मैनपुरी(सुवि) जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने ट्रांसपोर्ट नगर में नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित बृहद कान्हा गौ-आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण करते हुये अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका को आदेशित करते हुये कहा कि गौशाला मंे साफ-सफाई के बेहतर प्रबन्ध रहें, सरंक्षित गौवंशों के लिए पर्याप्त मात्रा मंे भूसे, हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये, पशु चिकित्साधिकारी नियमित रूप से गौ आश्रय स्थल का भ्रमण कर संरक्षित गौवंशों के स्वास्थ्य की देख-भाल करंे, गर्मी के मौसम में गौवंश धूप में न रहंे, उन्हें समय से टिनशेड मंे रखने हेतु कर्मियों को हिदायत दी जाये, गोवंशों को समय से दाना, चारा खिलाया जाये, पीने के पानी की उचित व्यवस्था रहे, गोबर का नियमित निदान हो।

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श्री त्रिपाठी ने निरीक्षण के दौरान जानकारी करने पर पाया कि गौशाला में 824 गोवंश संरक्षित हैं, जिसमें 516 गाय, 230 नन्दी एवं 78 बछिया-बछड़े हैं, मुख्यमंत्री गोधन सहभागिता योजना में अब तक 430 गोवंशों को पशुपालकों को उपलब्ध कराया जा चुका है, वर्तमान में 02 गौवंश अस्वस्थ हैं, जिन्हें प्रतिदिन पशु चिकित्साधिकारी द्वारा उपचार दिया जा रहा है, संरक्षित गोवंशो मे से 95 प्रतिशत की ईयर टैगिंग हो चुकी है, अधिकांश गोवंशों का टीकाकरण भी हो चुका है, संरक्षित गोवंश हेतु पर्याप्त मात्रा में हरा चारा, भूसा, दाना उपलब्ध है। उन्होने कहा कि सभी पशुओं का बधियाकरण कर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाए ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुसार बेहतर देख-भाल सुनिश्चित की जा सके, बीमार, दुर्घटनाग्रस्त एवं कमजोर पशुओं को अलग स्थान पर रखने के निर्देश दिए ताकि उनका उपचार सुचारु रूप से किया जा सके, गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए गौशाला में वेंटिलेशन एवं तापमान नियंत्रण की व्यवस्थाओं के निर्देश देते हुए कहा कि कूलर की अपेक्षा पंखों की व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, जहां-जहां पंखे खराब हैं, उन्हें तत्काल ठीक कराया जाए तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त पंखों की व्यवस्था की जाए साथ ही गौशाला में छायादार स्थानों को बढ़ाया जाए, जिससे पशु सीधे धूप के संपर्क में न आएं और उन्हें प्राकृतिक रूप से ठंडा वातावरण मिल सके।

उन्होने कहा कि दिन के अत्यधिक गर्म समय में पशुओं को बाहर निकालने के बजाय छायादार, सुरक्षित स्थान पर रखा जाए जबकि शाम, रात्रि के समय उन्हें खुले स्थान पर छोड़ा जाये, इससे गोवशों को गर्मी से राहत मिलेगी और उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा, गोवंशों के भोजन की गुणवत्ता, समयबद्धता पर ध्यान दिया जाये, सभी गोवंशों को समय पर पर्याप्त मात्रा में चारा, भूसा, चोकर आदि उपलब्ध करायें, पानी के टैंकों, पाइपलाइन की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि किसी प्रकार की गंदगी या संक्रमण की संभावना न रहे, गोशाला परिसर में नियमित रूप से सफाई कराई जाए, जहां भी गंदगी या कचरा जमा हो रहा है उसे तत्काल हटाया जाए, कीट एवं मच्छरों से बचाव के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं, साफ-सुथरा वातावरण न केवल पशुओं के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है बल्कि यह पूरे परिसर को भी व्यवस्थित एवं स्वच्छ बनाए रखता है।

उन्होने कहा कि वर्षा के दौरान जल-भराव की स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए पहले से ही नालियों एवं निकासी मार्गों को साफ एवं व्यवस्थित किया जाए जल-भराव से न केवल पशुओं को परेशानी होती है बल्कि बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। निरीक्षण के दौरान अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका बुद्धि प्रकाश, पशु चिकित्साधिकारी पवन कुमार, अनिल सक्सैना आदि उपस्थित रहे।

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