मैनपुरी 08 दिसम्बर, 2023- उ.प्र. राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के तत्वाधान में भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत आज जिला कारागार में निरूद्ध बंदियों की क्षय रोग, एच.आई.वी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी एवं सिफलिस की जांच शिविर का उद्घाटन करते हुए जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने कहा कि भारत को टी.बी. मुक्त करने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में सरकार का यह सराहनीय कदम है, जेल में निरूद्ध बंदियों के स्वास्थ्य की जांच होने से जहां उनमें एक और रोगों की जानकारी मिलेगी, वहीं रोगो के चिन्हित होने पर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी। उन्होने बंदियों को टीबी के लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि सरकार द्वारा जांच, इलाज की समस्त सुविधाएं निःशुल्क हैं साथ ही टीबी रोग से प्रभावित व्यक्ति को सरकार द्वारा उसके खाते में रू. 500 प्रतिमाह, पूरे इलाज अवधि तक उपलब्ध कराये जाने का प्राविधान किया गया है। उन्होने कहा कि क्षय रोग अब गंभीर बीमारी नहीं हैं, नियमित दवा लेने, बेहतर उपचार से यह बीमारी जड़ से समाप्त होती है, चिन्हित क्षय रोगी बीमारी को लेकर चिंता न पालें, चिकित्सक द्वारा उपलब्ध करायी गयी दवाओं का समय से सेवन करें।
श्री सिंह ने कहा कि आज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में मेडिटेशन ही खुशहाल जीवन जीने का आधार है, सभी लोगों को आत्मचिंतन, आत्म विश्लेषण की आवश्यकता है, जीवन को खुशहाल बनाने के लिए सभी को अपने अंदर की कमियों को खोज कर दूर करना होगा। उन्होने कहा कि यदि कोई व्यक्ति टीबी के लक्षण से प्रभावित मिले तो उसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र तक भेजने का कार्य अवश्य करें, जिससे कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी के समाप्ति के संकल्प को पूरा हो सके।
जानकारी करने पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि जिला कारागार में 01 हजार निरूद्ध बंदियों में उक्त जांच कराने हेतु 05 दिन की कार्य योजना तैयार की गई है, प्रतिदिन जेल परिसर में कैंप आयोजित कर निरूद्ध बंदियों में उक्त जॉचें कराई जाएगी, जांच के दौरान जिस कैदी में बीमारी के लक्षण मिलेंगे, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि पूर्व में ही जिला कारागार में 02 बंदी क्षय रोग से एवं 04 बंदी एच.आई.वी. पॉजिटिव है, जिनका उपचार किया जा रहा है। उन्होने बंदियों को यौन जनित रोगों, एचआईवी, टीबी, सीफलीस तथा हेपेटाइटिस से बचाव की जानकारी, विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्शित औषधियों का नियमित रूप से सेवन करने की सलाह दी।
इस दौरान जेल अधीक्षक कोमल मंगलानी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अनिल कुमार वर्मा, जेलर पवन त्रिवेदी, डा. गौरव अग्रवाल, डा. सत्येन्द्र सारस्वत, कार्यक्रम अधिकारी रीनू यादव, वंदना सिंह, विकास गुप्ता, अंशुल पाण्डेय, नीरू चौहान, यदुवीर सिंह, वाई.पी. सिंह, अनिल मिश्रा, शिवानी यादव, अवनेन्द्र राजपूत, नरसिंह राठौर, वैभव गुप्ता, अजंली, धर्मेन्द्र आदि उपथित रहे।




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