डॉ0 किरन सौजिया सी0से0 एजू0 एकेडमी, मैनपुरी में मेडिटेशन गुरू उपाध्याय श्री विहसंत सागर का बड़े हर्षोल्लास के साथ स्वागत हुआ पूरे विद्यालय परिसर को फूल और मालाओं से सुसज्जित किया गया, जिसमें विद्यालय के बाहर व सभा स्थल पर बनी रंगोली शोभा को चार चांद लगा रही थी। विद्यालय के प्रवेश द्वार पर एनसीसी के छात्रों व बैण्ड के छात्रों ने उनकी अगवानी ली विद्यालय के चेयरमेन डाॅ0 अशोक कुमार के साथ गुरूवर ने विद्यालय में प्रवेश किया। छात्र-छात्रायें पूरे रास्ते में दोनों तरफ फूल लिए खड़े थे वे गुरूवर पर फूल वर्षा कर रहे थे और बोलते जा रहे थे जय जिनेन्द्र, गुरूवर नमस्ते! पूरा विद्यालय परिसर अहिंसा परमोधर्मः की ध्वनि से गुंजायमान था। सभा स्थल को भव्य तरीके से सजाया गया था गुरूवर की पीठिका मोर पंखों से सुशोभित थी। माइक भी फूल मालाओं से सुसज्जित था सभा स्थल पर पहुँचते ही विद्यालय में कई जगह उनके चित्रों से सजे जैन मंत्र लिखे बोर्ड में लगे थे पूरा वातावरण अलौकिकता का आभास करा रहा था। जैन धर्म केवल जैनियों का नहीं है सभी लोगों का है सबसे पहले जैन धर्म के डाॅक्टर साहब ने गुरूदेव नमस्तु-गुरूदेव नमस्तु से वंदना की उन्होंने बताया भगवान महावीर ने विश्व को आलोकित किया। सभी जैन धर्म के पदाधिकारियों के साथ चेयरमेन सर एवं वाइस प्रेसीडेन्ट डाॅ0 किरन सौजिया ने स्टेज पर भगवान महावीर के चित्र का अनावरण किया। चेयरमेन सर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम आरम्भ कराया और उस समय गाया गया दीप से दीप जलाते चलो एवं उनके चित्र पर चेयरमेन सर एवं वाइस प्रेसीडेन्ट मैम ने फूल मालाएँ चढ़ाए। चेयरमेन डाॅ0 अशोक कुमार ने मुनि के चरण स्पर्श किये। डाॅक्टर साहब ने आगे बताया मोर पंख ही इनका आभूषण है जिससे अपने आस-पास के वातावरण को पवित्र करते हैं बिल्कुल कपड़ा नहीं पहनते हैं, जैसा जन्म होता है उसी अवस्था में ही हमेशा रहते हैं तभी तो इन्हें दिगम्बर कहा जाता है। पैदल ही चलते हैं गर्मी, वर्षा, सर्दी कुछ भी हो इसी तरह नग्न रहकर पैदल ही यात्रा करते हैं। 24 घण्टे में एक बार आहार भी लेते हैं अगर आहार में चींटी या बाल आ जाये तो वहीं छोड़ देते हैं और 24 घण्टे बाद फिर भोजन करते हैं बड़ी कठिन तपस्या है इनकी। डाॅ0 अशोक कुमार ने नमस्ते गुरूवर आए हुए अतिथिगण एवं प्यारे बच्चों आपको डाॅक्टर साहब ने गुरूदेव के विषय में बहुत सारी बातें बतायीं हैं लेकिन ये बातें भी उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं। जब पहली बार गुरूवर के मैंने प्रवचन सुने तो मुझमें 10 प्रतिशत बदलाव हो गया, गुरूवर एक साक्षात् ईश्वर की प्रतिमूर्ति हैं, गुरूवर ने हमें चलकर दर्शन दिए और इन बच्चों को भी उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ यही हमारे समाज के सुधारक हैं समाज के पुरोधा हैं। पूरा विद्यालय परिवार की ओर से गुरूवर को आने का धन्यवाद दिया। वाइस प्रेसीडेन्ट डाॅ0 किरन सौजिया ने गुरूवर को शत्-शत् नमन कहा यह सौभाग्य हम सबको मिला है कि ऐसे सन्त के चरण हमारे विद्यालय परिवार पर पड़े हैं हम धन्य हो गये गुरूदेव के त्याग को देखकर हम सभी बहुत प्रभावित हैं हम सभी गुरूदेव की अमृतवाणी सुनने को तैयार हैं। जैन धर्म की वन्दना हुई उसके बाद उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी