मछुआ दुर्घटना बीमा से प्रत्येक आवंटी हो आच्छादित, कैंप आयोजित कराकर समिति के सदस्यों का कराया जाये बीमा- वीरू साहनी।
मैनपुरी(सुवि) उ.प्र. मत्स्य जीवी सहकारी संघ लि. के सभापति वीरू साहनी ने मत्स्य विभाग की संचालित योजनाओं की बिन्दुवार समीक्षा के उपरांत पत्रकारों से वार्ता करते हुये बताया कि जनपद में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा, मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की प्रगति काफी बेहतर है, मछुआ, अनुसूचित जाति के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित योजनाओं में लाभान्वित कराये जाने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये गये हैं, जनपद में समितियों के गठन की प्रगति संतोषजनक नहीं है, मत्स्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक विकास खंड मंे कम से कम 05-05 समितियों का गठन कर अधिक से अधिक लोगों को समितियों से जोड़ा जाये, जनपद के छोटे-बड़े सभी तालाबों का अभियान चलाकर आवंटन किया जाये, 02 हेक्टेयर से बड़े तालाबों का आवंटन गठित समितियों को किया जाये, आवंटन में निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन सुनिश्चित हो। उन्होने बताया कि जिन पात्रों को मत्स्य पालन, आखेट हेतु पट्टे आवंटित किये गये हैं, उन्हें आवंटित क्षेत्र में तत्काल कब्जा मिले, मत्स्य आखेट के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा आवटिंयों को परेशान न किया जाये, मछली बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इस सम्बन्ध में पुलिस, राजस्व, मत्स्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। उन्होने पत्रकारों द्वारा जनपद में प्रतिबन्धित मांगुर मछली की बिक्री के सम्बन्ध में कहा कि प्रतिबन्धित मांगुर की बिक्री प्रत्येक दशा में रोकी जायेगी, मत्स्य विभाग के अधिकारियों को प्रतिबन्धित मछली की बिक्री, आखेट करने वालों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही हेतु आदेशित किया गया है।
सभापति ने संचालित योजनाओं की समीक्षा के दौरान पाया कि जनपद में 05 नयी मत्स्य समितियों का गठन चालू वित्तीय वर्ष में किया गया है जबकि 02 समितियां जनपद में पूर्व से क्रियाशील हैं, जिस पर उन्होने सहायक निदेशक मत्स्य को आदेशित करते हुये कहा कि जनपद में समितियों के गठन की स्थिति ठीक नहीं हैं, प्रत्येक विकास खंड में मत्स्य समितियों का गठन किया जाये, समितियों के गठन के उपरांत उन्हें मत्स्य पालन हेतु पट्टे आवंटित किये जायें ताकि मछुआ समुदाय, अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को रोजगार के अवसर मुहैया हों और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। उन्होने प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की समीक्षा के दौरान पाया कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 63 लाभार्थियों का चयन कर चयन सूची मत्स्य निदेशालय को प्रेषित की जा चुकी है, मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में विगत् 03 वर्षों में 15 लाभार्थियों को योजनान्तर्गत 13 लाख 61 हजार 440 की राशि अनुदान के रूप में उपलब्ध करायी गयी, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10 हेक्टेयर तालाबों का चयन कर चयन सूची निदेशालय प्रेषित की जा चुकी है, योजनान्तर्गत महिलाओं को 60 प्रतिशत एवं पुरूष लाभार्थियों को 40 प्रतिशत सब्सिडी अनुमन्य करायी जा रही है, निषादराज वोट सब्सिडी योजनान्तर्गत वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में 06 लाभार्थियों को रू. 01 लाख 71 हजार की राशि अनुदान के रूप में उपलब्ध करायी गयी, मत्स्य सघन पालन हेतु एयरेशन सिस्टम की स्थापना हेतु वार्षिक लक्ष्य 02 के सापेक्ष अब तक 05 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुये हैं, जिसकी चयन प्रक्रिया संचालित है। उन्होने योजनाओं की समीक्षा के दौरान कहा कि मछुआ समुदाय को संचालित योजनाओं की जानकारी दी जाये ताकि इच्छुक व्यक्ति योजना का लाभ पा सकें। उन्होने जिला अग्रणी प्रबन्धक से कहा कि जिन मछुआ समुदाय के लोगों ने के.सी.सी. हेतु आवेदन किये हैं, बैंकों से समन्वय स्थापित कर उनके के.सी.सी. जारी कराये जायें, किसी भी मछुआ समुदाय के व्यक्ति को के.सी.सी. बनवाने में कठिनाई का सामना न करना पड़े।
सभापति ने बैठक में उपस्थित मत्स्य समितियों के सदस्यों से संवाद कर उनकी समस्याएं जानी साथ ही सदस्यों से कहा कि विभाग की योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलाने में योगदान दें, समितियों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें ताकि उनकी भी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके, समिति केे सदस्यों, मछुआ समुदाय के उपस्थित व्यक्तियों ने बताया कि मत्स्य पालन हेतु पट्टे तो आवंटित किये गये लेकिन कुछ स्थानों पर 02 माह व्यतीत होने के बाद भी पट्टे पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है, के.सी.सी. बनवाने में भी कुछ बैंक शाखाओं में परेशान किया जा रहा है, मत्स्य आखेट के उपरांत बिक्री के दौरान मंडी समिति, पुलिस द्वारा भी कुछ प्रकरण में व्यवधान उत्पन्न किया जा रहा है, कुछ दबंग व्यक्तियों द्वारा नदियों में अवैध ढंग से रोक लगाकर मत्स्य आखेट कर आवंटियों को हानि पहुंचायी जा रही है, जिस पर उन्होने राजस्व, पुलिस, मत्स्य विभाग के अधिकारियों को आने वाली समस्याओं का त्वरित निदान करने के आदेश दिये।
सहायक निदेशक मत्स्य धरमराज सिंह चौहान ने विभागीय योजनाओं के सम्बन्ध में सभापति को विस्तार से जानकारी दी, इस दौरान डिप्टी कलेक्टर अजंली सिंह, क्षेत्राधिकारी सच्चिदानन्द, जिला अग्रणी प्रबन्धक रामचन्द्र साहा, प्रभारी तहसीलदार हेरेन्श कर्दम, मत्स्य विकास अधिकारी धर्मेन्द्र कुमार के अलावा विभिन्न समितियों के अध्यक्ष, सचिव आदि उपस्थित रहे।



