मैनपुरी(सूवि)पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जनपद मैनपुरी के 11 श्रद्धालुओं को ’’संस्कृति का स्वाभिमान-परम्पराओं का हो सम्मान’’ सोमनाथ स्वाभिमान पर यात्रा दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए कहा कि आज देश, प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक नया दौर चल रहा है, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को पुनः स्थापित करते हुए विश्व पटल पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, उ.प्र. जो देश का सबसे बड़ा राज्य है वह भी अपनी परंपराओं, विरासत को सहेजते हुए आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होने कहा कि “विकसित भारत” की संकल्पना तभी साकार होगी जब उ.प्र. “विकसित प्रदेश” के रूप में स्थापित होगा और इसी दिशा में “विकसित मैनपुरी” का लक्ष्य लेकर जनपद आगे बढ़ रहा है। उन्होने कहा कि इस प्रकार की सांस्कृतिक यात्राएं समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं, यह यात्राएं न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती हैं बल्कि लोगों में अपनी परंपराओं के प्रति गर्व की भावना भी उत्पन्न करती हैं, इस यात्रा में शामिल 11 प्रतिभागी अत्यंत सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें इस महत्वपूर्ण यात्रा में शामिल होने का अवसर मिला है, यह यात्रा मैनपुरी से प्रारंभ होकर लखनऊ पहुंचेगी, जहां से यात्रियों को विशेष वातानुकूलित ट्रेन के माध्यम से गुजरात स्थित पवित्र सोमनाथ मंदिर के लिए रवाना किया जाएगा। उन्होने कहा कि मा. मुख्यमंत्री द्वारा ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने का कार्यक्रम प्रस्तावित है, यात्रियों को सोमनाथ धाम में विशेष दर्शन एवं पूजन का अवसर प्रदान किया जाएगा, जो उनके लिए एक अद्वितीय, आध्यात्मिक का अनुभव होगा इसके अतिरिक्त गुजरात सरकार द्वारा आयोजित लाइट एंड साउंड शो का भी आनंद यात्रियों को प्राप्त होगा, जिसमें सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व एवं गौरवशाली अतीत को प्रस्तुत किया जाएगा साथ ही यात्रा के दौरान ध्यान एवं योग सत्रों का आयोजन भी होगा, जिससे प्रतिभागियों को मानसिक एवं आध्यात्मिक शांति का अनुभव प्राप्त होगा।

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पर्यटन मंत्री ने बताया कि यह यात्रा दि. 20, 21 एवं 22 अप्रैल को सम्पन्न होगी इसके पश्चात सभी यात्री 23 अप्रैल को लखनऊ वापस लौटेंगे तथा 24 अप्रैल को जनपद पहुंचेंगे, वापसी के उपरांत यात्रियों के अनुभवों को साझा करने हेतु एक विशेष गोष्ठी आयोजित की जायेगी ताकि जनपद के अन्य नागरिक भी इस यात्रा के अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। उन्होने कहा कि इस यात्रा में 18 वर्ष से लेकर 71 वर्ष तक के प्रतिभागियों को सम्मिलित किया गया है, यह विविध आयु वर्गों का समावेश समाज में सामंजस्य एवं पारस्परिक सहयोग की भावना को बढ़ावा देगा। उन्होने युवाओं से अपेक्षा की है कि वह यात्रा के दौरान वरिष्ठ नागरिकों का विशेष ध्यान रखें और उनकी सहायता करें, जो भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होने बताया कि यात्रा के दौरान प्रतिभागियों के लिए आवास, भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है, नोडल अधिकारी को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वह सभी यात्रियों की आवश्यकताओं का ध्यान रखें और यात्रा को सुरक्षित एवं सफल बनाएं। उन्होने कहा कि सोमनाथ मंदिर जो कि भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है, भारतीय आस्था और इतिहास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, लगभग 1000 वर्ष पूर्व इस मंदिर पर हुए आक्रमण के बावजूद यह आज भी अपनी भव्यता और गौरव के साथ खड़ा है, वर्ष 2026 इस ऐतिहासिक घटना के 1000 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक है और ऐसे समय में इस यात्रा का आयोजन विशेष महत्व रखता है। उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा इस प्रकार की यात्राओं का आयोजन यह दर्शाता है कि सरकार भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पहले इस प्रकार की व्यवस्थाएं सीमित थीं लेकिन आज सरकार द्वारा यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, आर्थिक सहयोग एवं सम्मान प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने उनके सुरक्षित, सुखद एवं प्रेरणादायक यात्रा की कामना की। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह यात्रा प्रतिभागियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण अनुभव साबित हो और वह लौटकर अपने अनुभवों से समाज को भी लाभान्वित करेंगे।

जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपरा और अदम्य “जिजीविषा” का प्रतीक है यह उस “जिजीविषा” (जीने की इच्छा) और “युयुत्सु” (संघर्ष और विजय की इच्छा) का जीवंत उदाहरण है, जो भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद भारतीय संस्कृति ने हर बार स्वयं को पुनर्स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि 01 हजार वर्ष पूर्व हुए आक्रमण के दौरान महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर को काफी क्षति पहुंचाई थी लेकिन आज वही मंदिर अपने पूर्ण वैभव के साथ खड़ा है, यह इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति पर कितने भी आघात क्यों न हों, वह पुनः उठ खड़ी होती है और आगे बढ़ती है। उन्होने प्रसिद्ध शायर मोहम्मद इक़बाल की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि “यूनान-मिस्र-रोम सब मिट गए जहां से, बाकी मगर है अब तक नामों-निशां हमारा” उन्होंने आगे कहा कि पंक्तियां भारतीय संस्कृति की अमरता को दर्शाती हैं, “कुछ बात है कि हस्ती-मिटती नहीं हमारी” यह केवल एक कविता नहीं बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता का यथार्थ है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम है, वर्ष 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि जो समाज या देश अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं से कट जाता है, वह मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है, आर्थिक विकास आवश्यक है लेकिन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बनाए रखना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा ने कहा कि संख्या “11” को भारतीय परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है, यह केवल एक संख्या नहीं बल्कि विविधता में एकता का प्रतीक भी है, इस यात्रा में चयनित 11 प्रतिभागी समाज के विभिन्न वर्गों, आयु समूहों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसमें युवाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी को सम्मिलित किया गया है, जो भारतीय समाज की समावेशी भावना को दर्शाता है। उन्होने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी “निरंतरता” है, भारत एक ऐसा देश है जिसने कभी भी अपने अतीत को त्यागा नहीं बल्कि अपनी परंपराओं और विरासत को साथ लेकर ही भविष्य की ओर अग्रसर हुआ है। उन्होंने कहा कि 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ मंदिर को प्रथम स्थान प्राप्त है और यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, सोमनाथ मंदिर भारतीय आस्था, विश्वास और अदम्य शक्ति का प्रतीक है। उन्होने कहा कि जैसे हर व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, वैसे ही सोमनाथ मंदिर ने भी इतिहास में अनेक चुनौतियों, कठिनाइयों का सामना किया है, विदेशी आक्रमणों के बावजूद इस मंदिर की आस्था और पहचान कभी समाप्त नहीं हुई, यह भारतीय संस्कृति की उस अटूट आत्मा का प्रमाण है, जो किसी भी परिस्थिति में समाप्त नहीं होती बल्कि हर बार और अधिक सशक्त होकर उभरती है।

मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आए हुए लोग एक साथ इस पवित्र यात्रा में सम्मिलित हो रहे हैं, यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ यात्रा का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत व्यापक है, बचपन से ही हम सभी ने इतिहास में पढ़ा है कि वर्ष 1026 में महमूद गजनवी ने इस पवित्र स्थल पर आक्रमण किया था, इसके बाद भी समय-समय पर कई आक्रमण हुए और मंदिर को बार-बार क्षति पहुंचाई गई लेकिन इन सभी उतार-चढ़ावों के बावजूद सोमनाथ मंदिर की आस्था और अस्तित्व कभी समाप्त नहीं हुआ। उन्होने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृति की दृढ़ता, पुनर्जागरण और अखंडता का जीवंत प्रतीक है, यह मंदिर हमें यह सिखाता है कि चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं यदि हमारी जड़ें मजबूत हैं तो हम पुनः उठ खड़े हो सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से अपेक्षा की है कि वह यात्रा से लौटने के बाद अपने अनुभवों को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में साझा करें ताकि अधिक से अधिक लोग इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में “दीक्षा” का विशेष महत्व है, दीक्षा का अर्थ केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं बल्कि उसे आत्मसाद करना और जीवन में उतारना भी है, इसी प्रकार, सोमनाथ यात्रा भी केवल एक भ्रमण नहीं है बल्कि यह एक प्रकार की आध्यात्मिक दीक्षा है जो व्यक्ति को अपने मूल्यों, संस्कृति और आस्था से जोड़ती है।

जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने कहा कि भारतीय संस्कृति और इतिहास को गहराई से समझने का भी अवसर प्राप्त होगा, सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल में स्थित है और इसे भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम एवं सर्वाेच्च स्थान प्राप्त है, यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि भारतीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का एक प्रमुख केंद्र है। उन्होंने पौराणिक कथाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मान्यता के अनुसार चंद्रदेव ने इस मंदिर का निर्माण चांदी से कराया था जबकि रावण ने इसे स्वर्ण से निर्मित करवाया इसके अतिरिक्त यह भी कहा जाता है कि जब चंद्रदेव को श्राप मिला था, तब उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की आराधना की और श्राप से मुक्ति प्राप्त की, तभी से यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहां भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि “जब ईश्वर बुलाते हैं, तभी मनुष्य को ऐसे पवित्र स्थलों के दर्शन का अवसर प्राप्त होता है, इस दृष्टि से सभी चयनित प्रतिभागी अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें इस यात्रा में सम्मिलित होने का अवसर मिला है।

सोमनाथ मंदिर के दर्शन हेतु जनपद से यात्रा के नोडल अधिकारी सहायक प्रबंधक उद्योग अजय परिहार के साथ वेदपाल सिंह, पवन कुमार अग्रवाल, कुमार आदित्य चौहान, अमन कुमार, प्रतुल कुमार, मंजू, सर्वेश कुमार दुबे, कृष्णा गोस्वामी, सविता, कुल्लेश भ्रमण पर भेजे गये हैं। इस दौरान परियोजना निदेशक सत्येंद्र सिंह, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, जिला पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव, पर्यटन फैलो जुबेर अहमद, के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष शिवदत्त भदौरिया, मंजूषा चौहान, उदय चौहान, पंकज भदौरिया, अमित गुप्ता, बबलू पांडेय, विकास चौहान सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन सतीश मधुप ने किया।

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