फिल्मों से गायब होता शास्त्रीय संगीत


मैनपुरी(सूवि)सीनियर मैनेजर एच.आर. आगरा भाष्कर तिवारी ने बताया कि विश्व के डेयरी शिखर सम्मेलन में शरीक हुए 48 विदेशी मेहमानों ने गांव नंगला पचौरी में देशी दूध उत्पादकों से मुलाकात की, मेजबान दूध उत्पादकों की संस्था सहज ने उन्हें भारतीय किसानों से रूबरू कराते हुए बताया कि छोटे किसानों का यह एक बड़ा प्रयास है, जिसके कारण संस्था प्रदेश की सबसे बड़ी दूध उत्पादक संस्था बन गई है। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उदघाटित विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन के समापन के तुरंत बाद विदेशी मेहमान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष, आईएनसी आईडीएफ के सचिव मीनेश शाह के निमंत्रण पर आगरा के 1000 किलो क्षमता दूध वाला बल्क कूलर प्लांट देखने गए, जहां उन्होंने सहज के द्वारा लघु व सीमांत किसानों के क्रिया-कलाप को नजदीक से देखा।
श्री शाह ने आगरा जाकर वहां के नए, सफल दुग्ध उत्पादकों के कार्यकलाप को देखने के लिए विदेशी मेहमानों को प्रस्ताव दिया था कि कैसे भारतीय डेयरी सेक्टर में वह निरंतर सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। संस्था की महिला सदस्यों ने अपने पशुपालन, दूध उत्पादन के तौर-तरीके बताये, संस्था की निदेशक सपना ने कहा कि एक दिन पहले एक लाख सदस्यों वाली संस्था के पूर्ण निदेशक मंडल ने विशेषज्ञों से शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श किया था। उन्होंने बताया कि संस्था प्रतिदिन 05 लाख, 20 हजार किलोग्राम दूध का व्यापार करती है जिसके फलस्वरूप इसका वार्षिक कारोबार लगभग 830 करोड़ है, 85 प्रतिशत हिस्सा दूध उत्पादकों को वापस दिया जा रहा है। कनाडा, जापान, अमेरिका जैसे विकसित देशों से आए विदेशी मेहमानों ने निरीक्षण के दौरान कई सवाल किए और जानने की कोशिश की कि हिंदुस्तान विश्व का दूध उत्पादक पारंपरिक तरीकों से कैसे बना। सहज के सीईओ बसंत चौधरी उन्हें एक हजार लीटर दुग्ध शीतलीकरण संयंत्र में ले गए और बताया कि पारंपरिक दूध उत्पादकों की सम्मिलित शक्ति का नतीजा है कि हम उ.प्र. के सबसे बड़े दूध उत्पादक संगठन के रूप में खड़े हैं, हम 10 जिलों के एक लाख से ज्यादा उत्पादकों, जिसमें 55 प्रतिशत महिला हैं, विगत साल में वार्षिक मुनाफे के तौर पर 12 करोड़ रू. कमाया है, हमारी अतिरिक्त जमापूंजी के रूप में 80 करोड़ रू. बैंकों में जमा है, इस दूध उत्पादक संस्था का लक्ष्य अगले साल तक लगभग 06 लाख किलो तक दूध संकलन का लक्ष्य रखा है।
जानकारी के मुताबिक इस बार 970 करोड़ का कारोबार का लक्ष्य है और इसी अनुपात में मुनाफा बढ़ेगा, खास बात यह है कि पौष्टिक आहार चारा एवं कृत्रिम गर्भाधान और पशुओं की देखभाल को लेकर यह संस्था जागरूकता अभियान भी चलाती है, वर्तमान में इनके सदस्यों पास करीब 05 लाख गाय-भैंस हैं, किस प्रकार छोटे व सीमांत किसान अपने पशुधन का ख्याल रखते हुए दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, यहां बायोगैस कैसे काम करता है, कैसे गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत का उपयोग किया जाता है और उत्सर्जन आदि की प्रक्रिया क्या है, ऐसे तमाम बिंदुओं को बारीकी से देखा और समझा। उन्होंने बताया कि वह डेयरी प्रोडक्टस के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहे हैं और आज सहज का नाम जाना माना है।