ने कहा जो संत मंदिर में बैठकर आशीर्वाद देते हैं वो आपको आशीर्वाद देने आपके विद्यालय में आए हैं उन्होंने बच्चों से कहा आप लोग सोचते होंगे कि इतनी ठण्ड में एक धागा भी शरीर पर नहीं है पैरों में जूता-चप्पल नहीं है इतनी ठण्ड में ऐसा कौन आ गया? ऐसे प्रश्न आपके मन में आ रहे होंगे। उन्होंने कहा जन्म और मरण एक स्थिति में ही होता है मैं इस स्थिति में पूरे जीवन रहता हूँ कहा गया है जिसके पास कपड़े उसके पास सौ लफड़े। नग्न रहते हैं हमारे साथ परमात्मा है जिसके पास बिल पावर है उसे किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता। उन्होंने बताया कम्बल जिसमें कम बल है वह ओढ़े कम्बल हम मैं तो आत्मबल है। हम कभी किसी प्रकार की दवाई नहीं लेते अपने बालों को भी उखाड़ते रहते हैं जिस दिन बालों को उखाड़ते हैं उस दिन पानी तक ग्रहण नहीं करते। हमने 16 वर्ष की अवस्था में घर परिवार भाई-बहन, पैसा-मकान सब छोड़ा है। घर छोड़कर मैं कभी घर नहीं गया, उन्होंने आगे बताया 24 वर्ष से हमने नहाया नहीं है दातून नहीं किया, 240 घण्टों तक पानी नहीं पीते। 24 वर्ष से कोई दवाई नहीं खाई, गद्दे का इस्तेमाल नहीं किया। 4 घण्टे की नींद लेकर 20 घण्टे आत्मचिंतन और भगवद् भजन करते हैं। हम अब तक एक लाख सत्तर हजार किमी0 पैदल यात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा में 24 वर्ष से हम बहुत खुश हैं आप पढ़-लिख कर दिगम्बर साधु के दर्शन करेंगे तो आप हमें याद भी करेंगे। उन्होंने बताया हमारी इन्द्रियाँ इतनी मजबूत हैं गर्मी वर्षा सर्दी का एहसास नहीं होता है मैं पहले चश्मा लगाता था वह भी उतर गया। यह सब तपस्या का फल है, उन्होंने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा आप अपना और अपने परिवार का नाम ऊँचा करना चाहेंगे तो आप सबसे पहले जूते चप्पल पहनकर पढ़ाई नहीं करेंगे क्योंकि जूते चप्पल पहनकर सरस्वती नाराज हो जातीं हैं। कभी भोजन करते हुए पढ़ाई नहीं करेंगे, बेड या सोफा पर बैठकर पढ़ाई नहीं करेंगे, रात 11 बजे के बाद पढ़ाई नहीं करेंगे। मेरी मेमोरी इसीलिए इतनी साफ है क्यों कि हम जूता चप्पल नहीं पहनते। उन्होंने आगे बताया जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है वे पूर्व दिशा की ओर तीन बार मुँह से साँस लेकर छोड़ें, ऊँकार ध्वनि का उच्चारण करें तो पढ़ाई में मन लगने लगेगा सब याद किया हुआ कंठस्थ हो जाएगा। जैन सन्त जन कल्याण के लिए हैं। दिगम्बर सन्त के दर्शन करके अर्जुन को विजय प्राप्त हुई, आप भी दिगम्बर सन्त के आशीर्वाद से परीक्षा में अव्वल आओगे, आपमें पाॅजीटिव ऊर्जा आएगी जय महावीर। इसके बाद उन्होंने बताई गई दिनचर्या के आधार पर बच्चों से प्रश्न पूछे जिन बच्चों ने सही उत्तर दिया उनको चेयरमेन सर डाॅ0 अशोक कुमार ने उन्हें गिफ्ट दिया। अन्त में डाॅ0 अशोक कुमार ने गुरूवर को आने के लिए धन्यवाद दिया और सभी आगुन्तक महानुभाव, अध्यापकों एवं बच्चों को भी धन्यवाद दिया।

इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमेन डाॅ0 अशोक कुमार, वाइस प्रेसीडेन्ट डाॅ0 किरन सौजिया, विद्यांशू सौजिया, एनसीसी एएनओ प्रदीप कुमार, अध्यापक डाॅ0 नेम कुमार, सीनियर विंग, जूनियर विंग, प्राइमरी, प्री-प्राइमरी विंग इंचार्ज सहित सभी अध्यापक/अध्यापिकाएँ आदि मौके पर उपस्थित रहे।