिन्न बैंकों में 194 पत्रावलियां प्रेषित की गई, जिनमें से बैंकर्स द्वारा 86 पत्रावलियों को स्वीकृत कर 56 पर ऋण उपलब्ध कराया गया, जबकि 73 पत्रावलियां बैंकर्स द्वारा वापस की गई, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में वार्षिक लक्ष्य 210 के सापेक्ष 248 पत्रावलियां बैंकों को प्रेषित की गई जिसमें से 88 पत्रावलियों को स्वीकृत कर 64 पर ऋण वितरण किया गया, 113 पत्रावलियां बैंकर्स द्वारा उद्योग विभाग को वापस की गयीं, जिस पर उन्होंने उपयुक्त उद्योग को निर्देशित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री युवा स्वःरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की बड़ी संख्या में पत्रावलियां बैंकर्स द्वारा वापस की गई, वापस की गई पत्रावलियों की स्वयं समीक्षा कर कमियों को दूर कराकर बैंकर्स से समन्वय स्थापित कर पात्रों को योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। उन्होंने समीक्षा के दौरान कहा कि संचालित विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं में अधिकारी लक्ष्य की पूर्ति के लिए नहीं बल्कि योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को लाभ दिलाने की दिशा में कार्य करें ताकि वह भी बैंक के सहयोग से अपना रोजगार स्थापित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधार सकें।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने बैंकर्स से कहा कि सर्वोच्च प्राथमिकता पर फसली, कृषि ऋण के लक्ष्यों की पूर्ति करें, किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरे, उनकी आय में वृद्धि हो इसके लिए संचालित योजनाओं का लाभ किसानों को समय से मिले, अभियान चलाकर किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाएं, केसीसी की प्रगति भी ठीक नहीं है, व्यवसाहिक बैंकों के नये किसान केडिट कार्ड बनाने के वार्षिक लक्ष्य 41676 के सापेक्ष मात्र 16820 केसीसी बनाये गये हैं, जबकि व्यवसाहिक बैंकों द्वारा 61178 केसीसी नवीनीकरण लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 26352 केसीसी नवीनीकृत किये गये हैं, जबकि सहकारी बैंकों द्वारा नवीनीकरण लक्ष्य 3811 के सापेक्ष 6857 एवं नये लक्ष्य 2596 के सापेक्ष 610 केसीसी बनाये गये हैं। उन्होने समीक्षा के दौरान बैंकर्स से कहा कि मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, शिक्षा ऋण प्रगति, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टेण्डअप इण्डिया, एक जनपद-एक उत्पाद, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना जैसी महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजनाओं में प्रेषित आवेदन पत्रों के सापेक्ष ऋण वितरण की प्रगति संतोषजनक नहीं है, बैकर्स माह के अंत तक प्रगति सुधारें।
बैठक में रिजर्व बैंक प्रतिनिधि मार्कण्डेय चतुर्वेदी, नवार्ड के प्रतिनिधि अरूण कुमार, उपायुक्त उद्योग उत्कर्ष चन्द, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी पवन यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. सोमदत्त सहित अन्य अधिकारी, विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक आदि उपस्थित रहे, बैठक का संचालन अग्रणी जिला प्रबंधक अनिल प्रकाश तिवारी ने किया।




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